कोरेचारजामा (Korecharjama)
जितने पाँव पसारेगा तू उतना ही पछतायेगाइतनी औकात तेरी खाट में सिमट जाएगा जिस रोज़ बुलावा आएगा मटकी में सिमट […]
जितने पाँव पसारेगा तू उतना ही पछतायेगाइतनी औकात तेरी खाट में सिमट जाएगा जिस रोज़ बुलावा आएगा मटकी में सिमट […]
तीखी बात का तीर चलादृष्टिकोण को बेध गयाविचारों के समंदर मेंझांझावत सा उठ गया हलचल तल तक पहुंचीक्रोध विकार घुलने
माँ सोई थी बच्चे ने जगायामाँ मुझको है भूख लगीमाँ ने झटक दिया उसकोसुबह की नींद बड़ी गहरी सुबह लगी
खुल गयी खुल गयी खुल गयी हैखुल गयी खुल गयी खुल गयी हैसपनों के ताज़ा रस की दूकान सुन्दर सुन्दर
खिली खिली सी सुबह मेंखिला खिला सा मेरा मनमंद हवा के झोंकों सेइठलाते उपवन में सुमन अँधेरे से लड़ते झगड़तेरौशनी
एक और दिन उसनेकुछ यूँ गुज़ार दियासूरज पूरब से पकड़ापश्चिम में उतार दिया इन्तहा हो गयी थीउसके इंतज़ार कीमहबूब भी
ये हमको पता हैजहाँ ने सबको ठगा हैतेरे ऐतबार पे एक बारफिर ऐतबार जगा हैपता है कि ज़ख्मफिर से लगेंगे
चलो दोनों बहस करते हैंआओ हम बहस करते हैंतीसरे को पकड़ते हैंऔर थोड़ा झगड़ते है दो बातें तुम कहनादो बातें
मामुली सी एक थी बातचली फिर खतम हो गईबातों में से निकली बातबात फिर शुरू हो गईबातें हुईं जब बढ़ी
उम्मीद से ज़िंदा सब हम हैंउम्मीद पे दुनिया कायम हैउम्मीद से थी माताजी जबजग में प्रगटे हम तुम हैं उम्मीद
इंसां जिसने ने सब हज़म कर लियाजिसकी भुख का कहर खत्म नहीं होताकहता है कुत्ते को घी हजम नहीं होता
WHENproblems bloomed like thornsand every hope was torn WHENthe system turned curseand destiny reversed WHENno shoulder stood nearand dreams drowned
स्टेशन के बाहर एक बच्चा रो रहा थारेल से बीच सफर में उतर जो गया था रो रहा था वो
बहोत दिना है गए सखा के धाम सुदामा सोच रह्यो मिलौ ऐसो सत्कार कि सुध घर की मैं बिसराय गयो
मेरे बचपन में तुझे छूना चाहता हूँ,एक बार तेरे संग खेलना चाहता हूँ वो हँसी, वो खेल, वो नटखट बातें,वो
तुम जो सही नहीं हो तो कोई बात नहींकम सही ज़रूर हो पर गलत तुम नहींअधूरे इस जहाँ में जब
है सफर वो हसीं जहाँ रेले न झमेलेकोई साथ नहीं मुसाफिर चल अकेले सामान साथ कोई तेरे न जायेगाकारवां तमाम
एक रोज़ जब रिटायर हो जाऊंगा मैंपहले तो खुद को होश में लाऊंगा मैंदशकों गुलामी की जो आदत लगी हैउस
ज़िन्दगी का सफर तो तय चलने से होगारुक कर सोचते रहने से क्या हासिल होगा कितना चले कहाँ पहुंचे इसका
ज़िन्दगी से कहाँ कुछ ज़्यादा कमायासच गर कहें तो हमने धोखा ही खायाउम्रदराज़ गोया हम रहे कसमसातेबचपन गया तो सीधा