अंध-भक्त
मुद्दतों से रहता आया हूँ यही घर है मेरा गन्दी नाली का कीड़ा मुझसे न उलझना मुद्दतों से रहता आया […]
मुद्दतों से रहता आया हूँ यही घर है मेरा गन्दी नाली का कीड़ा मुझसे न उलझना मुद्दतों से रहता आया […]
खोपचे में मारा जब मारा मुझेलमलेट कर डाला जब मारा मुझेखोपचे में मारा पहले जताया मैं सबसे अलग हूँफुद्दू हैं
कच्ची उम्र थी मस्ती चढ़ी सर थीदोस्त लाया था उसको भी थमा दीउसने सिगरेट सुलगा ली अच्छा लगा एहसास हुआ
वक़्त आ गया है कि शेर राजा तो रहेगाजंगल में मगर उससे अब कोई न डरेगावो डर जिससे कभी कांप
कुछ चलता है मन के भीतरज़ज़्बात हिलोरें लेते हैंकुछ क़दमों को है खींच रहाजब तुम से विदा हम लेते हैं
शाम हो चली है चलो आईने से नज़रें मिला लोन काब उतार दो असलियत से हाथ मिला लो मालूम ही
परम पूज्य मातेश्वरीश्री ऐ आई सुनो नापाप की मटकी मेंअलार्म लगा दो न पाप जब बढ़ जाएमटकी भरने को जब
घर बैठे काम चलेगा नहींक्योंकि तू मर्द बच्चा हैतेरे वज़ूद के इर्द गिर्दघूमता परिवार का चक्का है ये सिस्टम ही
मेरे बचपन में तुझे छूना चाहता हूँ,एक बार तेरे संग खेलना चाहता हूँ वो हँसी, वो खेल, वो नटखट बातें,वो
बेगानी शादी में अब्दुल्ला बनकर दावत उड़ाने का मज़ा कुछ और हैनचना ना आये ढोल पर फिर भी कमर मटकाने
गोरे मन भाय रहीकारे संग ब्याह दईमेरे लिखे करम ऐसेबैठी पछताय रहीगोरे मन भाय रहीकारे संग ब्याह दई कारो उज्जड
कल का दिन कुछ खास थामेरे जन्मदिन पर परिवारसाथ था गुब्बारे बेचती महिलाका छोटा सा बच्चामासूम चेहरानीचे से नंगाटूकुर टूकुर
कुछ सुनना चाहता हूँकुछ कहना चाहता हूँसुख दुख में तेरे संगमैं रहना चाहता हूँकहासुनी ना होइसलिए मेरे बच्चेउदगार इस दिल
क्या चाहते हो तुम गुमनाम मर जाऊंहांशिये पर रहूं मैं रौशनी में न आऊं क्या चाहते हो तुम गुमनाम मर
स्मार्ट तुम पढ़े लिखे हो, है अच्छी नौकरीसोच मगर छोटी है, ईगो बहुत बड़ीबॉस बन कर बैठे हो, हैं अच्छे
किसी ने ऐसा कुछ कह दिया हैअहम् को मेरे झकझोर दिया हैदिल की धड़कन तेज़ हो रही हैगुस्सा भीतर मुझे
बॉस चैक मेरा रोज़ प्रोफाइल करता हैमेरे हुनर का यूँ तो इस्तेकबाल करता हैतनखा नहीं बढ़ाता स्माइल करता है सामने
आवारा बादलचाँद को कुछ देर ढक करअपने वज़ूद का गुरूरजरूर कर सकते हैचाँद की चमक कोकम तो नहीं मेरी वफ़ा
भारत की बेटी ये है भारत की बेटीभाग्य देखो कैसे कैसे लाती है बेटी लाल बत्ती पर फटे मैले कपड़ों
बड़ी मौज थी तुमसे मिलने से पहलेज़िन्दगी थी टशन तुमसे मिलने से पहले सर्दी की थी चिंता न गर्मी का