लम्हे जो चंद मिले हैं..
लम्हे जो चंद मिले हैं तो खुद पर ध्यान दो चलोकांटे हैं चुभे पैरों में ज़रा उनको निकाल चलोसफर सिर्फ […]
लम्हे जो चंद मिले हैं तो खुद पर ध्यान दो चलोकांटे हैं चुभे पैरों में ज़रा उनको निकाल चलोसफर सिर्फ […]
शिकार की वो शौकीन वो उसका शिकार थाप्यार होता था कभी अब मारता फुंफकार थावो बोलती जाती थी वो केवल
ज़रूरतें महँगी न थीं कभीहाँ… शौक मंहगे हो गए।ममता आज भी सस्ती है,पर रिश्ते मंहगे हो गए। हमने ज़रूरतें छोड़