पानी पानी (Pani Pani)
पानी पानी कैसा पानी खारा पानी मीठा पानीगहरा पानी उथला पानी ठहरा पानी बहता पानी सावन के महीने मैं कैसे […]
पानी पानी कैसा पानी खारा पानी मीठा पानीगहरा पानी उथला पानी ठहरा पानी बहता पानी सावन के महीने मैं कैसे […]
घर बैठुंगा कल से शायर हो जाऊँगायारो मैं कल से रिटायर हो जाऊंगा ऑफिस ने रुतबा आत्मसम्मान दियारूपया प्रतिष्ठा और
रुख-ए-हवाओं की कहाँ परवाह किया करते हैंबाज़ परिंदे हौसलों से उड़ान लिया करते हैं नेकी बदी के फलसफे पर वक़्त
जग से तुमने ही मिलवायाकौन है क्या सब मुझे बतायापरमेश्वर का रूप तुझे माँदेख समझ में आया मेरी यह सामर्थ्य
कहाँ गए वो दिन जब यार फ़ोन लगाते थेवीकेंड पर साथ चाय का निमंत्रण दे जाते थे प्लानिंग में ही
ईंट गारे पत्थरों से तो मकां बना करते है, घर नहीं खिलता बचपन, जवानी की महकऔर छाँव बुढ़ापे की अगर
सदक़े ऐ अनजानी रूह इंसां को डरा दियामंगल विजयी को तूने घर में पनाह दिया भागा फिरता था मतवाला अनजाने
सुख के दिनों में जो दर्पण दिखाएरखे ज़मीन पर वह दिल की आवाज़ हैदुःख के समय में जो उम्मीद जगायेटूटने
कुछ छिन रहा, है या कुछ बनने वाला हैकुछ घट रहा है या नया कुछ घटने वाला है हो चला है
दिल ने चाहे थे फुर्सत के रात दिनलम्बी मगर यह फुर्सत जानलेवा है दरवाजे पर जो देता है दस्तक बार