पिताजी (Pitaaji)
उम्र भर संघर्षों में जूझते रहेपरिवार को पसीने से सींचते रहेख़ुशी बांटी दुःख का ज़िक्र नहीं कियापिताजी ने तंग बिलकुल
उम्र भर संघर्षों में जूझते रहेपरिवार को पसीने से सींचते रहेख़ुशी बांटी दुःख का ज़िक्र नहीं कियापिताजी ने तंग बिलकुल
शरद पूर्णिमा की रात है हम तन्हा छत परपूरा चाँद आसमां पे है और चांदनी छत परयाद आतीं हैं रातें
पापा ने बेटे संग जोड़ी बना डालीढ़लती उम्र में जवानी दिखा डालीबेटे की बाइक पर निकले जो सैर को बेटे