निकल चलो यारों के संग (Nikall Chalo Yaaron Ke Sang)
मुश्किल है फुर्सत मशरूफियत के दौर मेंनिकल चलो यारो गुज़ारें कुछ दिन बैंगलोर मेंबैठेंगे बगीचों में हम लेंगे चाय की […]
मुश्किल है फुर्सत मशरूफियत के दौर मेंनिकल चलो यारो गुज़ारें कुछ दिन बैंगलोर मेंबैठेंगे बगीचों में हम लेंगे चाय की […]
पापा पत्थर सा खुद को समझते हैंसारी दुनिया से टकरा जाते हैंबेटी की एक ख्वाहिश पे मगरमोम से पिघल जाते
दिल आशना मगर आरज़ू कहाँ से लाऊँख्वाहिशें हैं मगर ज़ुस्तज़ु कहाँ से लाऊँलब सिल गए हैं खुशी कहीं खो गई
हुआ करती थी कभी जो सियाहरेशमी ज़ुल्फ़ें,लटों पे मर-मर जाया करती थींशोख हसीनाएँ। सफ़ेद बाल चंदतकिये के नीचे कल मिले।
मसाइल जो दरमियाँ हैं उन्हें सुलझा तो लेंयारों में नाम तेरा शामिल हो हमें गवारा नहींबड़ी मुश्किलों से संभाला है
आज की सुबह ने एक बार फिर बन्देतेरी थाली में और एक दिन की ताज़ीज़िन्दगी परोस दीतेरे हाथ है इसको
कुछ तो खुदा की मर्ज़ी रही होगीकुछ तक़दीर बेवफा रही होगीकुछ कायनात की तिश्नगी होगीइंसां इंसां में वर्ना इतना फर्क
वाह ऐ खुदाया ये तेरी खुदाईछोटे बड़े का कैसा खेल रचायासोच छोटी है बड़े दिलवालों कीदिल छोटों का भी छोटा
पशेमा न हो कि तू वक़्त पर नहीं पहुँच सकाऊपरवाले ने तुझे वहां रखा जहाँ होना चाहिएमाना कि मिजाज़ मौसम
कैसे कह दूँ की तुम मेरी ज़रुरत नहींतुम बिन ज़िन्दगी का सबब ही नहींअकेला हूँ मगर भीड़ भी चाहिएफुर्सतों के
हथेलियां रगड़ जगा देते थे जो आतिशेंऐड़ियाँ रगड़ते हुए गए हमने देखा हैकरम का लेखा है यहीं देना पड़ता हैशौक
आज का दिन खास हैसुबह जगाती आस हैहर लम्हा जीना सीखोउम्मीदें आसपास हैं कल जो था गुज़र गयातेरे हाथ अवसर
उसने खुद ही यूँ रिश्तों को तार तार कर लियागैरों को अपना समझा अपनों को रुसवा किया दिल के दरवाज़े
बहुत सुना था तुम्हारे बारे मेंमिले जो तुम और बुरा लगालोग कम कहते हैं तुम्हारे बारे मेंसोचता हूँ मैं क्यों
एक जगह खाली थीमन में तस्वीर लगा ली थीमेरे काबू के बाहरसब हालात तुम्हारे थेमेरे दिन और रातमेरे सभी ज़ज़्बात
बुद्धिमान रावण फिर रहा अब तक अपने पाप ढोताइस युग में अगर होता तो शर्तिया सुपरस्टार होता रावण चतुर चालाक
बात बात पर झल्लाती रौनक चेहरे की उड़ी हुई हैएकाकी जीवन के झंझट में वो बेचारी फसी हुई हैवर्ना मम्मी
रंग जिस में चाहोगे रंग जाऊँगाजिस ढंग सोचोगे ढल जाऊँगाआड़े आओगे तो मुड़ जाऊँगाबाँधोगे मुझे तो सड़ जाऊँगापानी हूँ रुकता
खाली रास्ता, है खाली मकां, खाली दिलतुम आवाज़ भी दो मुझको तो क्या हासिलतुम होकर भी अपने न हुए अब