बेबस
लगा था कि शायदमैं भूल गया हूँ तुमको,लगा था कि तुम चले गए होऔर लौटकर नहीं आओगे। दिल मेंएक अजीब-सा […]
लगा था कि शायदमैं भूल गया हूँ तुमको,लगा था कि तुम चले गए होऔर लौटकर नहीं आओगे। दिल मेंएक अजीब-सा […]
मैं वही हूँ, सब कुछ पहले जैसा हीबस समय बदल गया—अब वैसा नहींवो जादूगर कहीं दफ़न हो गया हैहाथों का
“हाँ… आजकल ऐसा ही है।” वह यूँ ही बात कर रहा था—किसी विषय पर,किसी मित्र से। मैं उसे जानता नहीं
ऐ गांधी तेरी टोपी कहाँ गईखुद पहनते हो न गैर कोईआज दिल में ख़याल आयाखाली मन में शैतान आया अपने
तुम पर मैं क्या गुज़रा हूँमैं तो खुद से ही गुज़रा हूँजो एक पल को ठहरा थाजाता हुआ मैं वो
घर में सब लेकिन हम तन्हा और बस हैं दीवारेंशब्द निठल्ले घूमते हैं कोई नहीं जिसे पुकारेंघर हो गया कैदखाना