मेरी कलम (Meri Kalam)
लिखने का मन नहीं थामायूस कलम ने अर्ज़ कियाइससे पहले कि शाम ढलेतू बोतल को लगा ले गलेकिसी की याद […]
लिखने का मन नहीं थामायूस कलम ने अर्ज़ कियाइससे पहले कि शाम ढलेतू बोतल को लगा ले गलेकिसी की याद […]
शहर में जाना मानो जी का जंजाल जी जी जी जीशहर में रहना है मुहाल बस मज़बूरी है जी जी
क्या सिस्टम है क्या खानपान है क्या रूटीन हैसिस्टम के अंदर जकड़ी पब्लिक ग़मगीन हैएक के पीछे है दो और
ज़िन्दगी के शिकार हुए ये घायल शेर हैं बुज़ुर्ग,इनको सहलाओ, बहलाओ, ये चल पड़ेंगे ख़ुद। कभी इनके साम्राज्य का डंका
सोते जगते बस यूँ हीसपनों में खो जाता हूँ मैंभीड़ के बीच रहूं तनहामहफ़िल हो जाता हूँ मैं सब कुछ
आलिशान मकानों केरोशन कमरों मेंजवां होते जश्नके शोर पर थिरकते लोगजाम छलकते पैमानेमहकते हुए फूलहवा से लवरेज़ गुब्बारेदिलकश लज़ीज़ खानाये
कुछ न करोकुछ भी न करोक्या करना हैक्यों करना है कारवां पीछे तू आगे हो गया हैसमय का पल थम
मुश्किल है फुर्सत मशरूफियत के दौर मेंनिकल चलो यारो गुज़ारें कुछ दिन बैंगलोर मेंबैठेंगे बगीचों में हम लेंगे चाय की
पापा पत्थर सा खुद को समझते हैंसारी दुनिया से टकरा जाते हैंबेटी की एक ख्वाहिश पे मगरमोम से पिघल जाते
हुआ करती थी कभी जो सियाहरेशमी ज़ुल्फ़ें,लटों पे मर-मर जाया करती थींशोख हसीनाएँ। सफ़ेद बाल चंदतकिये के नीचे कल मिले।
उसने खुद ही यूँ रिश्तों को तार तार कर लियागैरों को अपना समझा अपनों को रुसवा किया दिल के दरवाज़े
बात बात पर झल्लाती रौनक चेहरे की उड़ी हुई हैएकाकी जीवन के झंझट में वो बेचारी फसी हुई हैवर्ना मम्मी
रंग जिस में चाहोगे रंग जाऊँगाजिस ढंग सोचोगे ढल जाऊँगाआड़े आओगे तो मुड़ जाऊँगाबाँधोगे मुझे तो सड़ जाऊँगापानी हूँ रुकता
पुराने मकां की खिड़की सेहाथ हिलाता हुआ आवाज़ लगाता वो लड़का कौन है गले में बस्ता लटकाये हुएअनमना स्कूल जाता
नवासी अंग्रेजी बोलती हैनानी बस हिंदी जानती हैनवासी हिंदी नहीं समझतीनानी अंग्रेजी कहाँ जानती है आज नानी गाँव जा रही
अपनी उम्मीद के तिनकों को न बिखरने दूंगातेरी खबर आने तक न खुद को मैं मरने दूंगा मैं मानता हूँ
बेटी बिन बाप की जैसे तैसे बड़ी हो गयीलड़की गरीब की जब इक्कीस की हो गयीउसकी शादी की मां को
अदा ओ शोखियों में कहो प्यार किसका हैमैं तो यहाँ हूँ फिर इंतज़ार किसका है बातों बातों में अगरचे हो