वाह क्या अंदाज़ है (Wah Kya Andaaz Hai)
चाय पीना पिलाना न सिर्फ एक रिवाज हैहै शै ये जिससे रिश्तों में सोज़-ओ-साज़ हैचाय की महक से तबीयत खिल […]
चाय पीना पिलाना न सिर्फ एक रिवाज हैहै शै ये जिससे रिश्तों में सोज़-ओ-साज़ हैचाय की महक से तबीयत खिल […]
बंद करो बकवासमेरी उम्र न देखो बॉसमैं यंगमैन झक्कासअभी सेहत है बिंदासमैं क्यूं न नाचूपोते की सगाई में मैं क्यों
ये तेरे तेवर और ये कलेवरजा किसी और को दिखईयोतू हमसे है समझी! ये अकड़किसी और को दिखईयोजाती है कि
बड़े ढीले होते थे बड़े बाबूस्टाफ पर नहीं था कोई काबूबेकाबू वो स्टाफ के चलतेअफसर से खाते थे रोज़ चाबुक
हैलो! मैं पैदल हूँमैं चलता पैदल हूँमैं सोच समझकर चलता पैदल हूँसोचते रहो तुम मैं दिमाग से पैदल हूँ मैं
मनुआ बहुत हो चुकी मन कीजा उलझा क्यों प्रीत की लत मेंअब झड़ी लगी असुअन कीमनुआ बहुत हो चुकी मन
रास्ते में एक छड़ी पड़ी हैमैं क्या समझूँ क्या समझूँपास ही एक ऐनक पड़ी हैमैं क्या समझूँ क्या समझूँ रास्ते
लिखने का मन नहीं थामायूस कलम ने अर्ज़ कियाइससे पहले कि शाम ढलेतू बोतल को लगा ले गलेकिसी की याद
शहर में जाना मानो जी का जंजाल जी जी जी जीशहर में रहना है मुहाल बस मज़बूरी है जी जी
क्या सिस्टम है क्या खानपान है क्या रूटीन हैसिस्टम के अंदर जकड़ी पब्लिक ग़मगीन हैएक के पीछे है दो और
ज़िन्दगी के शिकार हुए ये घायल शेर हैं बुज़ुर्ग,इनको सहलाओ, बहलाओ, ये चल पड़ेंगे ख़ुद। कभी इनके साम्राज्य का डंका
सोते जगते बस यूँ हीसपनों में खो जाता हूँ मैंभीड़ के बीच रहूं तनहामहफ़िल हो जाता हूँ मैं सब कुछ
आलिशान मकानों केरोशन कमरों मेंजवां होते जश्नके शोर पर थिरकते लोगजाम छलकते पैमानेमहकते हुए फूलहवा से लवरेज़ गुब्बारेदिलकश लज़ीज़ खानाये
कुछ न करोकुछ भी न करोक्या करना हैक्यों करना है कारवां पीछे तू आगे हो गया हैसमय का पल थम
मुश्किल है फुर्सत मशरूफियत के दौर मेंनिकल चलो यारो गुज़ारें कुछ दिन बैंगलोर मेंबैठेंगे बगीचों में हम लेंगे चाय की
पापा पत्थर सा खुद को समझते हैंसारी दुनिया से टकरा जाते हैंबेटी की एक ख्वाहिश पे मगरमोम से पिघल जाते
हुआ करती थी कभी जो सियाहरेशमी ज़ुल्फ़ें,लटों पे मर-मर जाया करती थींशोख हसीनाएँ। सफ़ेद बाल चंदतकिये के नीचे कल मिले।
उसने खुद ही यूँ रिश्तों को तार तार कर लियागैरों को अपना समझा अपनों को रुसवा किया दिल के दरवाज़े
बात बात पर झल्लाती रौनक चेहरे की उड़ी हुई हैएकाकी जीवन के झंझट में वो बेचारी फसी हुई हैवर्ना मम्मी