शुक्रगुज़ार (Shukrguzaar)
ऐतवार की शाम ही से मन जो दुश्वार सा लगता हैसोमवार की सुबह से जिसका इंतज़ार सा लगता हैशुक्रवार जब […]
ऐतवार की शाम ही से मन जो दुश्वार सा लगता हैसोमवार की सुबह से जिसका इंतज़ार सा लगता हैशुक्रवार जब […]
वक़्त के अंधे कुए में ग़म हुए कुछ दोस्तयादों में बसा करते हैं वो बिछड़े हुए लोगक्या होगा अचानक अगर
यादों के बंद बक्से से निकली पुरानी किताब हैदस्तक पुराने यार ने दी है दिल बाग बाग हैएक उम्र गुज़र
डर के साये में पलकर सहमी सहमी बड़ी हुईउस घर से इस घर आयी मजबूरी भी साथ हुईतेरे आने की
बाजार में खड़े हो तो बच न सकोगे हुज़ूरखरीदार न बन सके बिक जाओगे ज़रूरबिकता था सामां कभी दूर शहर
माँ बाबा तुम अपने थे क्यों आज बेगाने लगते होक्यों बेटी की नज़रों में खुद को पराया करते हो बाबा
किसी की थी मगर मुझको भा गयी थी तुमसज संवर का फिर घर मेरे आ गयी थी तुम क्या बताऊँ
एक लड़की जिसका नाम है सर्मिष्ठा चौधुरीमैं जानता हूँ उसको मगर मिला नहीं हूँ कभी नाटक में किरदार थी कलाकार
पुलिसवाला है ईमानदार पुलिसवाला है ईमानदारनहीं चोरों का सरदार पुलिसवाला है ईमानदारकरता नहीं कोई भ्रष्टाचार पुलिसवाला है ईमानदारनहीं करता कोई
इसे बेच डालें हम उसे बेच डालेंकिसको भी चाहें सनम बेच डालेंविज्ञापन हैं हम न रहे कोई शकबेचने जाएँ तो
आँधियों से खेला हूँ तूफानों में पला हूँआसमान की बिजली का एक शोला हूँबवंडर हूँ हर शै समटने को उठा
बड़ा शहर बड़ी सड़क के किनारे जो उग आया है तूअपनी तोतई और नाज़ुक रंगत पर जो इतराया है तूतुझे
‘राह चुन ली है तूने जो, आसान नहीं हैवह जीत क्या जो खूं अगर कुर्बान नहीं हैं ‘ जब हम
धन के आगे गुणों का महत्त्व नहींतकनीक के समक्ष प्रकृति गौण है चाकू से हाथ अक्सर कट जाता हैखरबूज़ चाकू
रोज़गार छीन लो व्यापार छीनोमंहगाई से कुचलो टैक्स से मारोआम जन को उसमें दफना दोजब सड़ जाए उसे गरीब बताओगरीबी
खिलाकर मीठे आममौसम बना दियाज्येष्ठ मास की गर्मी मेंमज़ा दिला दियानज़रों से सीधादिल में बिठा लियाआदमी था में आमतुमने ख़ास
क्या कहा कि पुनर्जन्म होता हैहाँ सही सुना, ऐसा ही होता है हर निद्राकाल के बाद यदिकोई मानो मरकर जी
किस्मत गर दगा दे तो इंसां बेबस हो जाता हैहवाई जहाज़ में यात्री को कुत्ता काट खाता हैकिस्मत मेहरबान तो
काटो तो ऐसे लहू बूँद भी न निकलेबाँटो अगर तो सब तार तार कर दोशोर इतना उठाओ मेरे झूठ कासच
The man lived in Junglewith fellow animalsHe was self dependentfor survival The man became socialdependence increasedHe then becameSocial animal Facilities