चुस्की चाय की (Chuski Chay Ki)
बर्तन में ले लो पानी जराअदरक मसाला डालो खरागैस पे रख बर्तन को सजनउबाल आएगा रुको ज़रा चीनी संग हो […]
बर्तन में ले लो पानी जराअदरक मसाला डालो खरागैस पे रख बर्तन को सजनउबाल आएगा रुको ज़रा चीनी संग हो […]
आंसू बहे और न काँधे ही मिलेमुसाफिर सफर पर चल भी दिएचीख-ओ-पुकार बस शोर हाहाकारवक्त के उलटे पहिये में लाखों
लिखते हो क्या? हाँ हाँ मैं लिखता हूँ लिख लेता हूँकुछ अपने मन में बात छिपीकुछ जग बीती कह देता
पानी में घुला ज़हर हैं हवाएं धुआं धुआंनेमतें बारिश की भी अब तो सितम हुईबस भी कर खुदा के बन्दे
आज का पन्ना मैं पढ़कर सोया हूँसबक कौन सा कल पढ़ाएगी तूकिन नए लोगों से मैं कल मिलूंगाक्या नए तोहफे
रात भर दुनिया का रंग मंचअँधेरे की कैद में सुनसान रहान शोर न संगीत न कलाकारचंदा तारों ने लाख कोशिशें
तूने छलनी मेरे जिस्म को कर दियादर्द रग रग से ले रूह तक भर दियाजीना दुश्वार है दिल परेशान हैदूर
निज दुःख दीखत नहीं परसुख दुःख दे जायखुद को लाभ गिने नहीं ख़ुशी परायी सताय भारत भूमि धन्य है घर
बिना बेगम के बादशाहबहुत अकेला महसूस करता था बेगम का इंतकाल हुएबरसों बीत गए थेबादशाह का एक बेटा था, शादीशुदाजो
नए फूलों को सौंप चमन की ज़िम्मेवारीमाली करो नयी बसंत ऋतु की तैयारी कलियाँ हैं कोमल इनको खिलने दोबढ़ना सबका
सोने को बेला मंगाऊं मेरे राजाबेला में खीर खवाऊं मेरे राजासोने को बेला मंगाऊं मेरे राजा खावत खावत जो प्यास
ज़िंदा हो! तो ज़िन्दगी दिखनी चाहिएहोठो पर हर वक्त हंसी खिलनी चाहिएउतार फेंको चलो यह बुत सा चेहराअरे! दर्द को
बड़ों से सीख मिली थी बचपन में “अच्छे बच्चे हो सुबह जल्दी उठो भगवान् में विश्वास रखो पुण्य करो ईमानदार
चाल कछुए की चला हूँ जी हाँ, मालूम है मुझेरफ्ता रफ्ता ही सही मंज़िल पर पहुँच जाऊँगा ज़रूर कब कहा
गिरे मकान की मिटटी जब हटाई गयीलाश बचपन मेरे तह में दबी पायी गयीकर लो तैयारी दफ़्न कर दो बचपन
अशआर लोग मेरे पढ़ने लगे हैंदिल की आवाज़ से जुड़ने लगे हैंव्हाट्सऍप फेसबुक और यूट्यूब परदिन रात सब फॉलो करने लगे
जीवन के सब हैं रंग निरालेअलग अलग मतवाले प्यारेबचपन जवानी और बुढ़ापाचलो ज़रा इनके संग हो लेंचलो जीवन का खेल
कम बोलता बहुत कम बोलता हैहर वक़्त वो हरदम बोलता हैमगर जब भी साला मुँह खोलता हैमेरे बारे में सब गलत बोलता हैवो
पानी पानी कैसा पानी खारा पानी मीठा पानीगहरा पानी उथला पानी ठहरा पानी बहता पानी सावन के महीने मैं कैसे
घर बैठुंगा कल से शायर हो जाऊँगायारो मैं कल से रिटायर हो जाऊंगा ऑफिस ने रुतबा आत्मसम्मान दियारूपया प्रतिष्ठा और