ज़लज़ला (Zalzala)
आँधियों से खेला हूँ तूफानों में पला हूँआसमान की बिजली का एक शोला हूँबवंडर हूँ हर शै समटने को उठा
आँधियों से खेला हूँ तूफानों में पला हूँआसमान की बिजली का एक शोला हूँबवंडर हूँ हर शै समटने को उठा
बड़ा शहर बड़ी सड़क के किनारे जो उग आया है तूअपनी तोतई और नाज़ुक रंगत पर जो इतराया है तूतुझे
‘राह चुन ली है तूने जो, आसान नहीं हैवह जीत क्या जो खूं अगर कुर्बान नहीं हैं ‘ जब हम
धन के आगे गुणों का महत्त्व नहींतकनीक के समक्ष प्रकृति गौण है चाकू से हाथ अक्सर कट जाता हैखरबूज़ चाकू
रोज़गार छीन लो व्यापार छीनोमंहगाई से कुचलो टैक्स से मारोआम जन को उसमें दफना दोजब सड़ जाए उसे गरीब बताओगरीबी
खिलाकर मीठे आममौसम बना दियाज्येष्ठ मास की गर्मी मेंमज़ा दिला दियानज़रों से सीधादिल में बिठा लियाआदमी था में आमतुमने ख़ास
क्या कहा कि पुनर्जन्म होता हैहाँ सही सुना, ऐसा ही होता है हर निद्राकाल के बाद यदिकोई मानो मरकर जी
किस्मत गर दगा दे तो इंसां बेबस हो जाता हैहवाई जहाज़ में यात्री को कुत्ता काट खाता हैकिस्मत मेहरबान तो
काटो तो ऐसे लहू बूँद भी न निकलेबाँटो अगर तो सब तार तार कर दोशोर इतना उठाओ मेरे झूठ कासच
The man lived in Junglewith fellow animalsHe was self dependentfor survival The man became socialdependence increasedHe then becameSocial animal Facilities
बर्तन में ले लो पानी जराअदरक मसाला डालो खरागैस पे रख बर्तन को सजनउबाल आएगा रुको ज़रा चीनी संग हो
आंसू बहे और न काँधे ही मिलेमुसाफिर सफर पर चल भी दिएचीख-ओ-पुकार बस शोर हाहाकारवक्त के उलटे पहिये में लाखों
लिखते हो क्या? हाँ हाँ मैं लिखता हूँ लिख लेता हूँकुछ अपने मन में बात छिपीकुछ जग बीती कह देता
पानी में घुला ज़हर हैं हवाएं धुआं धुआंनेमतें बारिश की भी अब तो सितम हुईबस भी कर खुदा के बन्दे
आज का पन्ना मैं पढ़कर सोया हूँसबक कौन सा कल पढ़ाएगी तूकिन नए लोगों से मैं कल मिलूंगाक्या नए तोहफे
रात भर दुनिया का रंग मंचअँधेरे की कैद में सुनसान रहान शोर न संगीत न कलाकारचंदा तारों ने लाख कोशिशें
तूने छलनी मेरे जिस्म को कर दियादर्द रग रग से ले रूह तक भर दियाजीना दुश्वार है दिल परेशान हैदूर
निज दुःख दीखत नहीं परसुख दुःख दे जायखुद को लाभ गिने नहीं ख़ुशी परायी सताय भारत भूमि धन्य है घर
बिना बेगम के बादशाहबहुत अकेला महसूस करता था बेगम का इंतकाल हुएबरसों बीत गए थेबादशाह का एक बेटा था, शादीशुदाजो
नए फूलों को सौंप चमन की ज़िम्मेवारीमाली करो नयी बसंत ऋतु की तैयारी कलियाँ हैं कोमल इनको खिलने दोबढ़ना सबका