इरादा (Iraada)
चाल कछुए की चला हूँ जी हाँ, मालूम है मुझेरफ्ता रफ्ता ही सही मंज़िल पर पहुँच जाऊँगा ज़रूर कब कहा […]
चाल कछुए की चला हूँ जी हाँ, मालूम है मुझेरफ्ता रफ्ता ही सही मंज़िल पर पहुँच जाऊँगा ज़रूर कब कहा […]
गिरे मकान की मिटटी जब हटाई गयीलाश बचपन मेरे तह में दबी पायी गयीकर लो तैयारी दफ़्न कर दो बचपन
अशआर लोग मेरे पढ़ने लगे हैंदिल की आवाज़ से जुड़ने लगे हैंव्हाट्सऍप फेसबुक और यूट्यूब परदिन रात सब फॉलो करने लगे
जीवन के सब हैं रंग निरालेअलग अलग मतवाले प्यारेबचपन जवानी और बुढ़ापाचलो ज़रा इनके संग हो लेंचलो जीवन का खेल
कम बोलता बहुत कम बोलता हैहर वक़्त वो हरदम बोलता हैमगर जब भी साला मुँह खोलता हैमेरे बारे में सब गलत बोलता हैवो
पानी पानी कैसा पानी खारा पानी मीठा पानीगहरा पानी उथला पानी ठहरा पानी बहता पानी सावन के महीने मैं कैसे
घर बैठुंगा कल से शायर हो जाऊँगायारो मैं कल से रिटायर हो जाऊंगा ऑफिस ने रुतबा आत्मसम्मान दियारूपया प्रतिष्ठा और
रुख-ए-हवाओं की कहाँ परवाह किया करते हैंबाज़ परिंदे हौसलों से उड़ान लिया करते हैं नेकी बदी के फलसफे पर वक़्त
ईंट गारे पत्थरों से तो मकां बना करते है, घर नहीं खिलता बचपन, जवानी की महकऔर छाँव बुढ़ापे की अगर
कुछ छिन रहा, है या कुछ बनने वाला हैकुछ घट रहा है या नया कुछ घटने वाला है हो चला है
दिल ने चाहे थे फुर्सत के रात दिनलम्बी मगर यह फुर्सत जानलेवा है दरवाजे पर जो देता है दस्तक बार
बदल रहा है मौसम मिज़ाज़ लोगों की तरहहवाएं शायद तेरे शहर से होकर गुज़री हैं ऐ तूफ़ान तेरी ताक़त का
कम बोलता हूँ पुरज़ोर नहीं मैंअंतर्मुखी मगर कमज़ोर नहीं मैं ख़ामोशी खुदा की इबादत हैकम बोलना मेरी आदत हैदलालों की
गांव का पीपल जो था आशियाना परिंदों काजलाते थे लोग जिसके तले दुआओं के दिएएक बवंडर उठा वक्त की गोद
कद्र न हो कद्रदान न हों विचलित तुमको नहीं होना हैसौगंध तुम्हें कविता मेरी पथभ्रष्ट कतई नहीं होना है चलन
छेड़ गए थे कभी दिल के तार देखता हूँबिछड़ गए हैं अब जो यार देखता हूँ बेगाने शहरों से अनजाने
मञ्जूषा तुम गाओनए तराने फिर से छेड़ोसुर कोई नया लगाओमञ्जूषा तुम गाओ याद करो जब तुम गाती थीमन की बगिया
तेरे आथित्य का मित्र मेरे आभार व्यक्त करता हूँमैं कृतज्ञ हूँ ह्रदय से निज भाव व्यक्त करता हूँ तुमने जो
धरती पर एक स्वर्ग का टुकड़ा चाहो जो देखना जीइस छुट्टी में घर मत बैठो चले आओ रेणुका जीदेवभूमि हिमाचल
This thought was seeded by someone into my mind which blossomed into this word engineering.