मेरी कविता (Meri Kavita)
भावों की गीली मिटटी में फिर खिल उठी निराली कवितानवजीवन की नव उमंग भर नित नव स्वप्न दिखाती कविता सोंधी […]
भावों की गीली मिटटी में फिर खिल उठी निराली कवितानवजीवन की नव उमंग भर नित नव स्वप्न दिखाती कविता सोंधी […]
जान देकर भी न हासिल हुए रिश्तेक़ब्र उसकी कहीं बेहतर निकली ख़ैर-ख़्वाह सब एक हाथ दूर थेजिस जगह बेकस की
दुनिया यह छोटी सीछोटी सी दुनिया मेंहर तरफ नज़र आतेचेहरे ही चेहरे निकलो गर घर सेपढ़ने लगो चेहरेइंसां की फितरतबयां
पल पल तुम्हें बुलाये मेरी कवितादिल धड़काये लजाये मेरी कवितादेती राहत यह सूने हर मन कोइत्र सी मन में समाये
सुना है तेरे शहर में अदा से मिलते हैं लोगदिल मिले न मिलें फिर भी मिलते हैं लोगबंद दरवाज़े बयां
हुई ज़िन्दगी तमाम कोई फिर गुज़र गयाक्या सबब कौन कौन फिर मैयत मेँ गया आँखें खुलीं थी उसकी अपनों की चाह
निस दिन नया सवेरा आशा का संदेशा लाता हैप्रकृति का सुन्दर स्वरुप मन को अति हर्षाता है पंछियों के कलरव
देखा है किसी को टुकड़ों पर पलतेभूखा हो पेट पर देखा हो लात खातेबिना बात मारते हैं वो मुझको पत्थरमैंने
सरहद नहीं आँचल है मातृभूमि कापवित्र श्वेत सौम्य टुकड़ा यह पृथ्वी का मेरे कन्धों पर बन्दूक है ज़िम्मेवारीमाँ की लाज
दिल पागल है दिल रोता है दिल में कुछ कुछ होता हैमेरे देश में अमन चैन नेताओं को हज़म नहीं
मन में कुछ सवाल उठते हैं मन की बात कहें किसकोमन की बात वो करते हैं बाक़ी इसका हक़ किसको
ले शपथ संकल्प सर कलम दुश्मन का करतज दे हर चिंता व्यथा वीर बढ़ तू कूच कर दे रही आधार
अब करेंगे तब करेंगे फ़िक्र कल की कल करेंगेवक़्त के पन्नें पलटते पिघल रही है ज़िन्दगी कतरा कतरा लम्हा लम्हा
एक किस्से से कई किस्से बनाये जा रहा हूँ,कुछ छुपाये तो कुछ सुनाये जा रहा हूँशर्मसार हूँ खुद से कुछ
मेरे मन का नन्हा बालक तुमको माँ हर समय बुलायेचली गयी तुम कौन जहाँ में किससे पूछूं कौन बताये चल न
चौथा स्तम्भ हो तुम गणतंत्र केतुम हो शान-ऐ-इंडिया !कब सुधरोगे मीडिया ? आधे घंटे क़ी न्यूज़ के बीच मेंबीस मिनट
मैं भी मैं हूँ तुम तुम हो फिर अलग उमंग मन में क्यों हैनए साल में हर शै दिल को
कुछ खट्टी मीठी यादें दे वर्ष इतिहास में लौट चलानववर्ष की खुमारी में गयावर्ष अलविदा बोल चला कुछ ख्वाब हैं
दिन दिवाली दीपक तुम्हाराघर किसी और का तो क्या बात हैथोड़ी मिठाई नए कुछ कपड़ेबालक गरीब का तो क्या बात है हज़ारों