शादी ऐसा बंधन (Shadi Aisa Bandhan)
शादी ऐसा बंधन जिसमें खुश है वो जो ठगा जाता हैयह दो आत्माओं का मिलन आसमानों में जो बुना जाता […]
शादी ऐसा बंधन जिसमें खुश है वो जो ठगा जाता हैयह दो आत्माओं का मिलन आसमानों में जो बुना जाता […]
सैंया छोड़ दे नौकरी चलवा दे रिक्शा बैटरीन धुआं न धक्कड़ यात्रा पॉल्यूशन फ्रीघर में आये लक्ष्मी क्यों किसी की
हम तुम कभी फ्लाइट से जो जाएँऔर फ्लाइट मिस होजाए मुँह दिखाने के काबिल खुद कोन हम रह पाएं सोचो
इसका इससे उसका उससेइनका इनसे उमका उनसेमन का एका अब हो गया है मतलब ये है बस ये समझ लोसब्र
ख्वाब सा लगता है तेरा हमसे यूँ मिल जानाहकीकत में तो ये मुनासिब नहींउतर आयी है आसमां से जो मेरे
दिल आशना मगर आरज़ू कहाँ से लाऊँख्वाहिशें हैं मगर ज़ुस्तज़ु कहाँ से लाऊँलब सिल गए हैं खुशी कहीं खो गई
मसाइल जो दरमियाँ हैं उन्हें सुलझा तो लेंयारों में नाम तेरा शामिल हो हमें गवारा नहींबड़ी मुश्किलों से संभाला है
कुछ तो खुदा की मर्ज़ी रही होगीकुछ तक़दीर बेवफा रही होगीकुछ कायनात की तिश्नगी होगीइंसां इंसां में वर्ना इतना फर्क
वाह ऐ खुदाया ये तेरी खुदाईछोटे बड़े का कैसा खेल रचायासोच छोटी है बड़े दिलवालों कीदिल छोटों का भी छोटा
पशेमा न हो कि तू वक़्त पर नहीं पहुँच सकाऊपरवाले ने तुझे वहां रखा जहाँ होना चाहिएमाना कि मिजाज़ मौसम
कैसे कह दूँ की तुम मेरी ज़रुरत नहींतुम बिन ज़िन्दगी का सबब ही नहींअकेला हूँ मगर भीड़ भी चाहिएफुर्सतों के
बहुत सुना था तुम्हारे बारे मेंमिले जो तुम और बुरा लगालोग कम कहते हैं तुम्हारे बारे मेंसोचता हूँ मैं क्यों
एक जगह खाली थीमन में तस्वीर लगा ली थीमेरे काबू के बाहरसब हालात तुम्हारे थेमेरे दिन और रातमेरे सभी ज़ज़्बात
खाली रास्ता, है खाली मकां, खाली दिलतुम आवाज़ भी दो मुझको तो क्या हासिलतुम होकर भी अपने न हुए अब
कभी पहले न हुआ अहसास कराया है तुमनेप्यार का अलग एक रंग हमें दिखाया है तुमने कभी पहले न हुआ
हम करते हैं इंतज़ार तुम आ जाओघर आंगन है तैयार तुम आ जाओआ जाओ कोना कोना महका दोघर संसार तुम्हारा
जानता हूँ किसी रोज़ मोड़ मुड़ जाऊंगागोया जिस रोज़ भी तुम्हें छोड़ जाऊंगादिलों में उम्मीद एक लगन छोड़ जाऊंगा ज़िन्दगी
मैं आईना हूँ हमराज़ तेरा मैं भी हूँतू माने न माने इश्क़ तेरा मैं भी हूँ इन आँखों में जब
हैरां क्यों हो मेरा ये रंग रूप देखकरपौधा में हरा ही मगर शहर में है बसरकुछ पत्ते मेरे हरे और
स्वाद के रस्ते से होकर बस दिल में उतर जाती हो तुमइस घर को संवारा तुमने चारों कोने महकाती तुमछोटे