बदलाव (Badlaav)
झुकी मूछों में ज़रा सा ताव ज़रूरी हैरिश्तों में खुलूसो खिंचाव ज़रूरी हैपत्थर बनकर मत रोको रौ दरया का तरक्की […]
झुकी मूछों में ज़रा सा ताव ज़रूरी हैरिश्तों में खुलूसो खिंचाव ज़रूरी हैपत्थर बनकर मत रोको रौ दरया का तरक्की […]
मीठी या खट्टी लगे स्वाद समझ न आयेऐ दाना ऐ मूंगफली मन को तू अति भावेबच्चे बूढ़े अमीर गरीब सबको
यह खाना जो खाते हम तीन पहर हैंआधा है अमृत और आधा ज़हर हैमाफिक हो गर तो देता है ताकतबेहिसाब
गर्मी बढ़ी धरती तपी बैचेनी मची तो बारिश हुईप्रकृति की शोभा बढ़ी नवजीवन की आस हुईनवजीवन का वर्षा और गर्मी
दावा है कि सोचकर किया जाए वो प्यार नहीं हैअजी प्यार तो बस प्यार है कोई व्यापार नहीं हैसच है
पुत्र पिता का राजा बेटा बड़ा होकर राज करेपिता पुत्र का शक्तिमान जो मिटा दे सब खतरे जीवन की सच्चाई
सच सच होता है मगर होता है डरावना और कड़वाझूठ के पाँव नहीं होते मगर झूठे का होता बोलबालाभले हो
स्कीन देख अँखियाँ गयीं कॉल सुनत गए कानसर्फिंग में अंगूठा घिसा मिट गए सगरे निसानमाया कैसी राम जी स्क्रीन दायी
गरीब अमीर फर्क नहीं मोबाइल सबके पासजन जन भया अमीर जन आया लो रामराज आया है अब रामराज विश्व गुरु
दौड़ दौड़ कर उड़ उड़ करशब्द ओ हरफ़ चुन लेती हैमेरी मन मुर्गी हर रोज़एक अंडा दे देती है तितली
खुद की खुद्दारी पर खैर करे खुदा भीक़दमों में ज़मीन मुट्ठी में आसमान होमेहनत की खुराक से हौसले हों बुलंदहर
दिन जिंदगानी में अइसा भी आयेंगाभिड़ु तू भिड़ु से बूढा हो जाएंगायार फुकरे पार्टी विर्टी सब कल्टी होइन्गेबॉडी भी राप्चिक
खाया है धोखा टूटा है दिल बार बारजब जब किया है किसी पे हमने ऐतबारनादाँ थे हम आया था किसी
हर आह हर आंसू का कर हिसाब आया हूँमैंआज दर्द से कर के दो दो हाथ आया हूँघर मैं घुसकर
लेखक के घर की मुंडेर पर एकजंगली कबूतरों का जोड़ा रहता थालेखक उन्हें अक्सर अपनी खिड़की सेदेखा करता और उनकी
नारी की सृजनात्मक क्षमता अद्भुत हैप्रसव के साथ ही जग जाता मातृत्व हैसंतान लड़का हो या लड़की, गोरी याकाली सक्षम
सच, सच तेरी मेरी सोच पे पड़ा एक पर्दा हैसच, झूठ को सच बताने की एक अदा हैवर्ना तेरा सच
मिटटी में दबी गुठली में सेआम का एक नन्हा पौधादेख रहा था मुझे टुकुर टुकुरअलग से एक वीरान मेंमैंने कहा
हे ब्रह्मदेव मुझे दो वरदानहिरण्यकश्यपु को दो अमरत्व दानमेरा यदि हो मृत्युदातान हो कोई मनुष्य न कोई देवन निर्जीव कोई