कायर (Kayar)
होगा तू कहीं का आतंकी जो भी हो मंसूबा तेराकायर की तरह छिपकर चोरी से आता क्या ईमान तेरा रात […]
होगा तू कहीं का आतंकी जो भी हो मंसूबा तेराकायर की तरह छिपकर चोरी से आता क्या ईमान तेरा रात […]
मैं हूँ भारत माता मेरे बच्चे कई करोड़ये हैं मेरी ताक़त रोकेंगे हर हमला आज भले हों नशे में सोयेखुदगर्जी
अनवरत बहती दुनिया में एक अमिट छाप अपनी भी होहोनी के पन्नों में दाखिल कुछ भले कारज अपने भी हों
कई कमरों का घर रहते जिसमें थे हम और बाबूजीकठिन परिश्रम से सींचा करते जिसको माँ बाबूजी अंतिम दौर में
हरे भरे गुलशन में देखो नित नए नए से रंग दिखेंकुछ कलियाँ फूल बनें और फूल फलों में बदलेसबके दिलों
A, B से जब कुछ कहता है,B दोहराता है C से।C, A जब बन जाता है,तो फैले बात तेजी से।
मौत ने फिर चाल चली कोई गुज़र गयाएक और बेचारा हसरतों पे हो क़ुर्बां गया चाँद छूने के तो नहीं
किसने फेंका है ठहरे पानी में पत्थरहवा को बांधने की ज़ुर्रत की हैकौन उजाड़ रहा है घरोंदे चिड़ियों केपरिंदों को
स्वप्न नहीं वे जो मनुष्य को नीदों में दिखते हैं स्वप्न तो वे हैं जो आँखों से नींद उड़ा देते
मुफलिसी और फाकों में पैदा हुआज़िल्लतों और ठोकरों में पला था मैंमेरी खता मेरा गुनाह बस इतना थापेट की भूख
देश करे आह्वान उठो सब जन गण हिंदुस्तान केछोडो जात धर्म के झगड़े बोलो जय हिन्द शान सेनयी सोच से
आओ कहानी तुम्हें सुनाएँ पैंसठ के उन वीरों कीजोश से जिनके दुश्मन काँपा देश के ऐसे हीरों
नेताजी ने रुपया खायाकोयला खाया बंगला खायाघोटाले कर चारा खायास्पेक्ट्रम खाया पुल भी चबाया पब्लिक धन भरपूर उड़ायातनिक मगर मुंह
माँ भारती पुकारती एकजुट रहोभिन्न धर्म भिन्न भाषा संग संग रहोतोड़े न दुश्मन हमें बच के तुम रहोमाँ भारती
जिस पल से तू! मुझमें समाया हैकुछ नया अनोखा अद्भुतरंग मेरे जीवन में आया हैजिस पल से तू! मुझमें समाया है
आम आदमी के सपने: गाड़ी है बंगला है नौकर हैं चाकर हैंनहीं कोई कमी है कोई दुःख नहीं हैजीवन में
बड़ी मौज थी तुमसे मिलने से पहलेज़िन्दगी थी टशन तुमसे मिलने से पहले सर्दी की थी चिंता न गर्मी का