बेटा दूर जाने लगा है (Beta Door Jaane Laga Hai)
चोट लगी ऊँगली दिखाता था मुझकोबातें दिल की सब बताता था मुझकोदर्द ज़िन्दगी के अब छुपाने लगा हैबेटा अब दूर […]
चोट लगी ऊँगली दिखाता था मुझकोबातें दिल की सब बताता था मुझकोदर्द ज़िन्दगी के अब छुपाने लगा हैबेटा अब दूर […]
पैंट पहना तो आंसू भर आयेमुद्दतें हो गयीं है ठुकराएजिया न लगे क्या करें हायलॉकडाउन से हम उकताए निक्कर टी-
मैं तो मासूम थी, नामालूम थी,बेचारी भूखी—मैं एक माँ थी।छल-कपट से मैं थी अनजान,बड़े पेट की भूख से परेशान।झूठे सत्कार
जग से तुमने ही मिलवायाकौन है क्या सब मुझे बतायापरमेश्वर का रूप तुझे माँदेख समझ में आया मेरी यह सामर्थ्य
कहाँ गए वो दिन जब यार फ़ोन लगाते थेवीकेंड पर साथ चाय का निमंत्रण दे जाते थे प्लानिंग में ही
सदक़े ऐ अनजानी रूह इंसां को डरा दियामंगल विजयी को तूने घर में पनाह दिया भागा फिरता था मतवाला अनजाने
खुद भूखी है परवाह नहींपरिवार को पहले खिलाती हैबच्चों की ख़ुशी में खुश होतीदुःख अपना नहीं बताती है सबसे जल्दी
पावक दहकी क्षितिज क्षितिज मेंग्रीष्म ऋतू आयी यौवन परउष्मायी धरती निज उर मेंपावक दहकी क्षितिज क्षितिज में कुंदन बदन दमकती
खबर छपी थी शहीद के परिवार के लिए एक भिखारिन ने जुटाए छः लाख मांगकर भीख यह भावना है विडम्बना
गांव में मचा कोलाहल अखबारों में बनी सुर्खियांटीवी पर हुए चर्चे तमाम और बांटी गयीं बर्फियाँ फौजी का जंग में
तारीफों के पुल पर मुझको कितना रोज़ चढ़ाते होपरिचय मुझसे मेरा तुम हर दिन नया कराते होसुध बुध खो जाती
माँ मुझ पर उपकार तुम्हारा जग में जो मुझको लाईममता की छाया में रखकर दुनिया मेरी स्वर्ग बनाईबस इतनी अभिलाषाहै
मैले कुचले से कपड़ों मेंस्वेदग्रस्त हो यह प्राणीजीवन है संघर्ष सिखातारिक्शेवाला सीख पुरानी रुपये चंद कमाने कोघर बार छोड़ कर
यह ज़मीं भी न थी न था आसमान येन दरिया समंदर खूबसूरत जहाँ येन इंन्सां की हस्ती न जंगल जिनावरबला
वक्त है बदल रहा और रास्ते अनजानपुकारता हूँ तुम्हें कि बानगी मिलती रहेमंज़िलों की राह पर कारवाँ बढ़ते चलेंदीप मैं
व्यर्थ के तानों को सुनकर न हो जाना मायूस नहींजतन कोई न समझे मेहनत का गुणगान नहींसौंप दिया परिवार को
माँ मैं तुझको मिल न पाया कैसी है जान न पायाआखिर किस डर की खातिर मुझको मार गिराया! मैं तो
मेरे प्यारे बच्चे गुनहगार मैं तेराबिना सोचे समझे दुनिया में लायादुनिया नफरत की शै पर टिकी हैपसरा है हर सू
गरीब किसान का बेटा था मेरा भी परिवार थामजबूरी में बचपन बीता कर्जे में घर बार था दो बहनों का
हमारा प्यारा देश भारत भारत का तिरंगा प्यारासुन्दर रूप इसका बड़ा प्यारा लगता हैभिन्न धर्म भिन्न भाषा भिन्न सबकी वेशभूषासदियों