हम कुत्ते डेरिंगबाज़ (Ham Kuttey Daringbaaz)
मैं कालू मैं जैकी ये है भूरी संतरीरात के प्रहरी हम हैं रात के प्रहरीये पहरा दे रात को मैं […]
मैं कालू मैं जैकी ये है भूरी संतरीरात के प्रहरी हम हैं रात के प्रहरीये पहरा दे रात को मैं […]
कहीं की ईंट कहीं का रोड़ाभानमती ने कुनबा जोड़ाइसमें कुनबा है नालायकभानमती का दोष नहींकुनबे से वो जुड़ी इसलिएक्योंकि ब्याह
हिंदी भाषी हिंदी बोलते थेमुगलिया बोलते थे उर्दूसमय गुज़रा वक्त बदलाहटा संस्कृतियों से पहराहिंदी भाषी उर्दू पढ़ने लगेशब्द दोनों के
मेरी लकीरों में गुम थाजो जांनिसार की तरहवो छोड़ कर गया मुझेकिसी अखबार की तरह उसकी फुर्सत में अबमुहाल हुए
उम्र भर संघर्षों में जूझते रहेपरिवार को पसीने से सींचते रहेख़ुशी बांटी दुःख का ज़िक्र नहीं कियापिताजी ने तंग बिलकुल
अपनी यह सामर्थ्य कहाँ कि उनको साथ रखेंउनका ख्याल रखें या भोजन उनको देंपापा बड़े हैं घर के उनको प्यार
बाप के रूपमें उसने उसे हमेशाअपनी इज़्ज़त पर खतरा समझाऔर कोशिशें की वह पैदा ही न हो भाई के रूप
सुबह हमेशा की तरहमनमोहक और हवा ताज़ी थीमगर वह कमज़ोर दर्द सेबेइंतेहा परेशान और सदमे में थीजिस्म के एक एक
मैया मोरी! ऑटोवाला मोहे न बिठायेआना घर मोहे इंद्रपुरी कहेइंद्रलोक को जाएमैया मोरी ऑटोवाला मोहे न बिठाये बस स्टॉप पर
गाय जगत की माता है पता है मगर अबपिता से भी अधिक अड़ियल हो गयी हैसड़क अगर घेर ले तो
ब्रांडेड का चलन आज आम हैब्रांडेड ही सर्दी और जुकाम है धागा लोकल कपड़े ब्रांडेड हैंगाय लोकल है दूध ब्रांडेड
जांबाज़ दुनिया में होंगे बहुतदिलवाला जांबाज़ देखा नहींअर्जन सिंह जैसा योद्धा खिलाड़ीऔर नेकदिल इंसान देखा नहीं पढ़ाई में अव्वल खेलों
छोटी उम्र में सब बच्चे प्रतिभाशाली लगते हैंअपनी चतुराई से वे मुश्किल करतब करते हैंमगर बड़े होकर वे ही नौकरी
दावा वो करते हैं कि सब समझते हैंपापा अब तक मुझको बच्चा समझते हैंमेरी सलाह अनुभव की ठोकर पर रखते
चोट लगी ऊँगली दिखाता था मुझकोबातें सब दिल की बताता था मुझकोज़ख्म ज़िन्दगी के अब छुपाने लगा हैबेटा अब दूर
पैंट पहना तो आंसू भर आयेमुद्दतें हो गयीं है ठुकराएजिया न लगे क्या करें हायलॉकडाउन से हम उकताए निक्कर टी-
मैं तो मासूम थी, नामालूम थी,बेचारी, भूखी—मैं एक माँ थी। छल-कपट से मैं थी अनजान,बड़े पेट की भूख से परेशान।झूठे
जग से तुमने ही मिलवायाकौन है क्या सब मुझे बतायापरमेश्वर का रूप तुझे माँदेख समझ में आया मेरी यह सामर्थ्य
कहाँ गए वो दिन जब यार फ़ोन लगाते थेवीकेंड पर साथ चाय का निमंत्रण दे जाते थे प्लानिंग में ही