कह देना शेरू आया था
चल गणेशचंद चलमुझे बाहर लेकर चलबड़ी जोरों से लगी हैमेरा बदन देख जोरहा है बेकल, चल एक तू ही मुझे […]
चल गणेशचंद चलमुझे बाहर लेकर चलबड़ी जोरों से लगी हैमेरा बदन देख जोरहा है बेकल, चल एक तू ही मुझे […]
एक बूंद बारिश कीदुल्हन सी आसमान सेविदा हुई पेड़ पर गिरी पेड़ की डाल से ‘टप’नीचे जमे पानी कीगोद में
मैं अपनी जिंदगी का हीरो हूँकाश जिंदगी फिल्म का परदा होतीनाटक तो अब भी होते हैंबस मैने कई हीरोइनें बदल
माफ़ करना जी माफ़ करनाभाई जी सुन तो लो सॉरी!कोई तो सुन लो मैं सॉरी हूँ जीआप यूं गुस्से से
सूने सूने ख्वाबों मेंजब तक तुम न आए थेखुशियाँ थी सब औरों कीग़म भी सारे पराए थेसबसे छुपाकर रखी थीबोतल
अभी खेलती है हंसती है खिलखिलाती हंसाती हैख्याल अपना रखती जॉब करती हाथ बटाती हैमाँ के संग ठिठोली कभी पापा
आटिफिशियल इंटेलिजेंस कहने में जो एआई हैबौद्धिकता की दुनिया में देर से मगर क्रांति लेकर आई हैटूटे-फूटे ज्ञान का ढर्रा
कीड़े खाना सीख लियामकोड़े खाना सीख लियामिलावट वाले बाहर केपकौड़े खाना सीख लिया आम मिले भीतर से सड़ेलीची में कीड़े
ठीक किया तूनेअच्छा किया तूनेमेरे दोस्त तूने जो घोला है दोस्ती में ज़हर मेरे दोस्तसाँपों के बीच बेख़ौफ़ चला जाता
सिल्की बाल मेरे महबूब केपी जाते थे गैलन कंडीशनर केअब पहुँच रहे हैं दिल तकदाल में आकर पेट के रस्ते
अरे क्यों दिमाग खा रहा हैआऊंगा मैं कल टेंशन मत लेवो अगर मालिक है तो हम भीकोई उठाईगिरे नहीं हैंमज़दूर
मौका भी है फुरसत भी है रस्मे अदब दस्तूर भीमगर नहीं है पहुँच दिल्ली अब हो गयी है दूर की
मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा हैछुपे रिश्ते की पहचान तुम्हारे पास पड़ा हैवो काली रातों के सब सच मैले
ठीक लगे जब सबतो मत समझो किसब ठीक हैआने वाला तूफांकहीं आस-पासनज़दीक है बारह जून कोलगा था सबदुरुस्त है सबठीक
हंगामा है क्यूँ बरपा क्यों टेंशन हो गयी हैज़रा पेट निकला है क्या आफत हो गयी हैडाका तो नहीं मारा
नाजुक से थे हममिजाज से नरमशीशे से ख्वाबकांच के महलपत्थर ये ज़मानातंगदिल सनमचोट खाई दिल परदरार हस्ती परआवाज हुई तड़कऔर
अस्त व्यस्त है जान त्रस्त…बोल मेरी मछली… कितना पानी… अस्त व्यस्त है, जान त्रस्तबोल मेरी मछली, कितना पानीताल तलैया डूबे
मैं हूँ GenU अपनी बस अपनी कहूंगाक्यों नहीं सुनेगा कान के नीचे धरूंगाबच्चे होते रहेंगे मैं क्यों परवाह करूंगाजैसे मुझे
क्यों अपनी आँखें माँ तू मूंदे हुए बैठी हैक्यों नहीं खुद आवाज़ बुलंद करती हैबोटी बोटी कर काट रहे थे
तू है कमजोर थी कमजोर कमजोर ही रहेगीऔरत तेरी मर्द के आगे एक नहीं चलेगीवो हिम्मत वाला है आदम का