डायनासौर का अंडा (Dianasor Ka Andaa)
बच्चा समझकर तेरे पे ज़रा सा प्यार क्या आ गयानादानियों पर तेरी छोटे हमें दुलार क्या आ गयातूने कुत्ता पीछे […]
बच्चा समझकर तेरे पे ज़रा सा प्यार क्या आ गयानादानियों पर तेरी छोटे हमें दुलार क्या आ गयातूने कुत्ता पीछे […]
मजदूर दिवस छुट्टी का दिन रमुआ बोला जय होबीवी बोली छुट्टी में अरे नाटकहै क्या ये नया हो बोला रमुआ
एक तस्वीर जिसकी कोई गलती न थीएक साधना जिसमें था कोई छल नहींप्रेम तो निष्छल है कोई संशय ही नहीं
वो शख्स आइने में जो डरा करता थावो जो अलग था मैं बहादुर बच्चा थावो डरता था मैं भिड़ जाया
दरियादिली तो देखी है पीने पिलाने वालों मेंपिलाते हैं ज़िद भी करते हैं और लो और लो
कुछ बात नहीं थी कहने कीसबसे बातें रोज़ ही होती थींख़ास नहीं था आज भी कुछवह बेचारी भला क्या कहती
बचपन से ही मीत मेरे हमें शौक था हिंदी फिल्मों काब्लैक एंड व्हाइट स्वप्न लेते थे बॉलीवुड हीरोइनों का गुज़रा
मुझको रोना किसने सिखायाप्रकृति न रोती ना चाँद सितारेपेड़ न रोते ना जिनावरजितने भी घायल हो जातेफिर मुझको भगवन क्यूं
वक़्त के आगे कायनात भी मजबूर हो जाती हैइंसान चाहता नहीं मगर अनहोनी हो जाती हैदिल के रिश्तों के बीच
श्याम और बनवारी दो बूढ़े दोस्त हैंवे घूमने के तो शौक़ीन हैं मगरज़यादा मंहगी यात्रा के लिएउनके पास पैसे नहीं
लंगड़े घोड़े ने भगते घोड़े से कहा अबे कहाँ भगे जा रिया होभगते घोड़े ने लंगड़े घोड़े से कहा सब
गला चीखता जाता थापत्थर गुम सहमा सा थागले बाकी पीछे चिल्लातेसंग में ताल मिलाते जातेबाजा था सष्ठम सुर परमानो मानेंगे
बोझ इस कदर था उसके कन्धों परउलझनों से उसे सदा घिरा देखा इंसान था वह भी हंसना जानता थामगर जब
जिनको आना था मेरी आवाज़ पर आयेतू नहीं आया तूने कितने बहाने बनायेदेख ली यारी तेरी झांसे में आऊंगा नहींतुझे
मन रे क्यों बेकल होता हैक्यों नहीं बिज़नेस कर लेता हैलक्ष्मी जी घर आएं स्वाद प्रॉफिट काक्यों नहीं ले लेता
हा हा हाहा हा हाविक्रम…पहचाना?मैं बेतालले मैं आ गया हूँफिर पूछने सवालतू मेरे प्रश्नों का उत्तरअपनी बुद्धिबल औरतर्क से यूँ
हूल दे भई हूल देलड़ जा घुट जा गाली देगलती मत कुबूल बे दिल्ली में गर चलना है तोगलती मत
आंखों में ख़ुशी छा जाती हैचेहरे पर नूर आ जाता हैएक टिप वेटर को जो देते होउसे खुद पे गुरूर
एक गाँव था गाँव में स्त्री जिसका नाम था कजरीदूध बेचकर गांव में गुजर बसर वो किया करती झुठ का
खुशनसीब हैं वो घर जहाँ मेहमान रुका करते हैंये वे चिड़ियाँ हैं जो हर डाल पर नहीं बैठतीं खुदा से