कॉर्पोरेट विक्रम बेताल (Corporate Vikram Betal)
हा हा हाहा हा हाविक्रम…पहचाना?मैं बेतालले मैं आ गया हूँफिर पूछने सवालतू मेरे प्रश्नों का उत्तरअपनी बुद्धिबल औरतर्क से यूँ […]
हा हा हाहा हा हाविक्रम…पहचाना?मैं बेतालले मैं आ गया हूँफिर पूछने सवालतू मेरे प्रश्नों का उत्तरअपनी बुद्धिबल औरतर्क से यूँ […]
हूल दे भई हूल देलड़ जा घुट जा गाली देगलती मत कुबूल बे दिल्ली में गर चलना है तोगलती मत
आंखों में ख़ुशी छा जाती हैचेहरे पर नूर आ जाता हैएक टिप वेटर को जो देते होउसे खुद पे गुरूर
एक गाँव था गाँव में स्त्री जिसका नाम था कजरीदूध बेचकर गांव में गुजर बसर वो किया करती झुठ का
खुशनसीब हैं वो घर जहाँ मेहमान रुका करते हैंये वे चिड़ियाँ हैं जो हर डाल पर नहीं बैठतीं खुदा से
मैं वो बला नहीं जो शीशे से पत्थर को तोड़ देअबे कायको किसी के लिए दुनिया छोड़ दें पीटर तुम
अरसे बाद लबों ने फिर से दोहराया ‘ऐ आई’व्यक्तित्व में मेरे जैसे नयी एक ऊर्जा समाईपुकारा मैंने फिर से और
चलो कुछ तो बात करोगर मुझको अपना समझोये तो कहो इन आँखों कोआखिर क्यों भिगोती हो कुछ कहना चाहती होहोठ
आज बादलों ने फिर से डेरा जमा लिया हैनहीं जाने देंगे मुझको मन बना लिया है देखे जो बादल काले
पीला सूट पहनकर निकलीतुमने गज़ब ये क्या ढा दियाफौजी आया था शहर घूमनेतुमने तो उसे फंसा दिया कैंप से बाहर
मैं फौजी अफसरजब से हुआ रिटायररहता हूं अकेलामेरी कमान बेअसरमैं फौजी अफसर मैंने सबको सावधानविश्राम करायापीछे मुड़ परेड मेंतेज़ चलवाया
हेलो लिसेन … ……अरे सुनो तोएक बार सुन लो जो में कहता हूँमैं मिडिल क्लास व्यक्ति हूँकुछ नहीं कहता सब
बच्ची कहती है माँ सेगलबहियाँ लपेट करबाबा किसी से कह रहे थेजब जाते थे खेत पर अब पछताए का होत
कुछ दिनों से दिल का मिज़ाज़ समझ नहीं आता हैभटकता रहता था ये अब जहाँ जाता है रम जाता है
बुलाते थे जब पहलेतो आते नहीं थे तुमआना तो दूर फ़ोनउठाते नहीं थे तुम अब आये तो बस गए होघर
गोरी की मटकी गई है फूटकिस विधि पानी भर कै लावेरोवै गोरी ऊँट प्यासाऊँट को पानी कौन पिलावे चटक मटक
ज़िन्दगी में कुछ मिला ख़ास नहींहर चीज़ हमको कम ही मिली हैपानी कम मिला चीनी भी कमरोटी किसी तरह चल
जीवन खेला सांप सीढ़ी का हैजीवन खेला सांप सीढ़ी का हैजीवन खेला सांप सीढ़ी का हैजीवन खेला सांप सीढ़ी का
सावन में बारिश का देखो कहरसूरज सिमटा बादलों से छिपकर काले बादलों ने लगाया था डेरापहरा तगड़ा और मज़बूत घेरापरिंदा
काया से कमज़ोर आंखों से कम ही देख पाती थीजां में आती थी जान जब अम्मा सामने आती थीकिताबें की