बिस्कुट बेचारा- एक आवाज़ आम आदमी की (Biscuit Bechara)
मैं वो बला नहीं जो शीशे से पत्थर को तोड़ देअबे कायको किसी के लिए दुनिया छोड़ दें पीटर तुम […]
मैं वो बला नहीं जो शीशे से पत्थर को तोड़ देअबे कायको किसी के लिए दुनिया छोड़ दें पीटर तुम […]
अरसे बाद लबों ने फिर से दोहराया ‘ऐ आई’व्यक्तित्व में मेरे जैसे नयी एक ऊर्जा समाईपुकारा मैंने फिर से और
चलो कुछ तो बात करोगर मुझको अपना समझोये तो कहो इन आँखों कोआखिर क्यों भिगोती हो कुछ कहना चाहती होहोठ
आज बादलों ने फिर से डेरा जमा लिया हैनहीं जाने देंगे मुझको मन बना लिया है देखे जो बादल काले
पीला सूट पहनकर निकलीतुमने गज़ब ये क्या ढा दियाफौजी आया था शहर घूमनेतुमने तो उसे फंसा दिया कैंप से बाहर
मैं फौजी अफसरजब से हुआ रिटायररहता हूं अकेलामेरी कमान बेअसरमैं फौजी अफसर मैंने सबको सावधानविश्राम करायापीछे मुड़ परेड मेंतेज़ चलवाया
हेलो लिसेन … ……अरे सुनो तोएक बार सुन लो जो में कहता हूँमैं मिडिल क्लास व्यक्ति हूँकुछ नहीं कहता सब
बच्ची कहती है माँ सेगलबहियाँ लपेट करबाबा किसी से कह रहे थेजब जाते थे खेत पर अब पछताए का होत
कुछ दिनों से दिल का मिज़ाज़ समझ नहीं आता हैभटकता रहता था ये अब जहाँ जाता है रम जाता है
बुलाते थे जब पहलेतो आते नहीं थे तुमआना तो दूर फ़ोनउठाते नहीं थे तुम अब आये तो बस गए होघर
गोरी की मटकी गई है फूटकिस विधि पानी भर कै लावेरोवै गोरी ऊँट प्यासाऊँट को पानी कौन पिलावे चटक मटक
ज़िन्दगी में कुछ मिला ख़ास नहींहर चीज़ हमको कम ही मिली हैपानी कम मिला चीनी भी कमरोटी किसी तरह चल
जीवन खेला सांप सीढ़ी का हैजीवन खेला सांप सीढ़ी का हैजीवन खेला सांप सीढ़ी का हैजीवन खेला सांप सीढ़ी का
सावन में बारिश का देखो कहरसूरज बैठा घर बादलों से छिपकर काले बादलों ने लगाया था डेरापहरा तगड़ा था मज़बूत
काया से कमज़ोर आंखों से कम ही देख पाती थीजां में आती थी जान जब अम्मा सामने आती थीकिताबें की
याद नहीं जाती दिल से बचपन के नादान दिनों कीखुले आंगन में सो जाते हम हरे नीम के नीचे ही
सावन का महीना फुहारें पड़तीं हलके हलकेहम गुज़रें जब गली से मिलते दीवाने लड़केहम गुज़रें जब गली से मिलते दीवाने
कोटा में साजन का घरसाजन के घर की छत परबैठी मैं मुंडेर परसोच रही थी बादल काला सर परकुछ बूंदें
बारिश में मन खिल खिल जायचलो चलो कहीं सैर पे जायेंसड़क किनारे घुमें बैठेंपियें नुक्कड़ वाली चाय अदरक की सोंधी
बेटी को हमने अच्छा पढ़ा तो लिया हैहोशियार हैं वैसे तो एमबीए कर लिया हैएक उलझन है मगर कैसे बताएंकम्बख़्त