दही की थैली (Dahi Ki Thaili)
कैसे बचें गन्दगी से मरेंगे सब बीमारी सेकैसे बचें गन्दगी से मरेंगे सब बीमारी से दुकानदार फुर्सत में बैठा नाक […]
कैसे बचें गन्दगी से मरेंगे सब बीमारी सेकैसे बचें गन्दगी से मरेंगे सब बीमारी से दुकानदार फुर्सत में बैठा नाक […]
आज फिर किराने वाले ने उधार नहीं दिया,मज़बूर वो मज़लूम यूं गलत राह चल दिया। उम्मीद की रौशनी कुछ कम
गरमी तेरी वाट लगेझुलस गया जग साराखड़ी दीवार से खाट लगेगरमी तेरी वाट लगे हवा गरम, है पानी गरमसड़कें भी
इन्क्रीमेंट लग गयी है अब सब ठीक हो जायेगासैलरी बढ़ गयी है अब बिगड़ा नीक हो जायेगालग्ज़री जिन मजबूरों की
कुछ चलता है मन के भीतरज़ज़्बात हिलोरें लेते हैंकुछ क़दमों को है खींच रहाजब तुम से विदा हम लेते हैं
दादू का आया सौवां जन्मदिनदादू ने काटे दिन गिन गिन गिनदहशत से भरा हर दिन आये लोग बधाई देनेनाच गाना
किस चक्रव्यूह में आ फंसा है मैनेजरयहाँ भोकते हैं मुंहलगे कुत्ते मालिक केलोग जो रख छोड़े हैं तेरी हुक्मरानी मेंआत्मा
सैया रिटायर भये सखी मैं उकताय गयीतेरे भैया रिटायर भये आफत आय गयी बैठे घर हुकम चलावें चाय पियें चार
बचपन है खूबसूरत जवानी मनोरंजनबुढ़ापा तो जनाब बस झिक झिक हैकमजोरी बीमारी हर दिन लाचारीदवाखाना अस्पताल ही पिकनिक हैबुढ़ापा तो
एक ज़माना था जब फ़िल्में ब्लैक हुआ करती थीकाले कोट में हीरो की एंट्री हुआ करती थीहिंदी फिल्मों के उस
हँसेगौ संग हँसावेगौ बावरौ बिरजू बिरजू बावराटेंशन मुक्त करावेगौ बावरौ बिरजू बिरजू बावरानाचैगौ नचवावेगौ बावरौ बिरजू बिरजू बावराकमर मटकावेगौ बावरौ
मिलने और बिछड़ने में है एक पल का फासलापल में हम मिल गए पल ही में हो जायेंगे जुदाबिछड़ गया
सरकारी दफ्तर में साहब आएंगेखबर आई है की साहब आएंगेनिरिक्षण करने को साहब आएंगेतरक्की देखने को साहब आएंगे दफ्तर सजा
मेरा चयन एक सरकारी संस्था में हो गयास्टाफ लिस्ट में यूँ मेरा नाम दर्ज़ हो गया काम करने को एक
नानी की थी एक कहानी नानी कहानी बन गयीपरियों के देस घुमाने वाली नानी कहानी बन गयीसर पर हाथ फिराने
गरम पानी की प्याली मेंचलती रेल गाड़ी मेंडिप चाय की पुड़िया कोउसने उलट पुलट डुबोयाउठा पटक इधर उधर घोलाफिर जम
इंसान मैं आम था मुझको वो नवाब बनाकर ले गयीलखनऊ शताब्दी मुझे ख़ास मेहमान बनाकर ले गयी सोते सुलाते बतियाते
ज़िन्दगी एक दिन और ढलने को है सुहानी रात ये अब ढलने को है एक नयी सुबह निकलने को है
बच्चे के जैसे मुझसे वो बस खेला करता हैखेल कर मुझसे वो यूँ मन बहलाता रहता हैकितनी बार टूटा हूँ
एक उमर तक ये दर्द मुझे लीलता गयाकमज़र्फ जाते जाते बुरे हाल छोड़ गया खटकता रहा वो किसी किरायेदार सागया