कल रात..
कल रात मैंने खुद को बिकते हुए देखाअपनी ही नज़रों में खुद को गिरते देखाकोई अपना नहीं था भरे बाज़ार […]
कल रात मैंने खुद को बिकते हुए देखाअपनी ही नज़रों में खुद को गिरते देखाकोई अपना नहीं था भरे बाज़ार […]
वो तो सवाल उठायेगीवर्ना जिज्ञासा बढ़ती जाएगीनींद नहीं आएगी उसेथपकी दे दो गोली दे दोजब तक शांत न हो जायेगीसवाल
पब्लिक ने पेड़ों को देवकीऔर खुद को कंस समझ रखा हैखिलते ही फूलों को तोड़ डालते हैं तथाआस्था के नाम
मैंने तो नहीं कहा थाक्यों तुम भगवान मानने लगेकभी गलत नहीं होऊंगातुम क्यों यह मानने लगे मैंने कभी तुमसे ऐसा
भूखे पेट तो न सोता था वोपेट काट कर तो न जीता था वोमगर सोचकर खर्च करता था वोमाँ की
ऐ व्हाट्सप्प मेरेतेरा शुक्रियाउन्होंने कुछ लिखाजवाब मैंने भी दियातूने तुरंत भेज दियासिंगल टिक करकेफिर डबल कियामुझे बता दियामैसेज मिल गया
चल गणेशचंद चलमुझे बाहर लेकर चलबड़ी जोरों से लगी हैमेरा बदन देख जोरहा है बेकल, चल एक तू ही मुझे
एक बूंद बारिश कीदुल्हन सी आसमान सेविदा हुई पेड़ पर गिरी पेड़ की डाल से ‘टप’नीचे जमे पानी कीगोद में
मैं अपनी जिंदगी का हीरो हूँकाश जिंदगी फिल्म का परदा होतीनाटक तो अब भी होते हैंबस मैने कई हीरोइनें बदल
बापू ने इज्जत कमाईछोटी सी दुकान सेनहीं करी केवल कमाईसाख भी खूब बनाई लोग उन्हें सज्जन शरीफमिलनसार और ईमानदारजैसे नामो
वो पहली-सी बात, अब बाकी नहीं। तुझमें, मुझमें, जज़्बात अब बाकी नहीं। तेरी हँसी में जज़्ब था, एक सुकून-सा।हर बात,
किसी राह में किसी मोड़ परनज़र आ तू वीडियो कॉल परदेख लूँ तुझे बस एक घड़ी भरमेरे हमसफर, मेरे हमसफरमेरे
वंदन कर आपको सहर्ष सूचित करते हैंनौकरी पक्की आपकी अगली पहली से हम हैं सासु मां सरकार तुम हो दामादयह
मेरे महबूब ने मुझे प्यार मेंन जाने क्या क्या कह दिया किताब का मुड़ा हुआ पन्नाहाथी के मुंह में फंसा
मैं कोई शायर बदनाम नहींबड़ा मेरा कोई नाम नहींमैंने नहीं लिखी कोईबड़ी बड़ी इबारतेंन बेज़ा बढाए हैं मैंने कदन खींची
माफ़ करना जी माफ़ करनाभाई जी सुन तो लो सॉरी!कोई तो सुन लो मैं सॉरी हूँ जीआप यूं गुस्से से
बो हम जे कैरए थेसादी करवा दो हमाई इन्ही से सगाई करें हैंखुस रखेंगे सदा, तुमको दिल से दुआई दें
आज खाली बैठा था,हल्की बारिश का मौसम था,हँसी ख्वाब देखने का मन था। सर्फिंग करते-करते मेरीएक वेबसाइट पर नज़र गई।कुछ
सूने सूने ख्वाबों मेंजब तक तुम न आए थेखुशियाँ थी सब औरों कीग़म भी सारे पराए थेसबसे छुपाकर रखी थीबोतल
किस कॉलेज से है पढ़ी है तू ऐ मेरी होशियार सखीहूँ पीएचडी हूँ मैं पर लगती है तू ज़्यादा पढ़ी-लिखीसच