ग़रीब नवाज़ (Ghareeb Nawaaz)
खुदा मिलता नहीं कभी ऐश-ओ-आरामों मेंतेरी तकलीफ में मगर आगे खड़ा रहे सदा ग़मों का ग़म न कर है बड़ा […]
खुदा मिलता नहीं कभी ऐश-ओ-आरामों मेंतेरी तकलीफ में मगर आगे खड़ा रहे सदा ग़मों का ग़म न कर है बड़ा […]
गए रोज़ खयालात मेरे चुपचाप थेज़िन्दगी के अजीब बड़े हालात थेगए रोज़ ख़यालात मेरे चुपचाप थे न होश हमें न
गोरी पियाजी के घर को चलीदुनिया किसी की बसाने चलीकितनों के अरमान ढीले हुएटुकड़े दिलों को बनाकर चली गोरी पियाजी
ज़ज़्बात की मेरे अजी बोली न लगाओबाजार में हर चीज़ बिकाऊ नहीं होतीछोड़ दो आदत कि हर शै की है
दिन दिवाली दीपक तुम्हाराघर किसी और का तो क्या बात हैथोड़ी मिठाई नए कुछ कपड़ेबालक गरीब का तो क्या बात है हज़ारों
तन्हाईयों के महल में रहते हैं वो याद बनकरकभी रहते थे दुआओं में जो फ़रियाद बनकर वो था मंज़र फुर्सतों
धरती के विशाल सीने में कहीं एक हलचल हुईबीज फूटा कुछ बिखरा और आवाज़ चटक हुई एक नन्हे से पौधे
A, B से जब कुछ कहता है,B दोहराता है C से।C, A जब बन जाता है,तो फैले बात तेजी से।
पेड़ मैं नीम का उग आया एक मकां के दरवाज़े परकिसी जोड़े ने मुझको सींचा दी छाँव मैंने भी घर