सुना है तेरे शहर में (Suna Hai Tere Shahar Men)
सुना है तेरे शहर में अदा से मिलते हैं लोगदिल मिले न मिलें फिर भी मिलते हैं लोगबंद दरवाज़े बयां […]
सुना है तेरे शहर में अदा से मिलते हैं लोगदिल मिले न मिलें फिर भी मिलते हैं लोगबंद दरवाज़े बयां […]
वक्त है बदल रहा और रास्ते अनजानपुकारता हूँ तुम्हें कि बानगी मिलती रहेमंज़िलों की राह पर कारवाँ बढ़ते चलेंदीप मैं
हुई ज़िन्दगी तमाम कोई फिर गुज़र गयाक्या सबब कौन कौन फिर मैयत मेँ गया आँखें खुलीं थी उसकी अपनों की चाह
निस दिन नया सवेरा आशा का संदेशा लाता हैप्रकृति का सुन्दर स्वरुप मन को अति हर्षाता है पंछियों के कलरव
व्यर्थ के तानों को सुनकर न हो जाना मायूस नहींजतन कोई न समझे मेहनत का गुणगान नहींसौंप दिया परिवार को
देखा है किसी को टुकड़ों पर पलतेभूखा हो पेट पर देखा हो लात खातेबिना बात मारते हैं वो मुझको पत्थरमैंने
सरहद नहीं आँचल है मातृभूमि कापवित्र श्वेत सौम्य टुकड़ा यह पृथ्वी का मेरे कन्धों पर बन्दूक है ज़िम्मेवारीमाँ की लाज
घर के आँगन में आ बैठे थे जो पंछी हवा हुएथका हुआ मानुष बैठा हैं दृष्टि शून्य में धरे हुएसूनी
दिल पागल है दिल रोता है दिल में कुछ कुछ होता हैमेरे देश में अमन चैन नेताओं को हज़म नहीं