एकजुट रहो (Ekjut Raho)
माँ भारती पुकारती एकजुट रहोभिन्न धर्म भिन्न भाषा संग संग रहोतोड़े न दुश्मन हमें बच के तुम रहोमाँ भारती […]
माँ भारती पुकारती एकजुट रहोभिन्न धर्म भिन्न भाषा संग संग रहोतोड़े न दुश्मन हमें बच के तुम रहोमाँ भारती […]
वस्ल-ए-यार दिल को सुकून आया हैतूने ख़्वाबों को जब से मेरे सजाया हैबयां करूँ क्या तुझे ऐ मेरे हमदमतेरे दम
बाखुदा इल्म है तुम न आओगेनिशाँ क़दमों के समेटने बैठा हूँअचानक छुप गए हो दूर कहींदिल को एहसास दिलाने बैठा
अंग्रेजी को खस्ता हाल देसी बालक लिखें कमालबोरड़ परीछा में टीचर बालकांने दई सूत्र बतायअंग्रेजी के पेपर में जब निबंध
अंधेरों में चलो नए दीप हम जलाएंभले न हो बात बिना बात मुस्कुराएंज्योत से ज्योत जलाते चले जाएँगीत कोई गाऐं
जिस पल से तू! मुझमें समाया हैकुछ नया अनोखा अद्भुतरंग मेरे जीवन में आया हैजिस पल से तू! मुझमें समाया है
तारागण गिरि मेदिनी ससि सूर अरु व्योमसर्व साध विनती सुनो जो कछु सो ‘ओम’! कहा कहत है ‘ओम’ नर ईश्वर
Days were brightbefore I saw you.Nights were starry,skies wore blue.Alas! Life was wholebefore I saw you. Winters never chilled this
शीशा-ए-दिल इस कदर साफ़ हो जाएकि ज़र्रे ज़र्रे में खुदाया नज़र आये! उम्र भर दीदार को भटका किये हमगली कूचे
आज सुबहआफिस जाते समयअपनी गाड़ी के अंदर से देखाएक आम आदमीऊंची सी साईकिल पर सवारचला जा रहा थासाथ छोटा बच्चाआगे
आम आदमी के सपने: गाड़ी है बंगला है नौकर हैं चाकर हैंनहीं कोई कमी है कोई दुःख नहीं हैजीवन में
समंदर बोतल में उतारा है हमनेबरगद गमले में उगाया है हमनेशीशे कोआईना दिखाया है हमनेहाथी से गन्ना छुड़ाया है हमने
बड़ी मौज थी तुमसे मिलने से पहलेज़िन्दगी थी टशन तुमसे मिलने से पहले सर्दी की थी चिंता न गर्मी का
चल समय के रथ को मोड़ लें अतीत मेंकिताबों का बस्ता और बचपन बुलाता है!रोज़ की इस भगदड़ से बच
You’re my Wi-Fi darling You’re my Wi-Fi darling,I’m your router dear,I only connect with you —Say yes, don’t fear Say
मैं खोजता रहा उसकोमंदिरों शिवालयों मेंमस्जिदों गुरुद्वारों मेंमहसूस किया न कियाजब थामा तूने हर बारजब जब मैं गिरा भटकाजीवन की
रह मत अकेलातू थका हारा सापरेशां, ठहरा सा,मायूस. उजड़ा सा,रह मततू ‘रहमत’ क्योंकिचलना ही जीवन हैबढ़ना ही जीवन हैजो चलते
कवि तेरी कल्पना की ऊंची उड़ानपल में लांघती पर्वत झरने, नदियां, समंदरतालाब, खेत-खलिहान, गगनचुम्बी मकानजाने कितने नगर, ‘गढ़ और ‘बाद’