सिस्टम को नमस्कार (System Ko Namaskaar)
पुलिसवाला है ईमानदार पुलिसवाला है ईमानदारनहीं चोरों का सरदार पुलिसवाला है ईमानदारकरता नहीं कोई भ्रष्टाचार पुलिसवाला है ईमानदारनहीं करता कोई […]
पुलिसवाला है ईमानदार पुलिसवाला है ईमानदारनहीं चोरों का सरदार पुलिसवाला है ईमानदारकरता नहीं कोई भ्रष्टाचार पुलिसवाला है ईमानदारनहीं करता कोई […]
इसे बेच डालें हम उसे बेच डालेंकिसको भी चाहें सनम बेच डालेंविज्ञापन हैं हम न रहे कोई शकबेचने जाएँ तो
यह खाना जो खाते हम तीन पहर हैंआधा अमृत और आधा ज़हर हैगर माफिक हो तो देता है ताकतबेहिसाब बन
मैं कालू मैं जैकी ये है भूरी संतरीरात के प्रहरी हम हैं रात के प्रहरीये पहरा दे रात को मैं
मुहब्बत मैं करता हूँ करता रहूंगाकिसी मोड़ पर मैं गलत भी रहूँगाशिकवा न करना मैं न सॉरी कहूंगातुम मेरे अहम्
आँधियों से मैं खेला तूफानों में पला हूँआसमान की बिजली का एक शोला हूँवो बवंडर हूँ हर शै समटने को
मैं लिख तो रहा हूँ कागज़ परपर दिलों पर लिखना चाहता हूँएक हंसी दे सके दुखी मन कोबोल दो ऐसे
कहीं की ईंट कहीं का रोड़ाभानमती ने कुनबा जोड़ाइसमें कुनबा है नालायकभानमती का दोष नहींकुनबे से वो जुड़ी इसलिएक्योंकि ब्याह
गर्मी बढ़ी धरती तपी बैचेनी मची तो बारिश हुईप्रकृति की शोभा बढ़ी नवजीवन की आस हुईनवजीवन का वर्षा और गर्मी
खट रहा हूँ में थक रहा हूँदीवारों पे खोपड़ी पटक रहा हूँमैं कांचा कंवारा पति बेचाराशादी होने की सजा भुगत
बड़ा शहर बड़ी सड़क के किनारे जो उग आया है तूअपनी तोतई और नाज़ुक रंगत पर जो इतराया है तूतुझे
दावा है कि सोचकर किया जाए वो प्यार नहीं हैअजी प्यार तो बस प्यार है कोई व्यापार नहीं हैसच है
पर्दानशीं हुए खूबसूरत चेहरे सभीअब नज़र हुस्न पर ठहर पाती नहींदिले दर पे कोई दस्तक होती नहींअब धड़क धड़कनों को
‘राह चुन ली है तूने जो, आसान नहीं हैवह जीत क्या जो खूं अगर कुर्बान नहीं हैं ‘ जब हम
धन के आगे गुणों का महत्त्व नहींतकनीक के समक्ष प्रकृति गौण है चाकू से हाथ अक्सर कट जाता हैखरबूज़ चाकू
हिंदी भाषी हिंदी बोलते थेमुगलिया बोलते थे उर्दूसमय गुज़रा वक्त बदलाहटा संस्कृतियों से पहराहिंदी भाषी उर्दू पढ़ने लगेशब्द दोनों के
कसम है बेटी माँ के रस्ते पर ही तुमको चलना हैबीवी बन कर मर्दों से गिन गिन कर बदले लेना
रोज़गार छीन लो व्यापार छीनोमंहगाई से कुचलो टैक्स से मारोआम जन को उसमें दफना दोजब सड़ जाए उसे गरीब बताओगरीबी