रहमत (Rahmat)
रह मत अकेलातू थका हारा सापरेशां, ठहरा सा,मायूस. उजड़ा सा,रह मततू ‘रहमत’ क्योंकिचलना ही जीवन हैबढ़ना ही जीवन हैजो चलते […]
रह मत अकेलातू थका हारा सापरेशां, ठहरा सा,मायूस. उजड़ा सा,रह मततू ‘रहमत’ क्योंकिचलना ही जीवन हैबढ़ना ही जीवन हैजो चलते […]
कवि तेरी कल्पना की ऊंची उड़ानपल में लांघती पर्वत झरने, नदियां, समंदरतालाब, खेत-खलिहान, गगनचुम्बी मकानजाने कितने नगर, ‘गढ़ और ‘बाद’
सुनते हुए मैं कह भी गयाकहते हुए तुम सुन न सकेतुम दिल को मेरे पढ़ न सकेकुछ हम भी खुलकर
When silence loses its speech,And action forgets its reach,When even words have nothing left to teach —Say something. When policy
I wish I could —shoulder the Earth,swallow the Ocean,shift the mountains,and stitch the edges of the world. I wish I
Two sides of a coin,two ends of life —life and death: head or tail?day and night: head or tail?good and
बढ़ी हुई मुश्किलों केहल जो न निकल सकेहालात न बदल सके‘विधा’ संग न चल सके मिटा भेद अपनों काघुटा दम