शुक्रिया (Shukriya)
खिलाकर मीठे आममौसम बना दियाज्येष्ठ मास की गर्मी मेंमज़ा दिला दियानज़रों से सीधादिल में बिठा लियाआदमी था में आमतुमने ख़ास […]
खिलाकर मीठे आममौसम बना दियाज्येष्ठ मास की गर्मी मेंमज़ा दिला दियानज़रों से सीधादिल में बिठा लियाआदमी था में आमतुमने ख़ास […]
पुत्र पिता का राजा बेटा बड़ा होकर राज करेपिता पुत्र का शक्तिमान जो मिटा दे सब खतरे जीवन की सच्चाई
सच सच होता है मगर होता है डरावना और कड़वाझूठ के पाँव नहीं होते मगर झूठे का होता बोलबालाभले हो
क्या कहा कि पुनर्जन्म होता हैहाँ सही सुना, ऐसा ही होता है हर निद्राकाल के बाद यदिकोई मानो मरकर जी
स्कीन देख अँखियाँ गयीं कॉल सुनत गए कानसर्फिंग में अंगूठा घिसा मिट गए सगरे निसानमाया कैसी राम जी स्क्रीन दायी
तेरे बिना शाम काटे न कटेये रातें भी अब धुंधली लगेंतेरे बिना हर खुशी अधूरीलगे जैसे दुनिया छोड़ दें तेरा
तेरा नाम लेकरतुझे हाज़िर रखकरख्वाहिश का बीजहमने दिल में बो दिया सपनों की कश्तीहवाओं में तैरेदिल की बातेंतेरे आगे खोल
किस्मत गर दगा दे तो इंसां बेबस हो जाता हैहवाई जहाज़ में यात्री को कुत्ता काट खाता हैकिस्मत मेहरबान तो
हम मैसेज कर देते हैं गोया वो पढ़ भी लेते हैंआरज़ू है मगर आएं नज़र वो कभी टाउन मेंउम्र दराज
गरीब अमीर फर्क नहीं मोबाइल सबके पासजन जन भया अमीर जन आया लो रामराज आया है अब रामराज विश्व गुरु
उमंग थी तरंग थीमलंग थी मैं संग थीजब डोर तेरे हाथ थीमैं उड़ती पतंग थी अब न संग तू बेरंगसब
आवारा बादलचाँद को कुछ देर ढक करअपने वज़ूद का गुरूरजरूर कर सकते हैचाँद की चमक कोकम तो नहीं मेरी वफ़ा
काटो तो ऐसे लहू बूँद भी न निकलेबाँटो अगर तो सब तार तार कर दोशोर इतना उठाओ मेरे झूठ कासच
दौड़ दौड़ कर उड़ उड़ करशब्द ओ हरफ़ चुन लेती हैमेरी मन मुर्गी हर रोज़एक अंडा दे देती है तितली
The man lived in Junglewith fellow animalsHe was self dependentfor survival The man became socialdependence increasedHe then becameSocial animal Facilities
मेरी लकीरों में गुम थाजो जांनिसार की तरहवो छोड़ कर गया मुझेकिसी अखबार की तरह उसकी फुर्सत में अबमुहाल हुए
खुद की खुद्दारी पर खैर करे खुदा भीक़दमों में ज़मीन मुट्ठी में आसमान होमेहनत की खुराक से हौसले हों बुलंदहर
बर्तन में ले लो पानी जराअदरक मसाला डालो खरागैस पे रख बर्तन को सजनउबाल आएगा रुको ज़रा चीनी संग हो
आंसू बहे और न काँधे ही मिलेमुसाफिर सफर पर चल भी दिएचीख-ओ-पुकार बस शोर हाहाकारवक्त के उलटे पहिये में लाखों
लिखते हो क्या? हाँ हाँ मैं लिखता हूँ लिख लेता हूँकुछ अपने मन में बात छिपीकुछ जग बीती कह देता