न बोले तुम न मैंने कुछ कहा (Na Bole Tum Na Maine Kuchh Kaha)
न बोले तुम न मैंने कुछ कहाआँखों ने आँखों से जाने क्या कह दियातुम खुले जो मैं भी खिलने लगादिल […]
न बोले तुम न मैंने कुछ कहाआँखों ने आँखों से जाने क्या कह दियातुम खुले जो मैं भी खिलने लगादिल […]
दिन जिंदगानी में अइसा भी आयेंगाभिड़ु तू भिड़ु से बूढा हो जाएंगायार फुकरे पार्टी विर्टी सब कल्टी होइन्गेबॉडी भी राप्चिक
खाया है धोखा टूटा है दिल बार बारजब जब किया है किसी पे हमने ऐतबारनादाँ थे हम आया था किसी
हम तनहा खुद में समाये थेदूर हमसे हमारे ही साये थेसूने मन में फिर तुम आयेकई वादे अपने संग लायेकई
पानी में घुला ज़हर हैं हवाएं धुआं धुआंनेमतें बारिश की भी अब तो सितम हुईबस भी कर खुदा के बन्दे
अक्लमंद है शक्ल से मासूम नज़र आता हैयूँ वो शख्स हर बार ज़माने से छला जाता है पहली मुलाकात में
चंदा की पूजा कर छलनी में देखेगीपहले चाँद फिर साजन को देखेगीसारा दिन निर्जला व्रत रख सजनीअपने साजन को कुछ
उम्र भर संघर्षों में जूझते रहेपरिवार को पसीने से सींचते रहेख़ुशी बांटी दुःख का ज़िक्र नहीं कियापिताजी ने तंग बिलकुल
शरद पूर्णिमा की रात है हम तन्हा छत परपूरा चाँद आसमां पे है और चांदनी छत परयाद आतीं हैं रातें
पापा ने बेटे संग जोड़ी बना डालीढ़लती उम्र में जवानी दिखा डालीबेटे की बाइक पर निकले जो सैर को बेटे
अपनी यह सामर्थ्य कहाँ कि उनको साथ रखेंउनका ख्याल रखें या भोजन उनको देंपापा बड़े हैं घर के उनको प्यार
हर आह हर आंसू का कर हिसाब आया हूँमैंआज दर्द से कर के दो दो हाथ आया हूँघर मैं घुसकर
लेखक के घर की मुंडेर पर एकजंगली कबूतरों का जोड़ा रहता थालेखक उन्हें अक्सर अपनी खिड़की सेदेखा करता और उनकी
नारी की सृजनात्मक क्षमता अद्भुत हैप्रसव के साथ ही जग जाता मातृत्व हैसंतान लड़का हो या लड़की, गोरी याकाली सक्षम
दिल को समझाने को मेरी जान ख्याल अच्छा हैकविता में पिरोकर तालियां बजवाने के लिए अच्छा है तुम्हारी ऊंची उड़ान
तुम को भी अच्छा लगता थाआनंद हमको भी आता थादो नैनों का मिलन प्रियेमन व्याकुल कर जाता था वक्त ने
बड़े लोगों में बड़ी देखी कोई बात नहींयूँ बिखर जाएँ हम वर्ना ऐसे हालात नहीं पैसे वाले हैं अमीरी का
तू रानी तो मैं भी रानी कौन भरे पानीनोट नहीं पॉकेट में पीते चाय ईरानीतू रानी तो मैं भी रानी
अपने मुकेश की माँ बीमारबहुत बीमार थी क्योंकि वह गुटखेकी बुरी लत की शिकार थीतम्बाकू के अधिक सेवन सेमाँ के
बाप के रूपमें उसने उसे हमेशाअपनी इज़्ज़त पर खतरा समझाऔर कोशिशें की वह पैदा ही न हो भाई के रूप