एक दिन सुबह..
एक दिन सुबह उठा तो मोबाइल नहीं बजा,स्क्रीन ऑफ, न कोई नोटिफिकेशन सजाउंगलियाँ हवा में टिक-टिक करती रह गयीं,इंटरनेट, वॉट्सऐप, […]
एक दिन सुबह उठा तो मोबाइल नहीं बजा,स्क्रीन ऑफ, न कोई नोटिफिकेशन सजाउंगलियाँ हवा में टिक-टिक करती रह गयीं,इंटरनेट, वॉट्सऐप, […]
ऐ हुस्न ज़रा जाग तुझे इश्क़ जगायेकाहे मुझे तू ख़ौफ़ज़दा खर्राटे सुनाएऐ हुस्न ज़रा जाग तुझे इश्क़ जगायेऐ हुस्न ज़रा
लाइफ हुई झंड, बना दो झिंगालालादे दो मुझको एक समोसा आलूवालाखट्टी चटनी, सोंठ मसाला, तीखा वालामुझको दे दो एक समोसा
सोचा था मैं मर जाऊंगा खुद या फिर दर्द को हराऊंगाजान ले लूंगा इसकी मैं या फिर खुद मैं जान
क्या होता भगवन तू अगर पाँव नहीं देतापाँव की बजाय हमको पहिये बख्श देतास्पीड बढ़ जाती जितना तेज़ मैं भग
लम्हे जो चंद मिले हैं तो खुद पर ध्यान दो चलोकांटे हैं चुभे पैरों में ज़रा उनको निकाल चलोसफर सिर्फ
ये दुल्हन…ये दुल्हन..ये दुल्हन बच्चू ..तुझे जो थमा दी गयी हैये दुल्हन बच्चू तुझे जो थमा दी गयी हैये दुल्हन
शिकार की वो शौकीन वो उसका शिकार थाप्यार होता था कभी अब मारता फुंफकार थावो बोलती जाती थी वो केवल
तेरे प्यार ने मम्मी यह क्या बना दिया हैकहीं प्रोटीन तो कहीं फैट फंसा दिया है तुझे हमेशा वह कमज़ोर
मुकद्दर से ज़्यादामुकद्दर से ज़्यादा, हाँमुकद्दर से ज़्यादा..मुकद्दर से किसी को न ज़्यादा कभी मिला हैबाकी बंदे खुद तेरा फैसला
ज़रूरतें महँगी न थीं कभीहाँ… शौक मंहगे हो गए।ममता आज भी सस्ती है,पर रिश्ते मंहगे हो गए। हमने ज़रूरतें छोड़
फौजी भाईजरा देखके चलोआगे ही नहीं पीछे भीदायें ही नहीं बायें भीऊपर ही नहीं नीचे भी फौजी भाईजरा देखके चलोआगे
बात भेजे में डालनाआप फौज में हैंगलतफहमी न पालनाजनाब मौज में हैं जंगल से चले आये होसिस्टम में रहना हैहर
तेरे प्यार में गिरे टूट गए कांच के गिलास से हमतू छोड़ गयी अब बैठे हैं चकनाचूर अधूरे से हम
अभी मूड नहीं हैअभी मूड नहीं हैअभी मूड नहीं हैअभी मूड नहीं है सुबह की बारिश गजब घनघोर थीबादलों की
शुक्रिया तुम्हारा है ढलती उम्र में हमसे रोमांस कर लियाचमकते हैं अब हम जैसे घर पुराने को नया पेंट कर
सभ्यताओं ने सवाल पूछे पीढियों ने चुप करा दियासच को इस तरह हमने खोद कर कब्र दफना दियाहवाला दे दिया
आप खाने की बात करते हैंहमने तो धोखे भी खाए हैंनिगले हैं. समोसे बिन आलूवालेदही के शोलों के बिल चुकाए
[Verse 1]चिन्दी चोर मैं लौंडामैं चप्पल मंदिर से चुरातीमैं गुल्लू दीवानाचमेली मैं हूँ जानी जाती मिल जाएँ हम जो दोनोंगैंग
उम्र के हर पड़ाव पर ख़ुशी के मायने अलग हैंक्योंकि होती सोच अलग है ताने बाने अलग हैं बचपन की