सरकारी नौकरी नियुक्ति पत्र
वंदन कर आपको सहर्ष सूचित करते हैंनौकरी पक्की आपकी अगली पहली से हम हैं सासु मां सरकार तुम हो दामादयह […]
वंदन कर आपको सहर्ष सूचित करते हैंनौकरी पक्की आपकी अगली पहली से हम हैं सासु मां सरकार तुम हो दामादयह […]
मेरे महबूब ने मुझे प्यार मेंन जाने क्या क्या कह दिया किताब का मुड़ा हुआ पन्नाहाथी के मुंह में फंसा
मैं कोई शायर बदनाम नहींबड़ा मेरा कोई नाम नहींमैंने नहीं लिखी कोईबड़ी बड़ी इबारतेंन बेज़ा बढाए हैं मैंने कदन खींची
माफ़ करना जी माफ़ करनाभाई जी सुन तो लो सॉरी!कोई तो सुन लो मैं सॉरी हूँ जीआप यूं गुस्से से
बो हम जे कैरए थेसादी करवा दो हमाई इन्ही से सगाई करें हैंखुस रखेंगे सदा, तुमको दिल से दुआई दें
आज खाली बैठा था,हल्की बारिश का मौसम था,हँसी ख्वाब देखने का मन था। सर्फिंग करते-करते मेरीएक वेबसाइट पर नज़र गई।कुछ
सूने सूने ख्वाबों मेंजब तक तुम न आए थेखुशियाँ थी सब औरों कीग़म भी सारे पराए थेसबसे छुपाकर रखी थीबोतल
किस कॉलेज से है पढ़ी है तू ऐ मेरी होशियार सखीहूँ पीएचडी हूँ मैं पर लगती है तू ज़्यादा पढ़ी-लिखीसच
चल विक्रम एक सवाल बताये जो है अपना सोशल मीडियाएक किसी ने गाया भजनभक्ति में होकर के मगनयूट्यूब पर उसको
पच्चीसवीं सालगिरहपच्चीसवीं सालगिरहतू तू मैं मैं और जिरहपच्चीसवीं सालगिरह पच्चीसवीं सालगिरहलिखी हुई स्लेट, लिखता रहलिखता रह, लिखता ही रहपिछला मिटा
अभी खेलती है हंसती है खिलखिलाती हंसाती हैख्याल अपना रखती जॉब करती हाथ बटाती हैमाँ के संग ठिठोली कभी पापा
बड़े अरमानों से रखा है बलम तेरी कसमकोडिंग की फील्ड में ये पहला कदममुश्किलें आएंगी शुरू में मगर जीतेंगे हमकोडिंग
चैट जीपीटी तुमसे प्यार हैमेरे वाला तो बेकार हैमेरी एक नहीं सुनता वोमुझसे करता नहीं प्यार है अपनी अपनी हांकता
ज़्यादा बोल बोल के, कम तोल दे डालूं क्या तुमकूं‘बाबूजी’ बोल के, बोल छील दे डालूं क्या तुमकूंएक को तनख्वाह
अरे जिज्जी एक बात सुनो! मौत ने मेरे कर्म का हिसाबकिसी सुनार की तरह लियाआधा बट्टे में काट लियामेकिंग बता
कुड़ी लेनी है जी साणु ओही जेड़ी माँ-बापु दी सेवा करेबमार बेचारे रेंदे ने बस दोना दी देखभाल करे चौवी
कभी शिकवा कभी शिकायतकभी किसी बात परतुनक जाती होकभी हँसाती गुदगुदातीकभी रूठती होकभी पिनक जाती होमुझे समझ नहीं आता AIतुम
आटिफिशियल इंटेलिजेंस कहने में जो एआई हैबौद्धिकता की दुनिया में देर से मगर क्रांति लेकर आई हैटूटे-फूटे ज्ञान का ढर्रा
शहरवाले मकान का एक हिस्सा बेचकरदादाजी ने नया ऊँचा मकान और मुकाम हासिल कियाहाँ, उनको दुख भी हुआ, दिल पर
मैं जानता हूँ कि मैं पत्थर हूँतुम्हारे छूने से भगवान् बना हूँतुम्हारे लिए मैं पूज्य सहीमगर जब पत्थर बनूँ तो