फूफाजी (Foofaji)
एक गाँव था गाँव में स्त्री जिसका नाम था कजरीदूध बेचकर गांव में गुजर बसर वो किया करती झुठ का […]
एक गाँव था गाँव में स्त्री जिसका नाम था कजरीदूध बेचकर गांव में गुजर बसर वो किया करती झुठ का […]
खुशनसीब हैं वो घर जहाँ मेहमान रुका करते हैंये वे चिड़ियाँ हैं जो हर डाल पर नहीं बैठतीं खुदा से
मैं वो बला नहीं जो शीशे से पत्थर को तोड़ देअबे कायको किसी के लिए दुनिया छोड़ दें पीटर तुम
इससे पहले कि तुम कुछ सोचो कुछ सोचो और कुछ न बोलोइससे पहले कि लोग कुछ बोलें उनकी बातों से
डॉक्टर जी जरा नब्ज़ देख लो बहुत परेशान हो गए हमउल्टी चक्कर गैस सतावै है पेट में चल रहे कई
चप्पल पहने जग मुआ वर्णन करे न कोयबिन चप्पल छाले परें पीर घनेरी होय बच्चे बूढ़े नर नारी सब पहनते
कानों में आई आवाज ‘वो लड़की’मासूमियत का वो क़त्ल कर गयी बढ़ती उमर थी बुद्धि भी जड़ थीखाली दिमाग शैतान
अरसे बाद लबों ने फिर से दोहराया ‘ऐ आई’व्यक्तित्व में मेरे जैसे नयी एक ऊर्जा समाईपुकारा मैंने फिर से और
रास्ते में एक छड़ी पड़ी हैमैं क्या समझूँ क्या समझूँपास ही एक ऐनक पड़ी हैमैं क्या समझूँ क्या समझूँ रास्ते
न आग न चिंगारी न धुंआज़िन्दगी में खेल ये क्या हुआन ही उलझन न दर्द है मुआदिल बता मैं मर
चलो कुछ तो बात करोगर मुझको अपना समझोये तो कहो इन आँखों कोआखिर क्यों भिगोती हो कुछ कहना चाहती होहोठ
जीना है तो आज ही जी लोबीत रहा है जो धीरे-धीरेजो करना है आज ही कर लोफिसल जाएगा ये धीरे
आज बादलों ने फिर से डेरा जमा लिया हैनहीं जाने देंगे मुझको मन बना लिया है देखे जो बादल काले
क्या तुम्हें याद होगा की कोई इतना तुम्हें चाहता हैदिन रात जागते सोते बस ख्वाब तुम्हारे देखता है बैठे होते
पीला सूट पहनकर निकलीतुमने गज़ब ये क्या ढा दियाफौजी आया था शहर घूमनेतुमने तो उसे फंसा दिया कैंप से बाहर
सोशल मीडिया पर बैठे कितने ज्ञानी हैंकितने परोपकारी और कितने ध्यानी हैंगागर में सागर का ज्ञान रोज दे जाते हैंदयावान
कचरे वाले ने अहा!कचरे वाले ने ऐसा जादू डालाधो डाला मन का प्यालाघर से कुड़ा कचरा थैली वैली साथ ले
मैं फौजी अफसरजब से हुआ रिटायररहता हूं अकेलामेरी कमान बेअसरमैं फौजी अफसर मैंने सबको सावधानविश्राम करायापीछे मुड़ परेड मेंतेज़ चलवाया
A Girl Called Anonymous I love my college…More than words can say. Not because of classrooms.Not because of books. Because
अपने शर्माजी थे नंबर एक पियक्कड़बॉडी थी सूखी हड्डियों में थी अकड़यहाँ वहां कहीं भी पीकर लुढ़क जातेघरवाले उनको फिर