सांप सूंघ गया (Saanp Soongh gaya)
क्या हुआ ब्रो तुझे कोई सांप सूंघ गयाक्या हो गया जो तुझसे उधार मांग लिया हाँ हाँ याद है डिअर […]
क्या हुआ ब्रो तुझे कोई सांप सूंघ गयाक्या हो गया जो तुझसे उधार मांग लिया हाँ हाँ याद है डिअर […]
मत रम मनुआ मंदिर में गला भर्राया गाता होगाबेसुरे ताल मिलाते होंगे सरगम गश खाता होगारोता होगा हारमोनियम सुर अश्क
पानी मिले चाय मिले खाना मिले न मिलेऐसा पड़ौसी लिल्लाह किसी को न मिले मेरा पड़ौसी कचरा सड़क पे डालता
पब्लिक प्लेस में जब भी जाए गुटखा न थूके धुआं न उड़ाएनशे की अगर बास न छोड़ेसमझ लेना वो मर्द
बोझ इस कदर था उसके कन्धों परउलझनों से उसे सदा घिरा देखा इंसान था वह भी हंसना जानता थामगर जब
कुकर कुकर्मी मुझे देख तू सीटी क्यों बजाता हैदाल कहीं और गला भला मुझ से क्या नाता है मैं कमसिन
ये तेरे तेवर और ये कलेवरजा किसी और को दिखईयोतू हमसे है समझी! ये अकड़किसी और को दिखईयोजाती है कि
जिनको आना था मेरी आवाज़ पर आयेतू नहीं आया तूने कितने बहाने बनायेदेख ली यारी तेरी झांसे में आऊंगा नहींतुझे
मियां इज़्ज़ार बेग़ होते थे एक चचा अपनेबड़े लोगों में बैठते खूब खर्च किया करते शाही ठाठ गए हो गयी
का करूँ सजनी ये पेट निकला जाएमोमोज बर्गर बैठे इसमें दुकान सजायेकाबू में न आए रोज़ बढ़ता ही जाएका करूँ
बड़े ढीले होते थे बड़े बाबूस्टाफ पर नहीं था कोई काबूबेकाबू वो स्टाफ के चलतेअफसर से खाते थे रोज़ चाबुक
मन रे क्यों बेकल होता हैक्यों नहीं बिज़नेस कर लेता हैलक्ष्मी जी घर आएं स्वाद प्रॉफिट काक्यों नहीं ले लेता
हा हा हाहा हा हाविक्रम…पहचाना?मैं बेतालले मैं आ गया हूँफिर पूछने सवालतू मेरे प्रश्नों का उत्तरअपनी बुद्धिबल औरतर्क से यूँ
कहा मैंने एक दिन भिंडी सेक्यों जलते तवे पर लेटी होतन्हा फ्राई हो रही हो ऐसेघर क्यों नहीं बसा लेती
गरमी गदर मचा गई थीवर्षा भी कहर ढा गई थीपानी की ठंडक में मैंनेठण्ड से मुलाक़ात कीकई मुद्दों पर बात
हूल दे भई हूल देलड़ जा घुट जा गाली देगलती मत कुबूल बे दिल्ली में गर चलना है तोगलती मत
हैलो! मैं पैदल हूँमैं चलता पैदल हूँमैं सोच समझकर चलता पैदल हूँसोचते रहो तुम मैं दिमाग से पैदल हूँ मैं
मनुआ बहुत हो चुकी मन कीजा उलझा क्यों प्रीत की लत मेंअब झड़ी लगी असुअन कीमनुआ बहुत हो चुकी मन
आंखों में ख़ुशी छा जाती हैचेहरे पर नूर आ जाता हैएक टिप वेटर को जो देते होउसे खुद पे गुरूर
सफर तुम्हारा हैदिन तुम्हारा हैवक्त तुम्हारा हैकिसी को फिर क्या दिखाना हैसजन घर जाना हैतो सज कर ही जाना है