इश्क़ का बुलडोज़र…
रूबरू (Rubaroo)
रूबरू तुम हो एहसास जानलेवा हैछू लिया है देखो, क़यामत हो गयी हैछू लिया है देखो, क़यामत हो गयी हैरूबरू
इश्क़ का बुलडोज़र…
मयस्सर (Mayassar)
तुम हो, हूँ मैं भी यहींदरमियाँ दोनों के मगरकुछ भी अब बाकी नहींसच तो है और फ़िक्र भीतेरे अफसानों में
तरन्नुम का बुलडोज़र…
चेहरे (Chehre)
दुनिया यह छोटी सीछोटी सी दुनिया मेंहर तरफ नज़र आतेचेहरे ही चेहरे निकलो गर घर सेपढ़ने लगो चेहरेइंसां की फितरतबयां
इंसानियत का बुलडोज़र…
मजदूरी की मजबूरी (Majdoori Ki Majboori)
मैले कुचले से कपड़ों मेंस्वेदग्रस्त हो यह प्राणीजीवन है संघर्ष सिखातारिक्शेवाला सीख पुरानी रुपये चंद कमाने कोघर बार छोड़ कर
हास्य का बुलडोज़र…
फैन मिला न कोय (Fan Mila Na Koy)
कविता लिख कवि मरा फैन मिला न कोयबस्ती है गंजेन की कवि कंघी करे न कोय पोथी पढ़ जग मुआ पंडित भया
इंसानियत का बुलडोज़र…
हक़ हमारा (Haq Hamaara)
यह ज़मीं भी न थी न था आसमान येन दरिया समंदर खूबसूरत जहाँ येन इंन्सां की हस्ती न जंगल जिनावरबला
दर्शन का बुलडोज़र…
कर्मण्येवाधिकारस्ते (Karmanyevadhikariste)
क्या उलझन है मायूसी क्योंजो होगा हो जाने दो बेचैनी क्यों कल की चिंता में पड़ कर तुमक्यों हो अपना
इश्क़ का बुलडोज़र…
शुभकामना (Shubhkaamna)
लम्बा यह दौर था जीवन की राह मेंउड़ चलेगा कल तू नयी मंज़िल की चाह मेंसाथी यहां जो बने यहीं
इश्क़ का बुलडोज़र…
कौन ले गया (Kon Le gaya)
कौन ले गया लिखने का हुनर मेरातसव्वुर का गहरा समंदर मेरा में नहीं कोई बदनाम शायरन खायी चोट उल्फत में
इश्क़ का बुलडोज़र…
मिलन (Milan)
मतवाला दिल सोचता हैजिस पल होगा अपना मिलनतुम फैलाकर अपना दामनथाम लोगी दिल की धड़कन जब से होश सम्भाला हैतुमसे
तरन्नुम का बुलडोज़र…
बुलाये मेरी कविता (Bulaye Meri Kavita)
पल पल तुम्हें बुलाये मेरी कवितादिल धड़काये लजाये मेरी कवितादेती राहत यह सूने हर मन कोइत्र सी मन में समाये
तरन्नुम का बुलडोज़र…
सुना है तेरे शहर में (Suna Hai Tere Shahar Men)
सुना है तेरे शहर में अदा से मिलते हैं लोगदिल मिले न मिलें फिर भी मिलते हैं लोगबंद दरवाज़े बयां
इंसानियत का बुलडोज़र…
दोस्ती (Dosti)
वक्त है बदल रहा और रास्ते अनजानपुकारता हूँ तुम्हें कि बानगी मिलती रहेमंज़िलों की राह पर कारवाँ बढ़ते चलेंदीप मैं
तरन्नुम का बुलडोज़र…
माज़ी (Maazi)
हुई ज़िन्दगी तमाम कोई फिर गुज़र गयाक्या सबब कौन कौन फिर मैयत मेँ गया आँखें खुलीं थी उसकी अपनों की चाह
तरन्नुम का बुलडोज़र…
नया सवेरा (Naya Savera)
निस दिन नया सवेरा आशा का संदेशा लाता हैप्रकृति का सुन्दर स्वरुप मन को अति हर्षाता है पंछियों के कलरव
इंसानियत का बुलडोज़र…
गृहणी तुमको प्रणाम
व्यर्थ के तानों को सुनकर न हो जाना मायूस नहींजतन कोई न समझे मेहनत का गुणगान नहींसौंप दिया परिवार को
तरन्नुम का बुलडोज़र…
Stray Dog
देखा है किसी को टुकड़ों पर पलतेभूखा हो पेट पर देखा हो लात खातेबिना बात मारते हैं वो मुझको पत्थरमैंने
तरन्नुम का बुलडोज़र…
प्रहरी (Prahari)
सरहद नहीं आँचल है मातृभूमि कापवित्र श्वेत सौम्य टुकड़ा यह पृथ्वी का मेरे कन्धों पर बन्दूक है ज़िम्मेवारीमाँ की लाज
दर्शन का बुलडोज़र…
बूढ़ा (Boodha)
घर के आँगन में आ बैठे थे जो पंछी हवा हुएथका हुआ मानुष बैठा हैं दृष्टि शून्य में धरे हुएसूनी




















