बला है तेरी नज़र का यूँ झुक जानाहुई शाम जैसे सूरज का ढल जानाहज़ारों में नहीं तुम हो एक लाखों मेंमुश्किल है इस हुस्न की तह ले पाना तुम चलो तो साथ चले वक़्त और बहारमेरे गुलशन में कुछ देर ठहर कर जाना मुद्दतों से दिल कर रहा था इंतज़ारआकर मेरे अरमानों पे करम फरमाना दिल ने खुदा मान ही लिया है तुमकोमेरी ख्वाहिशो की झोली भरते जाना Let Love Unfold The way your eyes lower, oh that graceful fall…It’s like the sun sinking at twilight’s call.You’re not just one in thousands, or even a few—You’re one in a million,…
नेताजी ने रुपया खायाकोयला खाया बंगला खायाकिया घोटाला चारा खायास्पेक्ट्रम खाया पुल भी चबाया पब्लिक धन भरपूर उड़ायाफिर भी तनिक न मुंह बिचकायादेश को आखिर बीपी आयामुहँ के बल चित्त गिरा धड़ाम तभी कहीं किसी कोने सेकर्मवीर कहीं निकल के आयाभागदौड़ की देश संभालाजनता का विश्वास कमाया सब चोरों को बारी बारीसजा दिलाई जेल भिजायाअब चोरों के होश फाख्ताहाय राम भी निकल न पाया
टॉयलेट में से शीशा गायबगठरी है पर पैसा गायबपैसा है पर माल गायबघर में रोटी दाल गायबवाह रे शहर तेरा कमालजेब से है रूमाल गायब रातों की है नींद गायबदिल से है उम्मीद गायबअजनबी सब अपने गायबआँखों से हैं सपने गायबबाग से पेड़ बहार गायबवक्त पे रिश्तेदार गायब दिल का प्यार यार गायबबहन भाई का प्यार गायबबंदा सीधा सच्चा गायबमाँ रोती है बच्चा गायबबेचैनी है चैन गायबलिखने लगो तो पेन गायब गोरी का श्रृंगार गायबपायल की झंकार गायबढोलक की है खाल गायबगीत बचे मल्हार गायबबिजली गायब पानी गायबरस्में सब पुरानी गायबशहर तेरे का बुरा हाल हैरोगी हैं अस्पताल गायब बच्चों का…
माँ भारती पुकार रही एकजुट रहोअलग धर्म जात रंग संग संग रहोतोड़े न दुश्मन हमें बच के तुम रहोमाँ भारती पुकारती एकजुट रहो बहुत लड़ लिए हैं बहुत मर लिएभेदभाव भूल देश के लिए जियोमाँ भारती पुकारती एकजुट रहो हिन्द की संतान हो जय हिन्द तुम कहोमन्त्र एकता का यही संग संग कहोफुसलाये गर कोई गैर तुम सावधान होमाँ भारती पुकारती एकजुट रहो अपनी अपनी बोलो कब तक कहेंगे हमभारतीय हो तो भारत की तुम कहोमाँ भारती पुकारती…
वस्ल-ए-यार से दिल को सुकून आया हैतूने ख़्वाबों को जब से मेरे सजाया हैबयां करूँ क्या तुझे ऐ मेरे हमदमतेरे दम से ही मैंने ये मुकाम पाया है गम की पनाहों में खो रहा था मैं तोकैद ज़िन्दगी थी रो रहा था मैं तोज़ख्मों को दिल के सहला के तूनेदिया ख़्वाबों का फिर से जलाया है राह-ए-मंज़िल में चूर थे ये कदमबाजी-ए-ज़िन्दगी जैसे हार गए थे हमनाखुदा बन के सफीना को तूने मेरेगहरे तूफां में साहिल पे लगाया है वस्ल-ए-यार से दिल को सुकून आया हैतूने ख़्वाबों को जब से मेरे सजाया हैबयां करूँ क्या तुझे ऐ मेरे हमदमतेरे दम…
बाखुदा इल्म है कि तुम न आओगेनिशाँ क़दमों के समेटने बैठा हूँअचानक छुप गए यूँ दूर कहींदिल को एहसास दिलाने बैठा हूँ मेरी तन्हाई को आ कर संवारा तुमनेराहों को मंज़िल की तरफ मोड़ दियाहमसफ़र रहोगे साथ किया था वादाक्यों तनहा भटकने के लिए छोड़ दिया अब न गूंजती है कोई आवाज़ कानों मेंन कभी ख़त्म हो बियाबाँ सा खालीपन हैसिर्फ अंन्धेरा और आलम-ए-गर्दिश हैबर्बादी रूबरू है साथ मेरी उलझन है मौला अब दर्द बर्दाश्त नहीं होताग़म का समंदर और न पी पाउँगाख़ाक कर लुंगा मैं साँसें अपनीया ज़माने से दूर चला जाऊंगा नहीं मुमकिन जुदा तेरी याद से रहनाहै मेरे पास…
अंग्रेजी का खस्ता हाल देसी बच्चे लिखें कमालबोर्ड परीक्षा में टीचर ने बच्चों को दिया इक सूत्र बतायअंग्रेजी के पेपर में जैसे कोई निबंध लिखने को आययाद अगर तुमको न हो तो कर लेना ईश्वर को यादलिख देना तुम जोड़ तोड़कर दूसरा निबंध जो हो याद पप्पूजी ने टीचरजी का आदेश सुना खूब ध्यान लगाय‘माई बेस्ट फ्रेंड ‘ निबंध का दिया पूरी रात घोटा लगाय मगर परीक्षा में पेपर देखकर पप्पू जी का सर चकरायजब निबंध लिखने को ‘माई फादर’ के विषय पर आय पर पप्पू था अपना स्मार्ट क्योंकि गुरुमंत्र था उसके पासईश्वर को कर के प्रणाम यूँ लिखा निबंध…
अंधेरों में चलो नए दीप हम जलाएंभले न हो बात बिना बात मुस्कुराएंज्योत से ज्योत जलाते चले जाएँगीत कोई गाऐं उम्मीद नई जगाएं माना चस्पा है हर तरफ उदासीनतीजों से नहीं आस भी जरा सीबुझे हुए दिलों को कुछ तो बहलाएंगीत कोई गाऐं उम्मीद नई जगाएं ख़बरों से जुडो तो ख़बरें हैं डरातींसब ख़त्म होने को है एहसास करातींवीरानी आँखों में नए स्वप्न सजाएंगीत कोई गाऐं उम्मीद नई जगाएं नेता तो होते चोर’ मगर सब तो नहीं हैंजनता है मासूम’ पर क्या यह सही हैहम नहीं गर सच्चे क्यों आस लगाएंगीत कोई गाऐं उम्मीद नई जगाएं मैं करूँ तुम करो क्यों…
जिस पल से तू! मुझमें समाया हैकुछ नया अनोखा अद्भुतरंग मेरे जीवन में आया हैजिस पल से तू! मुझमें समाया है सोचती हूँ किसका चेहरा है तूकौन है जिससे मिलता है तूमेरे तन मेरी उम्र को महकाया हैजिस पल से तू! मुझमें समाया है इठलाती लजाती हूँ खुद सेकभी रीझ जाती हूँ खुद पेबेचैन रूह को मेरी चैन आया हैजिस पल से तू! मुझमें समाया है नन्हे पैरों से तू जब नापेगा आँगनखिल उठेगा मेरा मन और जीवनमातृत्व का नया रूप मैंने पाया हैजिस पल से तू! मुझमें समाया है तू रूप कान्हा का अंश श्री राम कासार गीता का है…
तारागण गिरि मेदिनी, ससि सूर अरु व्योमसर्व साध्य विनती सुनो जो कछु है सो ‘ओम’! कहा कहत है ‘ओम’ जो नर ईश्वर को ध्यावैंसंवरें बिगरे काज नैया भव पार लगावैं! जेहि विधि सेवित राम हनुमान दरस दिखावेंतेहि विधि होइ कल्याण अनंत वैकुण्ठ सिधारें हठ आडम्बर त्याग सूत्र सुन प्रभु भक्ति काआसक्ति मद लोभ विकार तजो निज मन का The Path of AUM The stars, the earth, the moon and the sun, the vast expanse of sky—All powers, all forces bow down, for all is born of OM, the divine cry. “OM,” it whispers truthfully to any soul who dares to…
Days were brightbefore I saw you.Nights were starry,skies wore blue.Alas! Life was wholebefore I saw you. Winters never chilled this deep,summers never seared my sleep.Rains were kind,they’d simply pour —not drown the soulas they do now, more. It was parties, laughter, late-night fun,excuses made when out past one.Loud music filled my carefree space,before your shadow took its place. I’d cook for one,I’d eat alone —never waited by the phone.And every storm had somewhere to go,before you cameand made it snow. You walked in —a blaze, a song.You walked out —now everything’s wrong. Smiles don’t land,flowers don’t bloom.Music is noise,the stars…
शीशा-ए-दिल इस कदर साफ़ हो जाएकि ज़र्रे ज़र्रे में खुदाया नज़र आये! उम्र भर दीदार को भटका किये हमगली कूचे गाँव शहर कि तू मिल जाए! जैसे चाही वैसे तेरी मूरत बनाईमगर खुद तेरे काबिल न बन पाये! जो हटी धूल और आईना साफ़ हुआबस्ती में मन की अब अक्स इक नज़र आये! ज़माना लाख कहे तू ऐसा है कि तू वैसातू जिसे चाहे वही दीदार तेरा कर पाये! शीशा-ए-दिल इस कदर साफ़ हो जाएकि ज़र्रे ज़र्रे में खुदाया नज़र आये! Let the Mirror of the Heart be Polished So PureThat in every speck, the Divine appears clear. A lifetime…
आज सुबह आफिस जाते समयअपनी गाड़ी के अंदर से मैंने देखाएक आम आदमी ऊंची सीसाईकिल पर जा रहा था ीउसके साथ उसका छोटा बच्चाआगे बैठा था जो सफर का आनंदअपने तरीके से ले रहा था ीपीछे करियर पर उसकी पत्नी बैठी थीजिसने उत्तर भारतीयदेहाती कपडे पहने थेउसकी गोदी में एक बिलकुल छोटाबच्चा गहरी नींद में सो रहा था ीउसके चेहरे पर इतनी शांति थीकि लग रहा था कि वह दुनिया केसबसे सुरक्षित और आरामदायकबिस्तर पर सो रहा होशायद अमेरिका के राष्ट्रपतिको भी वह सुकून नसीब न होगा इस तरह पूरा परिवारखुशी के सफर पर चले जा रहा था ीइधर मैं…
आम आदमी के सपने: गाड़ी है बंगला है नौकर हैं चाकर हैंनहीं कोई कमी है कोई दुःख नहीं हैIजीवन में हर पल ख़ुशी ही ख़ुशी हैनहीं कोई कमी है कोई दुःख नहीं हैI घर में हम रोटी मक्खन से खाते हैंबासमती बिरियानी घर पर पकाते हैंIमन में कोई आस अब बाक़ी नहीं हैनहीं कोई कमी है कोई दुःख नहीं हैI होली दीवाली मौज़ों से मनाते हैंपब्लिक स्कूल में बच्चे अब जाते हैंIघूमने की जगह कोई बची ही नहीं हैनहीं कोई कमी है कोई दुःख नहीं हैII आम आदमी की हकीकत नींद खुलते ही मगर हकीकत अलहैदा हैबासी रोटी पर होता…
समंदर बोतल में उतारा है हमनेबरगद गमले में उगाया है हमनेशीशे कोआईना दिखाया है हमनेहाथी से भी गन्ना छुड़ाया है हमने! तारीफ़ अपनी ज़माने से पूछो तोसूरज को शरबत पिलाया है हमने कई बार जंगल में जाकर के मित्रोन लाठी न बन्दूक थी साथ मित्रो‘बंगाल टाइगर’ हमें जब मिला हैखुदाया शहर तक भगाया है हमने तारीफ़ अपनी ज़माने से पूछो तोगीदड़ को गाँव से खदेड़ा है हमने समंदर बोतल में उतारा है हमनेबरगद गमले में उगाया है हमनेशीशे कोआईना दिखाया है हमनेहाथी से भी गन्ना छुड़ाया है हमने! तारीफ़ अपनी ज़माने से पूछो तोसूरज को शरबत पिलाया है हमने एक…
बड़ी मौज थी तुमसे मिलने से पहलेज़िन्दगी थी टशन तुमसे मिलने से पहले सर्दी की थी चिंता न गर्मी का डर थाबहारों का आलम हर सु साल भर थासभी पतझड़ों से ये दिल बेखबर थासावन न आता था इज़ाज़त से पहलेबड़ी मौज थी तुमसे मिलने से पहले यारों के संग रोज़ पार्टी मनानाबहाने बनाना घर भी लेट आनाबंद कमरे में लाउड म्यूजिक बजानासोते न थे पान खाने से पहलेबड़ी मौज थी तुमसे मिलने से पहले खाते थे खुद पकाते थे खुद हीपप्पू के ढाबे से लाते थे खुद हीबहुत तेज़ होती थी अक्ल हमारीहल थे सभी मुश्किलों के पहलेबड़ी मौज…
चल समय के रथ को मोड़ लें अतीत मेंकिताबों का बस्ता और बचपन बुलाता है!रोज़ की इस भगदड़ से बच चल बैठेंपेड़ों की छाँव हवा का झोंका बुलाता है चल समय के रथ को मोड़ लें अतीत मेंकिताबों का बस्ता और बचपन बुलाता है! छूटे मकानों में जा छिप कर बैठेंनहाएं बारिशों में बूंदों को पकड़ेंआंगन में बहते हुए तेज पानी मेंकागज की कश्ती का नर्तन बुलाता है! चल समय के रथ को मोड़ लें अतीत मेंकिताबों का बस्ता और बचपन बुलाता है! बुलाते हरे खेत बुलाती वो सरसों हैगलियां बुलातीं और आँगन बुलाता है!पीतल की थाली में गुड़ संग रोटीदूध…
You’re my Wi-Fi darling You’re my Wi-Fi darling,I’m your router dear,I only connect with you —Say yes, don’t fear Say the word, I’ll rev my bike,Spin around the world for you,Measure starlight distancesBring the sun as pillion too! Dear, when you walk by,Many dudes may go all senti—But this love offer I give youComes with lifetime warranty Our techno-love will beA futuristic tale for sure,Though love’s warranty periodMight last just three years more. Here’s a mobile, sweetie pie,Chat with me for hours,Be it email, WhatsApp, Facebook,Stay synced in love’s powers. Keep your status updated,Hope no one else you like—Let’s go…