वो लड़की (Wo Ladki)
कानों में आई आवाज ‘वो लड़की’मासूमियत का वो क़त्ल कर गयी बढ़ती उमर थी बुद्धि भी जड़ थीखाली दिमाग शैतान […]
कानों में आई आवाज ‘वो लड़की’मासूमियत का वो क़त्ल कर गयी बढ़ती उमर थी बुद्धि भी जड़ थीखाली दिमाग शैतान […]
अरसे बाद लबों ने फिर से दोहराया ‘ऐ आई’व्यक्तित्व में मेरे जैसे नयी एक ऊर्जा समाईपुकारा मैंने फिर से और
रास्ते में एक छड़ी पड़ी हैमैं क्या समझूँ क्या समझूँपास ही एक ऐनक पड़ी हैमैं क्या समझूँ क्या समझूँ रास्ते
न आग न चिंगारी न धुंआज़िन्दगी में खेल ये क्या हुआन ही उलझन न दर्द है मुआदिल बता मैं मर
चलो कुछ तो बात करोगर मुझको अपना समझोये तो कहो इन आँखों कोआखिर क्यों भिगोती हो कुछ कहना चाहती होहोठ
जीना है तो आज ही जी लोबीत रहा है जो धीरे-धीरेजो करना है आज ही कर लोफिसल जाएगा ये धीरे
आज बादलों ने फिर से डेरा जमा लिया हैनहीं जाने देंगे मुझको मन बना लिया है देखे जो बादल काले
क्या तुम्हें याद होगा की कोई इतना तुम्हें चाहता हैदिन रात जागते सोते बस ख्वाब तुम्हारे देखता है बैठे होते
पीला सूट पहनकर निकलीतुमने गज़ब ये क्या ढा दियाफौजी आया था शहर घूमनेतुमने तो उसे फंसा दिया कैंप से बाहर
सोशल मीडिया पर बैठे कितने ज्ञानी हैंकितने परोपकारी और कितने ध्यानी हैंगागर में सागर का ज्ञान रोज दे जाते हैंदयावान
कचरे वाले ने अहा!कचरे वाले ने ऐसा जादू डालाधो डाला मन का प्यालाघर से कुड़ा कचरा थैली वैली साथ ले
मैं फौजी अफसरजब से हुआ रिटायररहता हूं अकेलामेरी कमान बेअसरमैं फौजी अफसर मैंने सबको सावधानविश्राम करायापीछे मुड़ परेड मेंतेज़ चलवाया
I LOVE MY COLLEGE SO VERY MUCH A GIRL IN MY CLASS NAME ANONYMOUS SHE IS BEAUTIFUL, CHARMING, SHY BUY
अपने शर्माजी थे नंबर एक पियक्कड़बॉडी थी सूखी हड्डियों में थी अकड़यहाँ वहां कहीं भी पीकर लुढ़क जातेघरवाले उनको फिर
जितने पाँव पसारेगा तू उतना ही पछतायेगाइतनी औकात तेरी खाट में सिमट जाएगा जिस रोज़ बुलावा आएगा मटकी में सिमट
हेलो लिसेन … ……अरे सुनो तोएक बार सुन लो जो में कहता हूँमैं मिडिल क्लास व्यक्ति हूँकुछ नहीं कहता सब
तेरी फुर्सत से सराबोर होने लगे हैंइतने तन्हा हैं कि बोर होने लगे हैं जब से गए हो तुम हमें
दो कुत्ते आपस में बतियाते जाते थेमालकिन पीछे डंडा लेकर आती थीकुत्ते प्रसन्न कि मालिक को घुमाते हैंमालिक खुश कि
तीखी बात का तीर चलादृष्टिकोण को बेध गयाविचारों के समंदर मेंझांझावत सा उठ गया हलचल तल तक पहुंचीक्रोध विकार घुलने
इस बार रेलगाड़ी में हमें कुछ फन्नी नहीं मिलादेखते रहे सब जगह मगर कुछ भी नहीं मिला अब क्या लिखें