स्कूल की यादें (School Ki Yaaden)
ज़िन्दगी वैसे हर कदम सिखाती हैयाद स्कूल की अब भी लुभाती हैबचपन के दिन मोड़ ले आती हैयाद स्कूल की
ज़िन्दगी वैसे हर कदम सिखाती हैयाद स्कूल की अब भी लुभाती हैबचपन के दिन मोड़ ले आती हैयाद स्कूल की
पैंट पहना तो आंसू भर आयेमुद्दतें हो गयीं है ठुकराएजिया न लगे क्या करें हायलॉकडाउन से हम उकताए निक्कर टी-
बदलाव सिर्फ एक जुआ है अनिश्चितता का अँधा कुआँ हैनए को पकड़ो पुराना छूटे पुराना पकड़ो नया जा फिसले नए
मैं तो मासूम थी, नामालूम थी,बेचारी भूखी—मैं एक माँ थी।छल-कपट से मैं थी अनजान,बड़े पेट की भूख से परेशान।झूठे सत्कार
तुम एक सुबह छोड़ गयीमैंने सहा कुछ न कहावो कहते हैं घर अबपुराना हुआ छोड़ दोक्या कहती हो?छोड़ दूँ ?
पानी पानी कैसा पानी खारा पानी मीठा पानीगहरा पानी उथला पानी ठहरा पानी बहता पानी सावन के महीने मैं कैसे
घर बैठुंगा कल से शायर हो जाऊँगायारो मैं कल से रिटायर हो जाऊंगा ऑफिस ने रुतबा आत्मसम्मान दियारूपया प्रतिष्ठा और
रुख-ए-हवाओं की कहाँ परवाह किया करते हैंबाज़ परिंदे हौसलों से उड़ान लिया करते हैं नेकी बदी के फलसफे पर वक़्त
जग से तुमने ही मिलवायाकौन है क्या सब मुझे बतायापरमेश्वर का रूप तुझे माँदेख समझ में आया मेरी यह सामर्थ्य
कहाँ गए वो दिन जब यार फ़ोन लगाते थेवीकेंड पर साथ चाय का निमंत्रण दे जाते थे प्लानिंग में ही
ईंट गारे पत्थरों से तो मकां बना करते है, घर नहीं खिलता बचपन, जवानी की महकऔर छाँव बुढ़ापे की अगर
सदक़े ऐ अनजानी रूह इंसां को डरा दियामंगल विजयी को तूने घर में पनाह दिया भागा फिरता था मतवाला अनजाने
सुख के दिनों में जो दर्पण दिखाएरखे ज़मीन पर वह दिल की आवाज़ हैदुःख के समय में जो उम्मीद जगायेटूटने
कुछ छिन रहा, है या कुछ बनने वाला हैकुछ घट रहा है या नया कुछ घटने वाला है हो चला है
दिल ने चाहे थे फुर्सत के रात दिनलम्बी मगर यह फुर्सत जानलेवा है दरवाजे पर जो देता है दस्तक बार
खुद भूखी है परवाह नहींपरिवार को पहले खिलाती हैबच्चों की ख़ुशी में खुश होतीदुःख अपना नहीं बताती है सबसे जल्दी
न बन जाना भीड़ का हिस्साजोखिम उठाने से डरना नहींसवाल खुद के इरादों पे करना नहींभरोसा रखना बन जाना चैतन्य
तेरी नेमतों का क़र्ज़ उतारे बैठा हूँज़िन्दगी है तेरा इंतज़ार बैठा हूँ महक ज़रा तेरी साँसों कीआँखों की हया अभी
बदल रहा है मौसम मिज़ाज़ लोगों की तरहहवाएं शायद तेरे शहर से होकर गुज़री हैं ऐ तूफ़ान तेरी ताक़त का
कम बोलता हूँ पुरज़ोर नहीं मैंअंतर्मुखी मगर कमज़ोर नहीं मैं ख़ामोशी खुदा की इबादत हैकम बोलना मेरी आदत हैदलालों की