हरे भरे गुलशन में देखो नित नए नए से रंग दिखेकलियाँ कुछ फूलोंके रूप में फूल फलों में बदले सबके दिलों को खूब लुभाती सुंदरता उपवन में खिलेप्रकृति का यह स्वरूप ही मानव को भगवान लगे उन पेड़ों का क्या कहिये जो बढे मगर फल न लगेमाली ने सींचा था सबको कि सब पौधे फूलें फलें श्रम का तू ईनाम भुला दे माली फ़िक्र क्यों करता हैपरिश्रम का परिणाम सदा नहीं सुखदायी होता हैमन में रख गीता में अर्जुन को श्रीकृष्ण के प्रवचनकर्मण्येवाधिकारस्ते माँ फलेषु कदाचनः क्या हुआ तेरे कर्मों को जो पहचान नहीं मिलीकल सफलता की किरणें तुझ पर…
खुदा मिलता नहीं कभी ऐश-ओ-आरामों मेंतेरी तकलीफ में पर आगे खड़ा रहे सदा ग़मों का ग़म न कर है बड़ा ग़रीब नवाज़भला करेगा बख्श देगा तेरी हर खता है जिसका ज़िक्र मन्त्रों और आयतों मेंज़र्रा ज़र्रा तुझे देगा उसी का पता अब जो खोया है दौलतों शोहरतों में तूनहीं पायेगा मेरे परवरदिगार का पता नेक नीयत ज़ुबान साफ़ रूह पाकीज़ापाक दिल में ही रहता है वो मेरा खुदा
गए रोज़ खयालात मेरे चुपचाप थेज़िन्दगी के अजीब बड़े हालात थेगए रोज़ ख़यालात मेरे चुपचाप थे न था होश मुझे न आवाज़ दी आपनेहमने बताया भी नहीं न पूछा आपनेवर्ना दरमियाँ हज़ारों दबे सवालात थेगए रोज़ ख़यालात मेरे चुपचाप थे एक वक्त था न होते थे ज़मीं पर पैरआलम है अब न अजनबी हैं न गैरहौसले आसमानों कभी हम उस्ताद थेगए रोज़ ख़यालात मेरे चुपचाप थे बमुश्किल थामी हैं दिल की धड़कनेंसुलझाई हैं कुछ ज़िन्दगी की उलझनेंगम-ए-इश्क़ में हम वर्ना बीमार थेगए रोज़ ख़यालात मेरे चुपचाप थे मिल गए हैं जो अंजानी इस राह परकर लो शिकवा दिलों की चाह…
गोरी पियाजी के घर को चलीदुनिया किसी की बसाने चलीकितनों के अरमान ढीले हुएटुकड़े दिलों को बनाकर चली लड़कों के दिल का तस्सवुर थी वोसारे मोहल्ले की रौनक थी वोआसिक सब ता ता थैया करेंऐसी धमक बजती ढोलक थी वोजब से सजनी का रोका हुआउनकी उल्फत से धोखा हुआबैठे हैं अब सर पटकते हुएरहम ऐ खुदा रोक लो वो चली गोरी पियाजी के घर को चलीदुनिया किसी की बसाने चलीकितनों के अरमान ढीले हुएटुकड़े दिलों को बनाकर चली जोश-ऐ-जवानी फ़ना कर गयीरानी किसी और की हो गयीसेविंग्स से अपनी था पाला जिसेएफडी किसी और की बन गयीआँखों को दिन में…
ज़ज़्बात की मेरे अजी बोली न लगाओबाजार में हर चीज़ बिकाऊ नहीं होतीछोड़ दो आदत कि हर शै की है कीमतबाज़ारू फसानों में नसीहत नहीं होती में लिख रहा हूँ जो भी ये दिल की है आवाज़दिल के खालिस ज़ज़्बात हैं ये सेल नहीं हैलफ़्ज़ों में ताक़त छुपी दुनिया जहान कीशायरी एक हुनर है कोई खेल नहीं है अशआर मेरे दिल के मैं बेचूंगा किसी रोज़बिक रहेगी जिस रोज़ ममता दूकान मेंफूलों की महक ताज़ी हवा मोल मिलेगीइंसानियत पर दांव लगेगा बाज़ार में मेरी कलम से फुट चले हैं दिल के जो नालेबेकार नहीं जाएगा इन झरनों का बहनादे कर…
दिन दिवाली का हो दीपक तुम्हाराघर किसी और का तो क्या बात हैथोड़ी मिठाई नए कुछ कपड़ेबालक गरीब का तो क्या बात है हज़ारों रुपये हम पटाखों में फूंकेंआब-ओ-हवा को दूषित करेंकूड़े करकट से कुल धरती अटी हैसफाई कर्मचारी बेबस रहेंप्रकृति माँ का भला तनिक सोचेंपटाखों से हो तौबा तो क्या बात हैघर की सफाई तो सभी करते हैशहर साफ़ रखें तो क्या बात है दिन दिवाली का हो दीपक तुम्हाराघर किसी और का तो क्या बात हैथोड़ी मिठाई नए कुछ कपड़ेबालक गरीब का तो क्या बात है सच्ची ख़ुशी का मन्त्र है यह सुन लोयूँ ही किसी एक मुफ़लिस को चुन लोखाना खिलाओ …
तन्हाईयों के महल में रहते हैं वो याद बनकरकभी रहते थे दुआओं में जो फ़रियाद बनकर वो था मंज़र फुर्सतों का ये हकीकतों का दौर हैवक्त गुज़र चुका है अब हमसफर कोई और है हर शै है हासिल और सब अपने हैं साथतन्हाई में मगर रूबरू आ जाते हैं आप ज़माना गुज़र गया है उम्र दराज हो गयी हैगुज़रे लम्हों की यादें ताज़ा और नई हैं जहाँ में कहीं भी हों वो खुश रहें आबाद रहेंइल्तिज़ा है मेरी यादों के ताज महल में रहें
धरती के विशाल सीने में कहीं एक हलचल हुईबीज फूटा कुछ बिखरा और आवाज़ चटक हुई एक नन्हे से पौधे ने चीर डाला धरती का सीनाकिसी की मेहनत खिली और रंग लाया पसीना अंगड़ाई लेकर वह बढ़ चला आसमां की ओरक्या जोश क्या उमंग ज़माने ने देखा उस ओर देखे सपने कि देगा छाँव, लकड़ी और फल भीलगने लगी बोली उसकी नस नस रग रग की अपनी कीमत जानकर वह पौधा भी हैरान हैदुनिया में उसकी इतनी बड़ी पहचान है घायल धरती का कोना जिसमें घाव लगावह बीज जो पौधे के अस्तित्व में मर मिटा माली जिसने इस यथार्थ को…
A B से जब कुछ कहता है B दोहराता है C सेC A जब बन जाता है तो फैले बात बड़ी तेजी से बातों ही बातों में सारा शहर बन जाता A और Cक्योंकि भेड़चाल में आसानी से मिल जाते हैं B रफ्ता रफ्ता शहर का माहौल उग्र हो उठता हैहर शख्स होकर इंक़लाबी मशाल थाम लेता है फूंक डालता है अपने भारत की संपत्ति कोजला डालता बसें आशियाने और प्रगति को फिर भी जी न भरे तो चढ़ जाता है धरने परपीछे चलती भीड़ अंधी जो आमादा है मरने पर दूर बैठकर कहीं XYZ हसते जश्न मनाते हैंलड़ा कर जन…
पेड़ मैं नीम का उग आया एक मकां के दरवाज़े परकिसी जोड़े ने मुझको सींचा और दी मैंने छाँव घर पर मेरी आँखों ने देखा कई पीढ़ियों को बनते बिगड़तेबढे वो साथ साथ सुख दुःख में भी साथ साथ रहते बुजुर्गों ने रखा मुझसे रिश्ता जैसे था मैं हिस्सा घर कामेरी छाँव में बैठ पीते हुक्का लेते फैसला हर तरह का मगर पिछले हफ्ते नयी पीढ़ी ले आयी घर में नई सोचबाँट दिए बूजुर्ग कई हिस्सों में घर भी बिकेगा एक रोज़ मैं भी बाहर खड़ा कहीं उनकी निगाहों में खटक रहा हूँमहँगी गाडी के रस्ते का रोड़ा बना हूँ…
हज़ारों चेहरों के दरमियाँ इंसां इक सगा होता हैबनकर के जो खास दिल के नगर में जगह लेता है कैसे कोई मन ही मन सपनों के महल सजा लेता हैबना कर किसी को देवता मन मंदिर में बिठा लेता है बढ़ती रहती है ज़िन्दगी और बदलती है ज़िन्दगीसाथी मन का मगर मन मंदिर में बसा रहता है गुज़रते वक्त के साथ हर चीज़ पुरानी होती हैसपनों का साथी मगर हर वक्त जवां रहता है यार मिलते हैं बिछड़ते है रिश्ते और नए बनते हैंआखिरी सांस तक वह शख्स अपना बना रहता है किसी के मन मंदिर में तुम भी घर…
हंसकर यूँ ज़ज़्बात छुपाते क्यूँ होअंदाज़ की तल्खी को दबाते क्यूँ होखफा हो तुम जो तो कह दो हमसेयूँ नज़र फेर हमको जलाते क्यूँ हो ज़िन्दगी खेल है तुम ऐसे जिया करते थेहर इक लम्हे को क्या खूब जिया करते थेदर्द किसका है कहो बात बनाते क्यूँ हो हंसकर यूँ ज़ज़्बात छुपाते क्यूँ होअंदाज़ की तल्खी को दबाते क्यूँ होखफा हो तुम जो तो कह दो हमसेयूँ नज़र फेर हमको जलाते क्यूँ हो हाल-ए-दिल बातों बातों में निकल जाने दोआँखों से दिल के ज़ख्मों को बह जाने दोमैं कोई गैर हूँ ये एहसास दिलाते क्यूँ हो हंसकर यूँ ज़ज़्बात छुपाते…
कोशिशें तमाम बेकार हुईंजेहन की पशोपेश मगर हार हुईख़्वाबों को बेइंतेहा दौड़ायाहुनर चुन चुन लफ्ज़ ले लायाकोई तक़रीर न उतरी मगर कागज़ परजेहन गया तभी यादों की चाबुक परतन्हाई के ज़ख्म कुछ गहरे हुएदर्द बह निकले जो थे ठहरे हुएबूंद बूंद लहू गिरा चाहत कादिल रोया जो भरता था दम राहत काकुछ था भीतर जो पिघल गयाबन के नगमा मेरी यादों से निकल गया When Words Wouldn’t Come All efforts fell silent,The mind wrestled but met its defeat.Dreams were chased with endless hunger,I gathered words with delicate precision—But no speech would settle on the page. My thoughts slipped—Whipped back into…
फलक से तारे लाना चाहता हूँ तुम्हें मंज़ूर हो तोचाँद पर घर बनाना चाहता हूँ अगर मंज़ूर हो तो तुम्हारे गेसुओं की स्याही ले कर रात उतरीनूर-ऐ-नज़र से बहकी फ़िज़ा है और निखरीनूर-ऐ-नज़र से बहकी फ़िज़ा है और निखरीज़रा काजल चुराना चाहता हूँ तुम्हें मंज़ूर हो तोलबों पे शेर पढ़ना चाहता हूँ अगर मंज़ूर हो तो फलक से तारे लाना चाहता हूँ तुम्हें मंज़ूर हो तोचाँद पर घर बनाना चाहता अगर मंज़ूर हो तो तुम्हारी हर अदा पर आह भरते इश्क़ वालेबहुत होंगे नज़र और गेसुओं पर मरनेवालेबहुत होंगे नज़र और गेसुओं पर मरनेवालेकलम सर मैं कराना चाहता हूँ तुम्हें…
ज़ुल्म का अत्याचारकरता जाता नरसंघाररोता विश्व ज़ार ज़ारसरकारें लाचारघोर हाहाकारसुन चीख पुकारसर होता खून सवार पुलिस लाचारकानूनी तक़रारमात्र रुदन अपारपापियों की जयकारन्याया व्यवस्था बीमारसंशय संदेह की भरमारराष्ट्र संपत्ति धुआधारआखिर कौन ज़िम्मेवार तूतू मैंमैं का प्रचारमीडिया कारोबारकर्त्तव्य रहा हारअधिकार की पुकारदेश पर गर हो वारतो किसका सारोकार बंद करो दुष्प्रचारजो ये झगडे हज़ारहै बस यही सूत्रधारमत लड़ो निराधारभारत बने एक परिवार The Roar of Injustice Tyranny unleashed,Slaughtering innocence,The world weeps—Governments stand helpless,Chaos echoes,Cries flood the sky,Blood boils over reason. The law is handcuffed,Justice tangled in debate,Only grief floods the gates,While the sinners are hailed,Our system lies diseased,Doubt and suspicion reign,Nation’s wealth…
मौत ने फिर चाल चली कोई गुज़र गयाऔर एक बेचारा हसरतों में हो दफन गया चाँद छूने के तो नहीं देखे थे उसने ख्वाबपर कम मिला जो मिला इसी सोच में गया दुनिया की दौड़ में न जब उठ सके उसके पैरकोई हाथ थाम लो.कह गला उसका भर गया दोस्त सब अपने थे मगर मतलब के थे यारबर्बाद उस शख्स को यह पतझड़ कर गया रिश्ता मेरा कोई ख़ास न था बदनसीब के साथगयी रात मगर मैं बोझ लिए दिल पे घर गया अब हसेगा न उस पर न बनेगी कोई बातखुद पर तंज़ करने वालों का मुंह बंद कर…
छोटी खुशियों में छुपी बड़ी बड़ी बातें हैंघर में सब अपनों मिली ये सौगातें हैंखुशियों का टोकरा हम भर लाते हैंशादी की सालगिरह की पार्टी मनाते हैं लम्बे समय बाद यह मौका आया हैसभी अपनों को घर हमने बुलाया हैझूमने का अवसर चलो नाचते गाते हैंशादी की सालगिरह की पार्टी मनाते हैं घर की रसोई में बने नए पकवान हैंनए कपडे फूलमाला बढ़ा रहे शान हैंरौशनी से सारे घर को जगमगाते हैंशादी की सालगिरह की पार्टी मनाते हैं खुशियाँ के मेले सदियों तक लगे रहेंरिश्ते की डोरी में हम यूँ ही बंधे रहेंसंग जीने मरने का वचन दोहराते हैंशादी की…
माफ़िक़ न सही हर रिश्ता निभाया है हमनेगैर ज़माना हुआ मगर साथ निभाया है हमने आसान राहों से लोग छू लेते हैं आसमानफ़र्ज़ की ज़मीं पर आशियाँ सजाया है हमने लड़खड़ाए कभी गिरे मगर फिर चल दिएज़िन्दगी तेरा हर क़र्ज़ चुकाया है हमने खुदा के वास्ते न करो ज़िक्र-ए-मंज़िल हमसेबाकायदा राहों को मंज़िल बनाया है हमने कोई तो बात है ज़िक्र अपना है हर ज़बान परचराग रोशन रहें घर अपना जलाया है हमने Not Perfect, But True Every bond, though flawed, I held till the end,Though the world turned stranger—still, I remained a friend. Some touch the sky on paths…
भारत की बेटी यह भारत की बेटीभाग्य देखो कैसे कैसे लाती है बेटी लाल बत्ती पर फटे मैले कपड़ों मेंनाचती है करतब दिखाती है बेटी कच्ची उम्र से ही कलाबाज़ी खातीलोहे के रिंग से गुजर जाती बेटी इतिहास के खेलों को रख रही ज़िंदारजवाड़ों नवाबों की विरासत है बेटी स्कूल न पढ़ाई बचपन के खेल नहींघर का बोझ कांधों पर ढोती है बेटी घर पर भी माँ के काम काज बंटातीछोटे भाई बहन को खिलाती है बेटी माँ बापू मज़दूरी में मज़बूर रहते हैंचार पैसे घर में कमा लाती बेटी ब्याहने के बाद ससुराल और नैहरदो घरों की परंपरा में…
किसने फेंका है ठहरे पानी में पत्थरहवा को बांधने की ज़ुर्रत की हैकौन उजाड़ रहा है घरोंदे चिड़ियों केपरिंदों को डराने की साज़िश की है कमज़ोर नहीं हिन्द का चैन-ओ-अमनसदियों की रवायतें इसमें शामिल हैंनफरतों की आग में जो सेक रहे रोटीन तो वो हिन्दू हैं न ही मुस्लिम हैं फिर किसकी शै पर है ये फिरकापरस्तीजेहन में ज़हर भरने की हिमाकत की हैइंसानी चेहरों के पीछे किन शैतानों नेसदियों को साल बताने की कोशिश की है किस पर इलज़ाम दें किससे करें शिकवाशहर में काला पानी बरसा जो बीती रातहसरतों से लगाए दरख़्त सब ढह गएखाने को बचे सिर्फ…