चले आओ रेणुका जी (Chale Aao Renukaji)
धरती पर एक स्वर्ग का टुकड़ा चाहो जो देखना जीइस छुट्टी में घर मत बैठो चले आओ रेणुका जीदेवभूमि हिमाचल […]
धरती पर एक स्वर्ग का टुकड़ा चाहो जो देखना जीइस छुट्टी में घर मत बैठो चले आओ रेणुका जीदेवभूमि हिमाचल […]
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भावों की गीली मिटटी में फिर खिल उठी निराली कवितानवजीवन की नव उमंग भर नित नव स्वप्न दिखाती कविता सोंधी
जान देकर भी न हासिल हुए रिश्तेक़ब्र उसकी कहीं बेहतर निकली ख़ैर-ख़्वाह सब एक हाथ दूर थेजिस जगह बेकस की
तारीफों के पुल पर मुझको कितना रोज़ चढ़ाते होपरिचय मुझसे मेरा तुम हर दिन नया कराते होसुध बुध खो जाती
माँ मुझ पर उपकार तुम्हारा जग में जो मुझको लाईममता की छाया में रखकर दुनिया मेरी स्वर्ग बनाईबस इतनी अभिलाषाहै
रूबरू तुम हो एहसास जानलेवा हैछू लिया है देखो, क़यामत हो गयी हैछू लिया है देखो, क़यामत हो गयी हैरूबरू
तुम हो, हूँ मैं भी यहींदरमियाँ दोनों के मगरकुछ भी अब बाकी नहींसच तो है और फ़िक्र भीतेरे अफसानों में
दुनिया यह छोटी सीछोटी सी दुनिया मेंहर तरफ नज़र आतेचेहरे ही चेहरे निकलो गर घर सेपढ़ने लगो चेहरेइंसां की फितरतबयां
मैले कुचले से कपड़ों मेंस्वेदग्रस्त हो यह प्राणीजीवन है संघर्ष सिखातारिक्शेवाला सीख पुरानी रुपये चंद कमाने कोघर बार छोड़ कर
कविता लिख कवि मरा फैन मिला न कोयबस्ती है गंजेन की कवि कंघी करे न कोय पोथी पढ़ जग मुआ पंडित भया
यह ज़मीं भी न थी न था आसमान येन दरिया समंदर खूबसूरत जहाँ येन इंन्सां की हस्ती न जंगल जिनावरबला
क्या उलझन है मायूसी क्योंजो होगा हो जाने दो बेचैनी क्यों कल की चिंता में पड़ कर तुमक्यों हो अपना
लम्बा यह दौर था जीवन की राह मेंउड़ चलेगा कल तू नयी मंज़िल की चाह मेंसाथी यहां जो बने यहीं
कौन ले गया लिखने का हुनर मेरातसव्वुर का गहरा समंदर मेरा में नहीं कोई बदनाम शायरन खायी चोट उल्फत में
मतवाला दिल सोचता हैजिस पल होगा अपना मिलनतुम फैलाकर अपना दामनथाम लोगी दिल की धड़कन जब से होश सम्भाला हैतुमसे
पल पल तुम्हें बुलाये मेरी कवितादिल धड़काये लजाये मेरी कवितादेती राहत यह सूने हर मन कोइत्र सी मन में समाये
सुना है तेरे शहर में अदा से मिलते हैं लोगदिल मिले न मिलें फिर भी मिलते हैं लोगबंद दरवाज़े बयां
वक्त है बदल रहा और रास्ते अनजानपुकारता हूँ तुम्हें कि बानगी मिलती रहेमंज़िलों की राह पर कारवाँ बढ़ते चलेंदीप मैं