रात बरसात की (Raat Barsaat Ki)
कल की बारिश में हुई एक शरारत ने फिरदिल के वीरां तसव्वुर को आबाद कियाटूटी छतरी लिए बूंदों में भीगतीएक
कल की बारिश में हुई एक शरारत ने फिरदिल के वीरां तसव्वुर को आबाद कियाटूटी छतरी लिए बूंदों में भीगतीएक
निज दुःख दीखत नहीं परसुख दुःख दे जायखुद को लाभ गिने नहीं ख़ुशी परायी सताय भारत भूमि धन्य है घर
मिटटी में दबी गुठली में सेआम का एक नन्हा पौधादेख रहा था मुझे टुकुर टुकुरअलग से एक वीरान मेंमैंने कहा
हे ब्रह्मदेव मुझे दो वरदानहिरण्यकश्यपु को दो अमरत्व दानमेरा यदि हो मृत्युदातान हो कोई मनुष्य न कोई देवन निर्जीव कोई
बिना बेगम के बादशाहबहुत अकेला महसूस करता था बेगम का इंतकाल हुएबरसों बीत गए थेबादशाह का एक बेटा था, शादीशुदाजो
चाँद आज कुछ ठीक थाचांदनी के संग घर में मौजूद थाचेहरे पर चोटों के निशान लिएमायूस बैठा था मगर ठीक
नए फूलों को सौंप चमन की ज़िम्मेवारीमाली करो नयी बसंत ऋतु की तैयारी कलियाँ हैं कोमल इनको खिलने दोबढ़ना सबका
पिताजी बार बारकहते कहते मर गएप्रतिभाशाली बनो प्रतिभाशाली बनोप्रतिभाशाली बनो पिताजी मर गएपर उनके वे शब्द सदाउसके कानों में गूंजते
मैया मोरी! ऑटोवाला मोहे न बिठायेआना घर मोहे इंद्रपुरी कहेइंद्रलोक को जाएमैया मोरी ऑटोवाला मोहे न बिठाये बस स्टॉप पर
ये जो तेरी ज़ुल्फ़ बारहा पेशानी पर आ गिरती हैमालूम होता है गिलहरी कोई दाना तलाशती है मिल जाती हैं
सोने को बेला मंगाऊं मेरे राजाबेला में खीर खवाऊं मेरे राजासोने को बेला मंगाऊं मेरे राजा खावत खावत जो प्यास
ज़िंदा हो! तो ज़िन्दगी दिखनी चाहिएहोठो पर हर वक्त हंसी खिलनी चाहिएउतार फेंको चलो यह बुत सा चेहराअरे! दर्द को
‘कल्पना’अब बड़ी हो गयी हैबचपन से ही उसेबड़े लाड प्यार से पाला है वह अगर गिर जाती या फिरज़रा सी
बड़ों से सीख मिली थी बचपन में “अच्छे बच्चे हो सुबह जल्दी उठो भगवान् में विश्वास रखो पुण्य करो ईमानदार
गाय जगत की माता है पता है मगर अबपिता से भी अधिक अड़ियल हो गयी हैसड़क अगर घेर ले तो
‘राज’ और ‘शास्त्र’ दो दोस्त हैं‘नीति’ ‘राज़’ की सौतेली बहन है‘शिक्षा’ ‘शास्त्र’ की पड़ोसन हैऔर ‘नीति’ की बाल सखी है
ब्रांडेड का चलन आज आम हैब्रांडेड ही सर्दी और जुकाम है धागा लोकल कपड़े ब्रांडेड हैंगाय लोकल है दूध ब्रांडेड
जिस्म में एक सौ छह हड्डियां एकसाथ टूटने का दर्द मैं नहीं जानता मगरदो सौ सत्तर रातें अनजाने किसी डर
जांबाज़ दुनिया में होंगे बहुतदिलवाला जांबाज़ देखा नहींअर्जन सिंह जैसा योद्धा खिलाड़ीऔर नेकदिल इंसान देखा नहीं पढ़ाई में अव्वल खेलों