• ज़िन्दगी की सरसराहट...

    जय जवान जय किसान (Jay Jawaan Jay Kisaan)

    गरीब किसान का बेटा था मैं मेरा भी परिवार थामजबूरी में बचपन बीता कर्जे में घर बार था दो बहनों का मैं भाई जैसे तैसे करी पढ़ाईआगे पढ़ने का मन था पर खर्चे की किल्लत आयीबापू की लाचारी आगे दो बहनों की थी शादीऊपर से हो जाती अक्सर फसलों की बर्बादीकभी कभी तो दाल रोटी का खाना भी मुहाल थागरीब किसान का बेटा था मैं मेरा भी परिवार था एक दिन गाँव में दौड़ लगी सेना में भर्ती निकलीसब दौड़े मैं भी दौड़ा और सफलता अर्जित कीभाग्य का साथ मिला आगे तो मैं भी सैनिक बन गयाघर में मानो खुशियों…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    मन का बालक (Man Ka Balak)

    मेरे मन का नन्हा बालक तुमको माँ हर वक़्त बुलायेचली गयी तुम कौन  जहाँ में किससे पूछूं कौन बताये चल नहीं पाता हाथ पकड़कर तुम जो न पैंया चलवातीगिर जाता जब भी मैं माँ गोदी में प्यार से मुझे खिलातीदौड़ दौड़ अब पाँव थके हैं कोई मुझे न अब बहलाये मेरे मन का नन्हा बालक तुमको माँ हर वक़्त बुलायेचली गयी तुम कौन जहाँ में किससे पूछूं कौन बताये मेरी छोटी जीत पर भी माँ तुम थी कितनी खुश हो जातीहारा जब भी किस्मत से हिम्मत मेरी तुम थी बढातीजीवन से फिर हार रहा हूँ ढांढस मुझको कौन बंधाये मेरे…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    नियम व शर्तें लागू (Niyam va Sharten Laagoo)

    सेल्समेन पेशा है मेरा जबसे मैंने तुमको देखादिल तुम पर आया है, पर नियम व शर्तें लागू प्यार तुम्ही से करता हूँ और जां भी दे सकता हूँमैं हूँ तुम्हारा, पर नियम व शर्तें लागू मम्मी पापा जां हैं मेरी जो हो जाओ ईमान से मेरीछोड़ दूँ इनको, पर नियम व शर्तें लागू प्यार मेरा आज़मा कर देखो नहीं पसंद तो वापस कर दोपंद्रह दिन के अंदर, रिटर्न पालिसी लागू तुमको जो इक़रार अगर है करो दस्तखत फॉर्म इधर हैहो जायेंगे सब नियम व शर्तें लागू लड़की बोली फॉर्म उठाओ ऑफर कोई और बताओमैं इंडियन हूँ, आइटम कोई और दिखाओ…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    हमारा प्यारा देश (Hamara Pyara Desh)

    हमारा प्यारा देश भारत भारत का तिरंगा प्यारासुन्दर रूप इसका बड़ा प्यारा लगता हैभिन्न धर्म भिन्न भाषा भिन्न सबकी वेशभूषासदियों की संस्कृति प्यारी लगती है मेरा गाँव मेरा देश चूल्हा चौका बर्तनलीपा हुआ आँगन बड़ा प्यारा लगता हैसरसों की पीली फसल हरे लहलहाते खेतफूलों की वो क्यारी बड़ी प्यारी लगती है सर्द ऋतू नरम धूप ममता सम मीठी लगेदौर वो रजाईयों का प्यारा लगता हैगर्मियों के जलते हुए सूरज की तपिश मेंमटके वाली कुल्फी बड़ी प्यारी लगती है काले घन शीतल हवा बूंदों की सुहानी झड़ीमस्त सावन का महीना प्यारा लगता हैपहली बारिशों की बूंद तपी धरती पर गिरेमहक मनभावन…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    कायर (Kayar)

    होगा तू कहीं का आतंकी जो भी हो मंसूबा तेराकायर की तरह छिपकर चोरी से आता क्या ईमान तेरा रात के घोर अँधेरे में तू वार निहत्थों पर करताहथियार के बल है दुस्साहस वर्ना तुझसे ठेंगा डरतामासूमों की आड़ में छिप बैठा छद्म खेल तू खेल रहाचूहे की मौत मरेगा एक दिन अंत भी तुझसे खेल रहामेरे देश की मिटटी लगा माथे पर हो उद्धार तेरा होगा तू कहीं का आतंकी जो भी हो मंसूबा तेराकायर की तरह छिपकर चोरी से आता क्या ईमान तेरा तुझसे पहले भी कई कायर आये और आकर लटक गएतुझे उन लोगों की शै है…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    पति परमेश्वर (Pati Parmeshwar)

    असंख्य देवी देवताओं वाला देश है भारत देशदेवी देवताओं के ऊपर है ईश्वरईश्वर से भी ऊपर हैं परमेशवरजिन्हें पाने के लिए देवता और ईश्वर कोकितनी ही परीक्षाओं, तपस्याओं औरत्याग से गुजरना पड़ता है इसी तरह पृथ्वी पर भी एक परमेश्वर हैंजिन्हे पाने के लिए स्त्री जाति को कईपरीक्षाओं और तपस्याओं सेगुज़ारना पड़ता हैये हैं पति परमेश्वर अगर भारत देश में आपने लड़के के रूप मेंजन्म लिया है तो बिना ज्ञान प्राप्ति, त्याग एवंतपस्या किये बिना अवश्य हीपति परमेश्वर तो बन ही जाओगेआपको यह अधिकार भी मिल जाएगाकी किसी भी महिला पर फब्तियां कसने,अपमान करने का यहां तक किउसे बेइज़्ज़त करने…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    कब सुधरोगे मीडिया (Kab Sudhroge Media)

    चौथा स्तम्भ हो तुम गणतंत्र केतुम हो शान-ऐ-इंडिया !कब सुधरोगे मीडिया ? आधे घंटे क़ी न्यूज़ के बीच मेंबीस मिनट तुम एड दिखातेउस पर तुर्रा एक न्यूज़ कोकई कई हो बार दिखातेये है शान-ऐ-इंडिया !कब सुधरोगे मीडिया ? मनघडंत घटना दिखलाकरअंधभक्ति का भाव जगातेहिंसा और रोमांच के द्वाराकोरी सनसनी तुम फैलातेवाह रे शान-ऐ-इंडिया !कब सुधरोगे मीडिया ? भड़काऊ मुद्दे उछालकरबड़ी बहस का ढोंग रचातेबद्तमीज सी पंचायत मेंअपनी ढपली तुम बजवातेओय होय शान-ऐ-इंडिया !कब सुधरोगे मीडिया ? जनता जिनको भूलना चाहेगढ़े हुए तुम रहस्य दिखातेप्राइवेसी क़ी वाट लगा दीकेवल टॉयलेट ही बच पातेकैसी शान-ऐ-इंडियाकब सुधरोगे मीडिया सांठगांठ गुंडों से करकेइंटरव्यू उनसे…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    मैं हूँ भारत माता (Main Hun Bharat Mata)

    मैं हूँ भारत माता मेरे बच्चे कई करोड़ये हैं मेरी ताक़त रोकेंगे हर हमला आज भले हों नशे में सोयेखुदगर्जी मस्ती में खोयेजागेंगे एक रोज तो रोकेंगे हर हमला जात पात में खून बहातेभ्रष्टाचार में धन उड़ातेनिकलेंगे दलदल से फिर रोकेंगे हर हमला कालेधन की शान दिखातेमंदिर मस्जिद पर लड़ जातेसुधरेंगे एक रोज तो रोकेंगे हर हमला देश पर हो जब संकट भारीसैनिक की बस जिम्मेदारीरखेंगे सरोकार तो फिर रोकेंगे हर हमला नेता संसद चलने न देंजब देखो धरने पर बैठेंबदलेंगे शायद एक दिन तो रोकेंगे हर हमला चार निठल्लों को बैठाकरऊल जुलूल बस करातेमीडिया होगी ठीक तो रोकेंगे हर…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    नववर्ष (Navvarsh)

    मैं भी मैं हूँ तुम तुम हो फिर अलग उमंग मन में क्यों हैनए साल में हर शै दिल को नई नई लगती क्यों है कल ही की तो बात है जब यार साथ हम बैठे थेगए साल की पिछली रात में जश्न मनाकर लौटे थेआज आखिर क्या बदल गया है धुप अधिक उजली क्यों हैनए साल में हर शै दिल को नई नई लगती क्यों है लोगों के चेहरों पर देखो रौनक प्यारी दिखती हैपेड़ों और फूलों पर भी बेहतर खुशहाली दिखती हैआँखों की रंगत आखिर बदली बदली सी क्यों हैनए साल में हर शै दिल को नई नई…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    अलविदा गतवर्ष

    कुछ खट्टी मीठी यादें दे यह वर्ष इतिहास में लौट चलानववर्ष की खुमारी में गतवर्ष अलविदा बोल चला कुछ ख्वाब हमारे पूर्ण हुए कुछ काम अधूरे बाकी हैंकुछ नए यार आगे होंगे पर बिछड़ गए कुछ साथी हैंनयी उमीदें नए स्वप्न मन में जगा कर लौट चलानववर्ष की खुमारी में गतवर्ष अलविदा बोल चला सही काम को जारी रख जो ग़लत हुए उन्हें सही करोनए साल से ऊर्जा ले तुम कर्मवीर बन कर उभरोकल का दिन मुट्ठी में है दे कर के भरोसा दौड़ चलानववर्ष की खुमारी में गतवर्ष अलविदा बोल चला चलो यार मिलकर बैठें हम नाचें गाएं जश्न…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    क्यों गुरुर कैसा गुरुर (Kyon Guroor Kaisa Guroor)

    आये थे हम खाली हाथजाना भी है खाली हाथतो क्यों गुरूर कैसा गुरुरजीवन से पाया सब कुछमुट्ठी खाली जीवन के बादतो क्यों गुरूर कैसा गुरुर हद से ज़्यादा तुझे मिलाहवस के पीछे पागल हैगहने जेवर बंगले गाड़ी बेईमानी की बदौलत हैंतू हाथ मले रह जाएगाऔलाद बैठकर खायेगीतो क्यों गुरूर कैसा गुरुर सेवा की खातिर था बिठाया तू मालिक बनकर बैठ गयाअपने ही आका के सर परतू बन तलवार लटक गयाभ्रष्ट सभी हथकंडे पगले सब यहीं धरे रह जाएंगेतो क्यों गुरूर कैसा गुरुर नीयत खुद तेरी ठीक नहींकमी गिनाता तू औरों कीकाम थे तूने गलत कियेक्यों ज़िम्मेवारी औरों कीदुष्कर्म सभी तेरे…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    Humanity First

    अनरवत बहती दुनिया मेंएक अमिट छाप अपनी भी होइतिहास के पन्नों में दाखिलकुछ भले कार्य अपने भी हों वह जीवन भी क्या जीयन हैआये जग में और चले गएजो हाथ भलाई को उठेंदो हाथ उनमें अपने भी हों मानव रुप में जन्म लियामानव हित के हम काम करेंतेरे कर से अपने ही नहींपूर्ण और सपने भी हों गांधीजी का सारा जीवनपरमारथ की गाथा है‘पीर पराई जाने रे’जैसे उद्देश्य अपने भी हों सुबह शाम माला जपतेईश्वर के दरस न पाते तुममानव सेवा माधव सेवानारायण तुम अपने ही हो अनरवत बहती दुनिया मेंएक अमिट छाप अपनी भी होइतिहास के पन्नों में दाखिलशुभ…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    भारतीय रेल (Bharteeya Rail)

    भारतीय रेल की स्लीपर सीट सर्दी में ग़दर मचाय रहीकम्बल में जकड़ी बॉडी है पर ठंड में कर हाय हाय रही फ्रंट सीट पर सोयी हसीना करवट ले अकुलाय  रहीफैसन में कपडे भूल आयी अब सर्दी लगे पछताय रही अपटूडेट अच्छे घर की मोबाइल पे इंग्लिश झाड़ रहीसुनने वाले की इज़्ज़त अंग्रेजी  में ही वह उतार रही रात के सन्नाटे में ट्रैन पटरी पर दौड़ी जाय रहीदेख मेम को सो गए हम बड़े जोर नींद हमें आय रही नींद में हाथ जो छुआ एक लगा गोरी हमें जगाय रही‘टिकट दिखा’ आवाज कान में टीटी जी की आय रही भोर भई…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    हमारे बाबूजी (Hamaare Babooji)

    कई कमरों का घर रहते जिसमें थे हम और बाबूजीकठिन परिश्रम से सींचा करते जिसको माँ बाबूजी अंतिम दौर में सिमट गए पर खुद ही खुद में बाबूजीरखते दिल की दिल में थे कहते न किसी से बाबूजी एक समय था जब कि बोलते हँसते थे सबसे बाबूजीबच्चों संग शतरंज छुट्टियों में थे खेला करते बाबूजी भोर हुए स्नान ध्यान थे सिखाते हमको बाबूजीमाँ खाना दे देती तब हम सबको थे पढ़ाते बाबूजी प्यार समक्ष वैसे तो न थे कभी जताते बाबूजीजाना होता कहीं तो दूर तक छोड़ने आते बाबूजी माँ गुजरी जब रोये बहुत थे फूट पड़े थे बाबूजीमाँ…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    फुर्सत (Fursat)

    कभी फुर्सत में जब बैठे सिलसिले पास आ बैठेलौट आये हंसी लम्हेजो बिताये संग यादों के ज़िक्र छेड़ा फिर होले से मचलती इन हवाओं नेदास्ताँ अपने रिश्ते की जब महकी थी फ़िज़ाओं में तुम्हें मिलने से पहले याद आता है वो आलमजब हमसे दूर होता था बहारों का हंसी मौसम बेसबब ही लगता था सुबह की धुप का आनाबेअसर चमन में खिलती कलियों का मुस्कानाझलक पाने को एक तेरी हमारा इंतज़ार करनानज़र हम पर कब हो तेरी बस यही सोचते रहना तसव्वुर में हमारे तेरा वो तस्वीर बन आनातेरे मिलने से जैसे हो किसी ज़न्नत का मिल जाना आज भी साथ तुम…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    मोहे प्रीत सिखलाय गया (Mohe Preet Sikhlaay gaya)

    पनघट पर घेरि के श्याम सुन्दर मोहे मुरली मधुर सुनाय गया कजरारे नयन चंचल चितवन मोहे अपने ही रंग रँगाय गया सखी सोई सपनों में खोई मैं अखियन सों नींद उड़ाय गया तितली सम उड़त रहूं बन बन तन मन उमंग जगाय गया ऋतु सावन मधुर सुहानी लगे बन बदरा जल बरसाय गया चितवन की आभ लई मोरी मुख से चुनरी सरकाय गया चन्दन संग लिपटे भुजंग ज्यों उर मोहे कान्हा लगाय गया निस दिन छलिया का नाम जपूँ अंतर्मन मोरे समाय गया कान्हा संग प्रीत लगी  मोरी जिनके संग हार सिंगार गया प्रेम के बस ढाई आखर सुध बुध तन…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    वडा पाव- दिल्ली की चाट (Vada-Paav Dilli Ki Chaat)

    एकिच घडी में अपुन के भेजे का घंटाल बजा गेली तूअच्छा खासा था बंदा अपुन बन्दे की वाट लगा गेली तूमुंबई के निपट टपोरी को नज़रों के जाम पिला गेली तूजानी लिवर बन फिरता था उसको सलमान बना गेली तू ठीक ठाक अपुन का लाइफ था बिंदास बड़ा स्टाइल थाइश्क़ में येड़ा बनने को अरे किधर अपुन पे टाइम थापम्मी आंटी की मैरिज में काएको रूमाल गिरा गेली तूदिल थाम अपुन बैठेला है दिल को करेंट लगा गेली तू तू डांस बड़ा कररेली थी और फोटो भोत खिचा रेली थीभाई के दिल में तेरी उल्फत बुमाबोम शोर मचा रेली थीजेंटलमैन…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    एक जश्न (Ek Jashn)

    मनाओ जश्न कि कोई मर गयाकिसी के लिए जगह खाली कर गयाकिसी को मगर सवाली कर गयामनाओ जश्न कि कोई मर गया काँधे पे था बोझ बोझ उसके शरीर काबोझ अपनों का और परायी पीर काहर तरह के बोझ से हो फारिग गयामनाओ जश्न कि कोई मर गया भटकन थी उसके जीवन की राह मेंकभी दोस्ती कभी दिल की चाह मेंकिसी की उल्फत में फ़ना होकर गयामनाओ जश्न कि कोई मर गया ज़िन्दगी थी बेवफा देखो देगा दियामौत की सच्ची वफ़ा में वो चल दियाजन्मों का होगा साथ इस यकीन पर गयामनाओ जश्न कि कोई मर गया लौट न पायेगा…

  • ज़िन्दगी की सरसराहट...

    तुम क्या जानो (Tum Kya Jaano)

    दिल में दबे जज्बात हैं कितने क्या समझो तुम क्या जानोतुमसे कितने ख्वाब सजे तुम क्या समझो तुम क्या जानो बातों बातों में तौबा जो पलकों को झपकाती होमाथे पर बालों की लट को हौले से सुलझाती होऔर शरारत करूँ जो तुमसे छुईमुई बन जाती होमेरा दिल ले जाती हो तुम क्या समझो तुम क्या जानो दिल में दबे जज्बात हैं कितने क्या समझो तुम क्या जानोतुमसे कितने ख्वाब सजे तुम क्या समझो तुम क्या जानो रंग तुम्हारे काजल का काली रातों से आया हैअम्बर से आँचल पर जैसे तारों को जड़वाया हैचेहरा इतना नूरानी है देख चाँद भी जलता…