करवा चौथ (Karva Chauth)
चंदा की पूजा कर छलनी में देखेगीपहले चाँद फिर साजन को देखेगीसारा दिन निर्जला व्रत रख सजनीअपने साजन को कुछ
चंदा की पूजा कर छलनी में देखेगीपहले चाँद फिर साजन को देखेगीसारा दिन निर्जला व्रत रख सजनीअपने साजन को कुछ
उम्र भर संघर्षों में जूझते रहेपरिवार को पसीने से सींचते रहेख़ुशी बांटी दुःख का ज़िक्र नहीं कियापिताजी ने तंग बिलकुल
शरद पूर्णिमा की रात है हम तन्हा छत परपूरा चाँद आसमां पे है और चांदनी छत परयाद आतीं हैं रातें
पापा ने बेटे संग जोड़ी बना डालीढ़लती उम्र में जवानी दिखा डालीबेटे की बाइक पर निकले जो सैर को बेटे
अपनी यह सामर्थ्य कहाँ कि उनको साथ रखेंउनका ख्याल रखें या भोजन उनको देंपापा बड़े हैं घर के उनको प्यार
हर आह हर आंसू का कर हिसाब आया हूँमैंआज दर्द से कर के दो दो हाथ आया हूँघर मैं घुसकर
लेखक के घर की मुंडेर पर एकजंगली कबूतरों का जोड़ा रहता थालेखक उन्हें अक्सर अपनी खिड़की सेदेखा करता और उनकी
नारी की सृजनात्मक क्षमता अद्भुत हैप्रसव के साथ ही जग जाता मातृत्व हैसंतान लड़का हो या लड़की, गोरी याकाली सक्षम
दिल को समझाने को मेरी जान ख्याल अच्छा हैकविता में पिरोकर तालियां बजवाने के लिए अच्छा है तुम्हारी ऊंची उड़ान
तुम को भी अच्छा लगता थाआनंद हमको भी आता थादो नैनों का मिलन प्रियेमन व्याकुल कर जाता था वक्त ने
बड़े लोगों में बड़ी देखी कोई बात नहींयूँ बिखर जाएँ हम वर्ना ऐसे हालात नहीं पैसे वाले हैं अमीरी का
तू रानी तो मैं भी रानी कौन भरे पानीनोट नहीं पॉकेट में पीते चाय ईरानीतू रानी तो मैं भी रानी
अपने मुकेश की माँ बीमारबहुत बीमार थी क्योंकि वह गुटखेकी बुरी लत की शिकार थीतम्बाकू के अधिक सेवन सेमाँ के
बाप के रूपमें उसने उसे हमेशाअपनी इज़्ज़त पर खतरा समझाऔर कोशिशें की वह पैदा ही न हो भाई के रूप
आज का पन्ना मैं पढ़कर सोया हूँसबक कौन सा कल पढ़ाएगी तूकिन नए लोगों से मैं कल मिलूंगाक्या नए तोहफे
सच, सच तेरी मेरी सोच पे पड़ा एक पर्दा हैसच, झूठ को सच बताने की एक अदा हैवर्ना तेरा सच
सुबह हमेशा की तरहमनमोहक और हवा ताज़ी थीमगर वह कमज़ोर दर्द सेबेइंतेहा परेशान और सदमे में थीजिस्म के एक एक
ख्वामखां ही किसी से उलझते नहींमन किसी से भी मैला रखते नहींसाफ़ दिल है खरी बात करते हैं हमसिर्फ अपने
रात भर दुनिया का रंग मंचअँधेरे की कैद में सुनसान रहान शोर न संगीत न कलाकारचंदा तारों ने लाख कोशिशें
तूने छलनी मेरे जिस्म को कर दियादर्द रग रग से ले रूह तक भर दियाजीना दुश्वार है दिल परेशान हैदूर