सुना है तेरे शहर में अदा से मिलते हैं लोगदिल मिले न मिलें फिर भी मिलते हैं लोगबंद दरवाज़े बयां कर देते कद आदम कापक्के मकानों में कच्चे दिलों के लोग जो पाना है तुम्हें है ज़िद कि हमें चलना होगाअजनबी शहर में नई शर्तों पे रहना होगाख्वाहिशें नहीं मिट जाते हैं ख्वाहिशमंद जहाँसुकून छोड़ टूटती ख्वाहिशों में जीना होगा तू बुलाता मुझे है वहां जो घर तेरा न हुआदम तोड़ देते जज्बात शहर कब किसका हुआतू जो उड़ गया था कभी सूखे पत्ते की मानिंदन रह पाया तू वहां न कभी तू इस घर का हुआ मैं चल दूंगा…
वक्त है बदल रहा रास्ते हैं अनजानपुकारता हूँ मैं तुम्हें कि बानगी मिलती रहेमंज़िलों की राह पर कारवाँ बढ़े चलेंदीप हूँ जला रहा कि रौशनी मिलती रहे नए कीर्तिमान देखो आज तुमको खोजतेलाखों स्वप्न पूर्णता रहे तुममें संजोतेखुद भी चलना है तुम्हें नयी राह भी दिखानीजगा रहा हूँ मैं तुम्हें कि प्रेरणा मिलती रहे ज़िन्दगी की मुश्किलों के हल हासिल नहींराह भटका दें ऐसे दुश्मन भी कम तो नहींप्रतिद्वंदियों से आगे बढ़ चलना है तुुम्हेँप्रोत्साहन हूँ दे रहा कि ऊर्जा मिलती रहे माना मेरे लहजे में हल्का सा एक तंज़ हैउपहास भी तो यार एक दोस्ती का रंग हैबीच राह…
हुई ज़िन्दगी तमाम कोई फिर गुज़र गयाक्या सबब कौन कौन उसकी मैयत मेँ गया आँखें खुलीं थी उसकी किसी अपने की चाह मेँकैसे जियेगा शायद दिल मेँ डर घर कर गया टुकड़ा टुकड़ा जोड़ बनाया था एक जहाँबस एक पल में गैरों के वो नाम कर गया सजदे किया गए तमाम मांगी गयीं दुआएंबेअसर सभी दुआओं को वो मगर कर गया तुमसे है गुज़ारिश न करना उसको यादगुज़रा हुआ वक्त था वो बस गुजर गया
निस दिन नया सवेरा आशा का संदेशा लाता हैप्रकृति का सुन्दर स्वरुप मन को अति हर्षाता है पंछियों के कलरव ने धुन फिर नयी बजायी हैसुबह के रंगों ने नभ में समरसता बरसाई हैनन्हे बालक सा सूरज नन्हे पैरों पर खिसक खिसकआ बैठा लो क्षितिज पर तारों की नींद उड़ाई हैजाओ अब कल फिर आना यह डांट उन्हें समझाता है निस दिन नया सवेरा आशा का संदेशा लाता हैप्रकृति का सुन्दर स्वरुप मन को अति हर्षाता है बहती हवा धीमे से कान में कुछ कह जाती हैहरी फसल और पेड़ों को बस यूँ ही छेड़ती जाती हैओस की बूंदें पौधों…
व्यर्थ के तानों को सुनकरतुम हो जाना मायूस नहींजतन अगर कोई न समझेकरे मेहनत का गुणगान नहींसौंप दिया परिवार को जीवनभूली अपने दुःख तमामगृहणी तुमको है प्रणाम मात-पिता ने जैसा खोजाघर तुमने स्वीकार कियानए परिवेश में खुद को कैसेसहज ही तुमने ढाल लियाससुराल पक्ष और पितृपक्षसब रिश्तों का मान रखाबिना शिकायत परम्पराओं कासच्चे मन से ध्यान रखापति बच्चों की प्रगति मेंखटती रहती हो सुबह शामगृहणी तुमको है प्रणाम सुबह से लेकर रात ढले तकसबके हुकुम बजाती होभाभी पत्नी माँ बनकरकर्तव्य निभाती जाती होहमदर्द बनी हो तुम सबकीपर अपना दर्द छुपाती होस्वास्थ्य तुम्हारा बिगड़ रहापर संवारती सबके कामगृहणी तुमको है प्रणाम…
देखा है किसी को टुकड़ों पर पलतेभूखा हो पेट पर देखा हो लात खातेबिना बात मारते हैं वो मुझको पत्थरमैंने काटा बिना बात, कहीं देखा है! पापा देखे नहीं माँ को बस जानता हूँतुम को ही अपना सब कुछ मानता हूँबख्शा है पेट उसने सताती भूख मुझेछीना हक़ किसी का, कभी देखा है? देखा है किसी को टुकड़ों पर पलतेभूखा हो पेट पर देखा हो लात खातेबिना बात मारते हैं वो मुझको पत्थरमैंने काटा बिना बात, कहीं देखा है! गर्मी करती बेहाल सर्दी सताये मुझकोरोऊँ सर्द रातों में नींद न आये मुझकोधूप सेकने को जा बैठूँ तुम्हारी गाड़ी परकरता रखवाली…
सरहद नहीं आँचल है मातृभूमि कापवित्र श्वेत सौम्य टुकड़ा यह पृथ्वी का मेरे कन्धों पर बन्दूक है ज़िम्मेवारीमाँ की लाज न छूने पाये अत्याचारीमिला अवसर तो पड़ूँगा दस पर भारीवतन की खातिर एक एक सांस हमारीमैं हूँ वीर सपूत लाल इस धरती का सरहद नहीं आँचल यह मातृभूमि काश्वेत सौम्य पवित्र टुकड़ा यह पृथ्वी का यूँ तो पग पग पर यहाँ पुण्य स्थान हैंजिन्हें सुबह औ शाम पूजता जहान हैमेरा तो कर्त्तव्य ही मेरा भगवान हैजान से प्यारा मुझे हिन्दोस्तान हैमांगेगी बलि तो सर होगा प्रहरी का सरहद नहीं आँचल यह मातृभूमि काश्वेत सौम्य पवित्र टुकड़ा यह पृथ्वी का मैं…
घर के आँगन में आ बैठे थे जो पंछी हवा हुएथका हुआ मानुष बैठा हैं दृष्टि शून्य में धरे हुएसूनी आँखें कमज़ोर नज़र पगड़ी है सर पर धरे हुएजंग जीवन की हारा योद्धा रणभूमि में डटे हुए जिनके दाने की खातिर वह अपना खाना भूल गयाउनकी सुरक्षा करने को वह कई खतरों से खेल गयाजिनको दुनिया समझा था खुद अपना जहाँ बसाने कोपंख निकलते ही उड़ गए सब रुख अपने अपने घर कोकह सका न कुछ मूक रहा आंसू आँखों के पिए हुएखुद से ही दोहराता रहता है जो भी थे हालात हुए सदा नहीं था वह ऐसा उसका भी…
दिल पागल है दिल रोता है दिल में कुछ कुछ होता हैमेरे देश में अमन चैन नेता को हज़म नहीं होता हैक्योंकि इनका स्वार्थ सिद्ध झगडे दंगों में होता हैदिल पागल है दिल रोता है दिल में कुछ कुछ होता है वोट झटकने की खातिर हमें आपस में लड़वाते हैंजनहित के सारे मुद्दे बस कल पर टालते जाते हैंझूठे आंसू बहाते वर्ना इनका दिल कहाँ रोता हैदिल पागल है दिल रोता है दिल में कुछ कुछ होता है धुर्विरोधी का नाटक करते आपस में जोड़ें रिश्तेअपने वेतन वृद्धि बिल मिलकर अनुमोदित करतेगरज नहीं इनको भारत क्यों खून के आंसू क्यों…
मन में कुछ सवाल उठते हैं मन की बात कहूं किसकोमन की बात वो करते हैं बाक़ी है इसका हक़ किसको कैसे कहूं दिल डरता है बुरा न कहीं लग जाए उनकोमेरी राष्ट्र प्रेम परिभाषा देश द्रोह न लग जाए उनकोउनकी सोच बस देश प्रेम उनका विरोध छजा किसको मेरा भारत उसका भारत सबका अपना अपना भारतव्याख्याओं में सबकी बटकर रह गया गया मेरा भारतसंताने जब दर्द दे रहीं माता ज़ख्म दिखाए किसको हो गई मलिन समाज की भाषा बिगड़ी धर्म की परिभाषाचापलूस अखबार मीडिया परोस रहे भड़काऊ भाषाराजनीति बाबा को भा गयी धर्म की लाठी दें किसको अपनी अपनी…
ममन समंदर की लहरों को काबू करना सीख लियादिन के पन्नों पर करना हमने हस्ताक्षर सीख लिया ईश्वर बसे न मंदिर में न वो रहता कहीं पहाड़ों मेंपुण्य करम में बसे ईश्वरी तत्व का मतलब सीख लिया मैं बाहर सुख को खोजता था झरने पर्वत मैंदानों मेंमन के अंदर छुपे हुए संतोष का मतलब सीख लिया जो मिला नहीं है न ग़म कोई जो पाया है सर्वोत्तम हैजैसी सोच वैसा जीवन मन को समझाना सीख लिया भागदौड़ सब व्यर्थ है मनुआ मेहनत से ही काम बनेसमय से पहले हक़ से ज़्यादा नहीं मिलेगा सीख लिया मन समंदर की लहरों को…
ले शपथ संकल्प कर सर कलम दुश्मन का करतज के हर चिंता व्यथा हे वीर आगे कूच कर दे रही आधार तुझको तेरी जीवन ‘संगिनी’सर्वदा है साथ तेरे तेरी ‘वायु ‘संगिनी” हिन्द का सपूत है भारत को तुझ पर नाज़ हैतेरे हाथों में सुरक्षित तेरी माँ की लाज हैबन के लौ राहें सजा कह रही है ‘संगिनी’दे रही आधार तुझको तेरी जीवन ‘संगिनी’सर्वदा है साथ तेरे तेरी ‘वायु ‘संगिनी” रास्ता तेरा है मुश्किल थक गए जो पाँव हैंधूप सर पर तेज सर पर नहीं कोई छाँव हैजीत बस अगले कदम कह रही है ‘संगिनी’ दे रही आधार तुझको तेरी जीवन…
अब करेंगे तब करेंगे फ़िक्र कल की कल करेंगेवक़्त के पन्नें पलटते पिघल रही है ज़िन्दगी कतरा कतरा लम्हा लम्हा बह रही है ज़िन्दगीऔर अब कुछ बूंद बाकी बच गयी ये ज़िन्दगी एक ताना बन चुके तो टूट जाते नये कईतानेबाने जोड़ने में खाक हो गयी ज़िन्दगी फिक्र अपनी है और फ़िक्रमंद अपनों के हमबेतहाशा भागदौड़ कर थक गयी है ज़िन्दगी हासिल हो हर शै हर चीज़ पर हो हक़ मेराहसरतों के दरमियाँ सिमट गयी है ज़िन्दगी यार जिनकी दोस्ती का दम भरा करते थे हमली न खबर कब यार से हो गयी जुदा ज़िन्दगी छोड़ गयी एक दिन सुबह…
मेरे नगमों की पहचान तुमसे हैइनकी धड़कनों में जान तुमसे हैइज़हार-ए-ज़ज़्बात भले मेरे होंइनके तेवर ऐ कद्रदान तुमसे है राह-ए-सफर में गुम हुआ था मैं तोवक्त के थपेड़ों से सहम गया था मेँ तोदर्द की आह जो हुई तब्दील नग़मों मेँज़ख्मों पर मलहम का एहसान तुमसे है तुमने थामा तो ज़ज़्बात बह निकलेदिल की परतों से रह रह निकलेहर ज़ुबाँ पर अब गूंजते हैं हर पलउन नग़मों की तराश तुमसे है आलम ये है तुम्हें ढूंढते हैं गीत मेरेतुम न पढ़ो तो न सजेंगे ऐ गीत मेरेमेरे कोशिश को तुम सराहते रहनावक्त की मुझ पर मेहरबानी तुमसे है
माँ मैं तुझको मिल न पायाकैसी है तू जान न पायाआखिर किस डर की खातिरसबने मुझको मार गिराया! मैं तो तेरा ही टुकड़ा थाकोख में तेरी मैं जकड़ा थाखून से जिसको सींचा तूनेआज गटर की राह बहाया महीनो तक था मुझे संभालाज़रा न सोचा कटवा डालादिल के इस टुकड़े को तूनेक्यों खंज़र की भेंट चढ़ाया मुझे मौत की सजा जो दे दीपाप मेरा ज़रा बतला देतीतेरी गोदी मिली न मुझकोमौत की गोदी में पहुंचाया माँ बच्चों की जां होती हैधन्य हैं जिनकी माँ होती हैमेरी माँ की ममता देखोबोटी बोटी क़त्ल कराया सुख से अब जीवन में रहेगीपर तू कैसे…
मेरे प्यारे बच्चे गुनहगार मैं तेराबिना सोचे समझे तुझे दुनिया में लायायह दुनिया जो नफरत की शै पर टिकी हैपसरा है हर सू डर का ही साया दुनिया में मुश्किल है अब सांस लेनानहीं महफूज़ है कोई कोनाहवा में ज़हर है है पानी दूषितमिलावट का खाना जो करता कुपोषितजीना है मुश्किल जहाँ तू है आया मेरे प्यारे बच्चे गुनहगार मैं तेराबिना सोचे समझे तुझे दुनिया में लाया जहाँवाले हर रोज आपस में लड़तेकभी तो धर्म कभी जाती पे लड़तेबारूद का इतना ऊंचा है टीलाहो जाएगा लाल अम्बर भी नीलाफटेगा जो नफरत का मजमा लगाया मेरे प्यारे बच्चे गुनहगार मैं तेराबिना…
वह गिर गया था सड़क पर टकराने के बादउसकी बाइक को मारा था बस ने आया उसे याद बहुत दर्द था शायद कई हड्डियां टूट गयी थींसर में चोट थीं सड़क खून से भर गयी थी साँझ ढले जनता दफ्तर से लौट रही थीहर शख्स को घर लौटने की जल्दी थी कुछ राहगीरों ने मदद का हाथ दिया थाउसे और बाइक को सड़क किनारे बिठा दिया था दर की आड़ में याद आ रहा था उसे अपना घरठीक होता तो पहुँच जाता अब तक उधर छोटी बेटी दौड़ कर दरवाजा खोलतीलिपट जाती गले से फिर हँसती बोलती पत्नी के पास…
नया एक बना था घर आलीशानदेखते थे उसे पापा पोता दादाजानसोच में थे गहरी एक दूजे से अनजान दादाजी के मन दबी में बात यह आयीपूरी उम्र देकर यह इमारत बनायीहिस्से में मगर बैठक की जगह पायीखाक ! पूरी जिंदगी जाया ही गंवाई बेटाजी के मन कसक यह थी समायीपिताजी के रहते अपनी चल नहीं पायबीती जवानी जब यह खुशी हाथ आयीक्या नसीब पाया और क्या करी कमाई पोते की आँखों में चमक गज़ब थी आयीदादाजी की दौलत और पापा की कमाईशान-ओ-शौकत तमाम जब अपनी है भाईक्या है सबब फिर क्यों करें कमाई एक उम्र गुज़र जाती है घर एक …
एक किस्से से कई किस्से बनाये जा रहा हूँकुछ छुपाये तो कुछ बताये जा रहा हूँ शर्मसार हूँ मैं खुद से कुछ इस कदरकि आईने को झूठ दिखाए जा रहा हूँ ख्वाबों को सजाया है खुली आँखों मेंइरादों को इनसे ऊंचा उठाये जा रहा हूँ अंजानी राहों पे रख चला हूँ दिल पे पत्थररिश्ते सब दिलों के भुलाये जा रहा हूँ ताक पर रख दी है अब उमीदें तमामताबीर से नए सवेरे सजाये जा रहा हूँ
जीवन है पार्थ एक महाभारत आरम्भ जो है तो अंत भी हैआरम्भ जो तेरे हाथ नहीं तो है अंत भी तेरे वश में नहींक्यों व्यर्थ ही शंका में भटका हे पार्थ तू निज गांडीव उठायह युद्धभूमि है कर्मभूमि रणकौशल बस कर्त्तव्य तेरा मैं आदि में हूँ अनादि में हूँ वर्तमान भविष्य में मैं ही हूँतुझ में मैं, मैं प्रियजन में सब पितरों में केवल मैं हूँमरूंगा मैं मारूंगा भी मैं तू कर्म कर अपना धर्म निभायह युद्धभूमि है कर्मभूमि रणकौशल बस कर्त्तव्य तेरा पंचभूत से प्रकट हुआ यह शरीर ही केवल नश्वर हैनिराकार आत्मा हूँ मैं जो अजर अमर और…