पानी कम चीनी(Pani cum Cheeni)
ज़िन्दगी में कुछ मिला ख़ास नहींहर चीज़ हमको कम ही मिली हैपानी कम मिला चीनी भी कमरोटी किसी तरह चल […]
ज़िन्दगी में कुछ मिला ख़ास नहींहर चीज़ हमको कम ही मिली हैपानी कम मिला चीनी भी कमरोटी किसी तरह चल […]
आपने पहल कर दी हैमेहमान बना कर हमकोआवभगत ऐसी दी है किरूह तक जीत ली है कहते हैं कि दिल
हम घुटनों पे चलते थेभेजे से सोचा करतेदुनिया भर की बातेंइस डब्बे में भर लेते पैरों पर जब चलते थेघुटने
रेलगाड़ी की खिड़की से बाहर जो देखावक्त रात का था हर ओर पसरा अँधेरा मैंने नज़र दौड़ाई तो चाँद नज़र
खुल गयी खुल गयी खुल गयी हैखुल गयी खुल गयी खुल गयी हैसपनों के ताज़ा रस की दूकान सुन्दर सुन्दर
जीवन खेला सांप सीढ़ी का हैजीवन खेला सांप सीढ़ी का हैजीवन खेला सांप सीढ़ी का हैजीवन खेला सांप सीढ़ी का
नई नहीं ये मुलाकात हैरस्मे आदाब न रखोखुल के मिलो हमसे तुमकोई हिज़ाब न रखो है दिल में जो कोई
एक रोज़ जब रिटायर हो जाऊंगा मैंपहले तो खुद को होश में लाऊंगा मैंदशकों गुलामी की जो आदत लगी हैउस
खिली खिली सी सुबह मेंखिला खिला सा मेरा मनमंद हवा के झोंकों सेइठलाते उपवन में सुमन अँधेरे से लड़ते झगड़तेरौशनी
सावन में बारिश का देखो कहरसूरज बैठा घर बादलों से छिपकर काले बादलों ने लगाया था डेरापहरा तगड़ा था मज़बूत
दिल से नहीं जाती है खतरनाक पाद की बदबूनिकल गया जब कहना था गर्लफ्रेंड सेआई लव यू आई लव यू
हड़कंप सी है बदन में है नस नस ढीली ढीलीकल नींद नहीं आयी ऑंखें देख गीली गीलीलगता है सर्किट हुआ
एक और दिन उसनेकुछ यूँ गुज़ार दियासूरज पूरब से पकड़ापश्चिम में उतार दिया इन्तहा हो गयी थीउसके इंतज़ार कीमहबूब भी
ये हमको पता हैजहाँ ने सबको ठगा हैतेरे ऐतबार पे एक बारफिर ऐतबार जगा हैपता है कि ज़ख्मफिर से लगेंगे
अमीर से अमीर आदमीबदमाश या शरीफ आदमीव्यापारी या सेठ आदमीइंजीनियर मज़दूर आदमी सूटबूट अपटूडेट आदमीधोती कुरता वाला आदमीगाड़ी बंगले वाला
काया से कमज़ोर आंखों से कम ही देख पाती थीजां में आती थी जान जब अम्मा सामने आती थीकिताबें की
कवि की कविता और कल्पनादोनों कवि की प्रेयसी हैंजैसे कवि मासूम हैसखियाँ भी उसके जैसी हैंकल्पना कवि की आँखें मूंद
याद नहीं जाती दिल से बचपन के नादान दिनों कीखुले आंगन में सो जाते हम हरे नीम के नीचे ही
सावन का महीना फुहारें पड़तीं हलके हलकेहम गुज़रें जब गली से मिलते दीवाने लड़केहम गुज़रें जब गली से मिलते दीवाने
लिखने का मन नहीं थामायूस कलम ने अर्ज़ कियाइससे पहले कि शाम ढलेतू बोतल को लगा ले गलेकिसी की याद