तुम झुठे मैं मक्कार (Tum Jhoothe Main Makkar)
चलो दोनों बहस करते हैंआओ हम बहस करते हैंतीसरे को पकड़ते हैंऔर थोड़ा झगड़ते है दो बातें तुम कहनादो बातें […]
चलो दोनों बहस करते हैंआओ हम बहस करते हैंतीसरे को पकड़ते हैंऔर थोड़ा झगड़ते है दो बातें तुम कहनादो बातें […]
मामुली सी एक थी बातचली फिर खतम हो गईबातों में से निकली बातबात फिर शुरू हो गईबातें हुईं जब बढ़ी
उम्मीद से ज़िंदा सब हम हैंउम्मीद पे दुनिया कायम हैउम्मीद से थी माताजी जबजग में प्रगटे हम तुम हैं उम्मीद
इंसां जिसने ने सब हज़म कर लियाजिसकी भुख का कहर खत्म नहीं होताकहता है कुत्ते को घी हजम नहीं होता
WHENproblems bloomed like thornsand every hope was torn WHENthe system turned curseand destiny reversed WHENno shoulder stood nearand dreams drowned
मिलते हो जब तुम मुस्कुरा देते होराम कसम मेरा दिन बना देते होअपने ज़ज़्बात मैं जो कहना चाहुं तुमसेसुनते तो
स्टेशन के बाहर एक बच्चा रो रहा थारेल से बीच सफर में उतर जो गया था रो रहा था वो
बहोत दिना है गए सखा के धाम सुदामा सोच रह्यो मिलौ ऐसो सत्कार कि सुध घर की मैं बिसराय गयो
कोटा में साजन का घरसाजन के घर की छत परबैठी मैं मुंडेर परसोच रही थी बादल काला सर परकुछ बूंदें
चल भग जा रे कुत्ते अब ये देस हुआ बेगानालौट जहाँ से आया तेरा यहाँ नहीं ठिकाना हर कुत्ते का
शहर में जाना मानो जी का जंजाल जी जी जी जीशहर में रहना है मुहाल बस मज़बूरी है जी जी
शर्मा जी पार्क में जावें नित जावें हैं दोड़ लगाएंअच्छा खावें बढ़िया पहने सेहत पे यों ध्यान लगाएं एक दिनअनहोनी
क्या सिस्टम है क्या खानपान है क्या रूटीन हैसिस्टम के अंदर जकड़ी पब्लिक ग़मगीन हैएक के पीछे है दो और
बारिश में मन खिल खिल जायचलो चलो कहीं सैर पे जायेंसड़क किनारे घुमें बैठेंपियें नुक्कड़ वाली चाय अदरक की सोंधी
बेटी को हमने अच्छा पढ़ा तो लिया हैहोशियार हैं वैसे तो एमबीए कर लिया हैएक उलझन है मगर कैसे बताएंकम्बख़्त
सुबह रात ग़ुम कायनात फ़्रस्ट्रेशन चप्पे चप्पेनयी चाट रोज़ हो तुम खिलाते तौबा लारे लप्पेकब तक खाएं हम तेरे बिन
सरकारी था ऑफिस उस ऑफिस में मैडमबॉस की थी चहेती उनके सुपरवाइज़र हमप्रेम की इस कहानी का एक हिस्सा थे
चलो ऐसे ही खेलेंना तुम हमसे बातकरो ना हम बोलेंचलो ऐसे ही खेलें आतेजाते रहें अंजानन कुछ बोलो तुमऔर न