कवि की प्रेयसी (Kavi ki Preyasi)
कवि की कविता और कल्पनादोनों कवि की प्रेयसी हैंजैसे कवि मासूम हैसखियाँ भी उसके जैसी हैंकल्पना कवि की आँखें मूंद […]
कवि की कविता और कल्पनादोनों कवि की प्रेयसी हैंजैसे कवि मासूम हैसखियाँ भी उसके जैसी हैंकल्पना कवि की आँखें मूंद […]
मिलते हो जब तुम मुस्कुरा देते होराम कसम मेरा दिन बना देते होअपने ज़ज़्बात मैं जो कहना चाहुं तुमसेसुनते तो
चलो ऐसे ही खेलेंना तुम हमसे बातकरो ना हम बोलेंचलो ऐसे ही खेलें आतेजाते रहें अंजानन कुछ बोलो तुमऔर न
कैसे मारें तुम्हें वो मुझे पूछते हैंज़हर दें तुमको या घोंप दें खंजरख्वाहिश हो गर कहो वो पूछते हैं मैंने
मैं खुद ही खुद से तेरी बातें करता हूँ,फिर तु बनकर खुद से तेरी कह लेता हूँ।तू नहीं है तो
मेरा तुम्हारा क्या रिश्ता है तुमको पता है या हमको पता हैबंधन यह पक्का कितना है तुमको पता है या
इश्क़ का ये कौन सा दयार हैकि हम ग़ज़ल हो गएपानी की बूँद को मोती बनाहम तो कमल हो गए
ज़ख्म अभी नए हैं घाव अभी हरे हैंदो चार दिनों में सब हो जायेगा ठीक कुछ तुमने कड़वा बोल दियाकुछ
अंगना बजे शहनाई मोरी बन्नोदुल्हन बन घर आयी मोरी बन्नो छम छम छन छन ओल्ड फैसनधमधम चलकर आयी मोरी बन्नो
चुगली करना सीख बन्नी चुगली औरत का गहना हैचुगली करके ही ससुराल में रानी बनकर रहना हैचुगली करना सीख बन्नी
लाज तुम घर की सबकी लाड़लीबेटी तुम आज ससुराल चली अरी बिटियातज घर आंगन बंधन पहने हाथों में कंगन हो
सच कहूं तो इश्क़ मुझे तुमसे नहीं हैऔर भरोसा तो जान हरगिज़ नहींपैवस्त हो दिल में ख़ुलूस की तरहनशे की
तुम्हारे तस्सव्वुर में सराबोर हो जाने की ज़िद की हैफिर एक बार रेत मुठ्ठी में दबाने की कोशिश की है
एटिकमेटिक सी मैंने गाड्डी ले देएटिकमेटिक सी मैंने गाड्डी ले देबैठ जाऊं जब मेलेतू मन्ने जाती ने जीपीएस पे टोहवे
एक बार जो गलती से उस पर हाथ उठ गयाखुद की ही नज़रों में मैं उस दिन से गिर गया
एक टाइम कम्मो तू कितनी अच्छी लगती थीये नज़र तेरे चेहरे से हटती ही नहीं थीआ जाती थी जो कभी
किनारे मर्यादा जानते हैंसमंदर की ताकत पहचानते हैं मेरा प्यार भी एक समंदर हैतुम किनारा बन जाओ नमुझे समेट लो
लड़कपन में किस दौर से गुज़र जाते हैंकितने नादां थे हम अब जान पाते हैंहर खूबसूरत चेहरे पे दिल का
तेरी मोहब्बत के चंद फूल रखे थे हमने किताबों मेंखिल जाते हैं फिर जब चले आते हो तुम ख़्वाबों मेंआज