बातों बातों में (Batton Baaton Men)
बातों बातों में ही बातें बन गयींबातें मुलाकातों में बदल गयींख़्वाबों में रातें जो बीती थींहकीकत बन रूबरू हो गयीं […]
बातों बातों में ही बातें बन गयींबातें मुलाकातों में बदल गयींख़्वाबों में रातें जो बीती थींहकीकत बन रूबरू हो गयीं […]
एक दौर था शोना बाबू की टॉर हुआ करती थी मंहगी बाइक पर बैठ उनकी चौड़ हुआ करती थी बाइक
जितनी दर्द की दिल पर बारिश होती हैजितनी मेरे जुनूं की आजमाईश होती हैतुझे पाने की और भी ख्वाहिश होती
मेरी नज़र से न दुनिया को देखो जहां ये तुम्हारा यूं ही चलेगा गुजर जाएंगे दिन मेरे गम के ये
ग़म संभलता नहीं दम निकलता नहींस्याह रात ये क्यों काटे कटती नहीं हैतेरी खुश्बू से घर अब भी लबरेज हैये
आरजू थी हमें सर उठाए के जीने की रोटी कपड़ा मकां से कुछ ज़्यादा की ज़िद थी कोशिश करते रहे
तेरे प्यार में गिरे थे किसी ज़माने मेंउम्र गुज़र गयी कुल रूठने मानाने मेंउम्र दराज़ मांग कर लाये थे चार
राह अगर वो न मुड़ गयी होतीराह अगर वो न मुड़ गयी होतीतो मंज़िल हासिल हो गयी होती मंज़िल हासिल
मैं चला जाऊँगा किसी गुज़रे लम्हे की तरहगया एक बार तो फिर लौटकर न आऊंगा सेहरा किसी की ख़ुशी किसी
झूठ ही सही तारीफ वो मेरी कर दिया करता थामेरे किरदार के अच्छे दाम लगा दिया करता था ये नज़रें
कौन कहता है कि सुनता नहीं खुदाखुदी को भूल कर तू हाथ उठा दुआ में अपना सर तो झुकाचल उठ
ऐ प्यारी फूलों की मालातेरा कोई नहीं है रखवालाताज़ा थे फूल तो देवों का साथ थामुरझाये तो कचरे की पेटी
राख से बने हम राख की तरह जलेराख बनकर ही चले जाना है सजनकुफ्र मत तोलो खुदा के पास जाना
हम तुम मिले भी तो रेल की पटरियों के जैसेकुछ वक्त संग चले फिर मुड़ गया सफरचाहत के बाग हुए
वो आया तो किसी आफत की तरहसंग रहा मेरे बुरी आदत की तरह कर गया इस तरह वो बर्बाद मुझेगया
तेरी आँखों में बसी है मेरी कहानीजिसमें हर दिन की सुबह है सुहानीतेरे बगैर ये दिल था अजब वीरानाहर राह
तुम जो अपने ही ख्यालों में खोई रहती हो बेख्याली में खुद से ही बातें करती रहती हो इल्म है! तुम
मिटटी यहाँ की गीली है यह ज़मीं खोखली सीली है इस पर क्या मकां बनाओगेइस दलदल को पाट सकेवो डांवर कहाँ से
लोकल ट्रेन के डिब्बे में रोज़ मिली और जैक डॉसनटाइटेनिक सी लव स्टोरी तुम्हें सुनाता हूं साहेबान भीड़ भाड़ इतनी