सैलाब (Sailaab)
ये समंदर यहां कभी पहले तो ना थाकिसने आंसुओं के सैलाब बहाये हैंख्वाबों के जहां कभी रंग सजते थेबेनूर फ़िज़ाओं […]
ये समंदर यहां कभी पहले तो ना थाकिसने आंसुओं के सैलाब बहाये हैंख्वाबों के जहां कभी रंग सजते थेबेनूर फ़िज़ाओं […]
तुझ में खुदा हैमुझ में खुदा हैतेरे खुदा सेमेरा दिल लगा हैतेरे खुदा कोमैंने सजदा किया तोदुनिया ने क्योंमुझको काफिर
आओ भाई लाओ अब जाने दोमेरा चश्मा और छड़ी मुझे दो आखिरी दफा नहला दो मुझेउजले कपड़े दो पहना दो
कल फादर्स डे हैमेरी बेटी ने याद दिलायाजब उसने बाजार सेमेरे लिए गिफ्ट मंगाया बेटियां ऐसी ही होती हैंहम सोचते
मॉल वाले बिल से पिलाते हैंटपरीवाले दिल से पिलाते हैंमॉल का स्वाद मुँह बन जाएइतनी महँगी गश आ जाए टपरी
समय देख कर उठते होबैठते सोते जगते होघड़ी से ही पूछ करधोते नहाते खाते होजरा देर हो जाए तोबेचैन तुम
कल का दिन कुछ खास थामेरे जन्मदिन पर परिवारसाथ था गुब्बारे बेचती महिलाका छोटा सा बच्चामासूम चेहरानीचे से नंगाटूकुर टूकुर
अथाह ब्रह्माण्ड में तुमअकेले दमकते होऊजिय़ारा फैलाकरअंधेरे समेटते हो कालेअंधेरे को नीलगगन दिखाते होक्या दिखाना चाहते होवैसे भी गगन के
ये कविता है माँकविता मेरी है मुझे बहुत पसंद है कविताहम दोनो की जोड़ी सबको भाती हैमाँ ये कविता हैकविता
प्यार था विश्वास थादोनो के रिश्ते मेंबहुत कुछ खास थाप्यार का मैं उनसे कभीइजहार न कर सकामैं अपने पिता के
Observation… is not a window. It’s a hammer.A silent force that knocks on the doors of the unknown —until they
हम जब छोटे थे मासूम कुछ खोटे थेसारा सारा दिन बस हुड़दंग मचाते थेपच्चीस पैसे में चूरन खरीद खुद कोकितना
बचपन में जब कभी चोट लगती थीमां कहती थी बेटा रोया नहीं करतेदेकर खिलौना या तोहफा कोईबहला देती दिल छोटा
यूं तो वे सीधे सज्जन और सरल थेबाबूजी के जीवन के फलसफे अटल थेशिक्षक थे क्लास हमारी अक्सर लगतीमुश्किल परचे
घर बनने की आस मेंवीरान पड़े मकानखुद के वज़न से लाचारसूरमां पहलवानदेवालयों की भीड़ मेंगुम हुए भगवान्हमने देखे है बारिश
कॉमन मैन ये है कॉमन मैनसंघर्ष करता रहता हैअपर क्लास और लोअर क्लासके बीच में पिसता रहता है कॉमन सुबह
मेरी ज़िन्दगी का मक़सद था क्या पाया क्या है खोयाकहीं ठहरूं सुकून में जीऊं नहीं ऐसा वक़्त आयातुम जो मिले
पोंछता हूँ धो देता हूँ बात बात पे रो देता हूँइसकी उसकी चुगली मैं गोभी खोद देता हूँमैं धोऊँ रोज़
जीवन के अंजान सफर में नया मोड़ आने वाला हैएक राह मुड़ने वाली है तो एक राह जुड़ने वाली हैसफर
याद आती हैं रेलगाड़ी की स्लीपर क्लास की सीटेंज़िन पर हम खा पीकर सो जाते थे चादर खींचे एक सीट