ये कौन सा दयार है (Ye Kaun Sa Dayaar)
आलिशान मकानों केरोशन कमरों मेंजवां होते जश्नके शोर पर थिरकते लोगजाम छलकते पैमानेमहकते हुए फूलहवा से लवरेज़ गुब्बारेदिलकश लज़ीज़ खानाये […]
आलिशान मकानों केरोशन कमरों मेंजवां होते जश्नके शोर पर थिरकते लोगजाम छलकते पैमानेमहकते हुए फूलहवा से लवरेज़ गुब्बारेदिलकश लज़ीज़ खानाये […]
तुम न जब संग थेख्वाब सब बेरंग थेबेख़ौफ़ मगर घर जाता था मैं अब तुम जो मिले होइतना कुछ है
WHAT IS THATIT TAKES TO BEA TEAM LEADER A HEART FULL OFEMPATHY ANDA PINCH OF COURAGE WHAT IS THATTEAM LEADERSTRIVES
कुछ न करोकुछ भी न करोक्या करना हैक्यों करना है कारवां पीछे तू आगे हो गया हैसमय का पल थम
शादी ऐसा बंधन जिसमें खुश है वो जो ठगा जाता हैयह दो आत्माओं का मिलन आसमानों में जो बुना जाता
सैंया छोड़ दे नौकरी चलवा दे रिक्शा बैटरीन धुआं न धक्कड़ यात्रा पॉल्यूशन फ्रीघर में आये लक्ष्मी क्यों किसी की
हम तुम कभी फ्लाइट से जो जाएँऔर फ्लाइट मिस होजाए मुँह दिखाने के काबिल खुद कोन हम रह पाएं सोचो
इसका इससे उसका उससेइनका इनसे उमका उनसेमन का एका अब हो गया है मतलब ये है बस ये समझ लोसब्र
हर शख्स हंस रहा है हर कोई गा रहा हैखुश है फरेबी दुनिया टशन आ रहा हैदुःख दर्द परेशानी हों
पान तू खाता नहीं बीड़ी तू पीता नहींसिगरेट छुआ नहीं तू करता क्या हैबन्दे तेरी ज़िन्दगी में बचा क्या है
ये भड़ास किसलिए ये प्यास किसलिएतुम तो थे झक्कास तो बकवास किसलिए तीन में तुम नहीं न हो तरह मेंफंसे
स्मार्ट तुम पढ़े लिखे, है अच्छी नौकरीसोच मगर छोटी और ईगो बहुत बड़ीबॉस बन कर बैठे हो, हैं बड़े अच्छे
ख्वाब सा लगता है तेरा हमसे यूँ मिल जानाहकीकत में तो ये मुनासिब नहींउतर आयी है आसमां से जो मेरे
मुश्किल है फुर्सत मशरूफियत के दौर मेंनिकल चलो यारो गुज़ारें कुछ दिन बैंगलोर मेंबैठेंगे बगीचों में हम लेंगे चाय की
पापा पत्थर सा खुद को समझते हैंसारी दुनिया से टकरा जाते हैंबेटी की एक ख्वाहिश पे मगरमोम से पिघल जाते
दिल आशना मगर आरज़ू कहाँ से लाऊँख्वाहिशें हैं मगर ज़ुस्तज़ु कहाँ से लाऊँलब सिल गए हैं खुशी कहीं खो गई
हुआ करती थी जो सियाहघनी रेशमी वो ज़ुल्फ़ेंसुफैद बाल चंदतकिये के नीचे कल मिलेबड़े बदनसीब बेचारे हैंवो लोग जिनको तू
मसाइल जो दरमियाँ हैं उन्हें सुलझा तो लेंयारों में नाम तेरा शामिल हो हमें गवारा नहींबड़ी मुश्किलों से संभाला है
आज की सुबह ने एक बार फिर बन्देतेरी थाली में और एक दिन की ताज़ीज़िन्दगी परोस दीतेरे हाथ है इसको
कुछ तो खुदा की मर्ज़ी रही होगीकुछ तक़दीर बेवफा रही होगीकुछ कायनात की तिश्नगी होगीइंसां इंसां में वर्ना इतना फर्क