दर्शन का बुलडोज़र…
वाह मेरे मौला (Waah Mere Maula)
यह खाना जो खाते हम तीन पहर हैंआधा है अमृत और आधा ज़हर हैमाफिक हो गर तो देता है ताकतबेहिसाब
इंसानियत का बुलडोज़र…
हम कुत्ते डेरिंगबाज़ (Ham Kuttey Daringbaaz)
मैं कालू मैं जैकी ये है भूरी संतरीरात के प्रहरी हम हैं रात के प्रहरीये पहरा दे रात को मैं
इश्क़ का बुलडोज़र…
मैं तुम्हारा रहूंगा (Main Tumhara Rahunga)
मुहब्बत मैं करता हूँ करता रहूंगाकिसी मोड़ पर मैं गलत भी रहूँगाशिकवा न करना मैं न सॉरी कहूंगातुम मेरे अहम्
तरन्नुम का बुलडोज़र…
ज़लज़ला (Zalzala)
आँधियों से खेला हूँ तूफानों में पला हूँआसमान की बिजली का एक शोला हूँबवंडर हूँ हर शै समटने को उठा
इश्क़ का बुलडोज़र…
मैं लिखना चाहता हूँ(Main Likhna Chahta Hun)
मैं लिख तो रहा हूँ कागज़ परपर दिलों पर लिखना चाहता हूँएक हंसी दे सके दुखी मन कोबोल दो ऐसे
इंसानियत का बुलडोज़र…
भानमती का कुनबा (Bhaanmati Ka Kunba)
कहीं की ईंट कहीं का रोड़ाभानमती ने कुनबा जोड़ाइसमें कुनबा है नालायकभानमती का दोष नहींकुनबे से वो जुड़ी इसलिएक्योंकि ब्याह
दर्शन का बुलडोज़र…
बिन कारण (Bin Kaaran)
गर्मी बढ़ी धरती तपी बैचेनी मची तो बारिश हुईप्रकृति की शोभा बढ़ी नवजीवन की आस हुईनवजीवन का वर्षा और गर्मी
इश्क़ का बुलडोज़र…
FB Marriage
खट रहा हूँ में थक रहा हूँदीवारों पे खोपड़ी पटक रहा हूँमैं कांचा कंवारा पति बेचाराशादी होने की सजा भुगत
तरन्नुम का बुलडोज़र…
पेड़ नन्हे अरे पीपल के..
बड़ा शहर बड़ी सड़क के किनारे जो उग आया है तूअपनी तोतई और नाज़ुक रंगत पर जो इतराया है तूतुझे
दर्शन का बुलडोज़र…
फलसफा (Falsafa)
दावा है कि सोचकर किया जाए वो प्यार नहीं हैअजी प्यार तो बस प्यार है कोई व्यापार नहीं हैसच है
इश्क़ का बुलडोज़र…
धड़क (Dhadak)
पर्दानशीं हुए खूबसूरत चेहरे सभीअब नज़र हुस्न पर ठहर पाती नहींदिले दर पे कोई दस्तक होती नहींअब धड़क धड़कनों को
तरन्नुम का बुलडोज़र…
मेरा गम कितना कम है (Mera Gham Kitna Kam Hai)
‘राह चुन ली है तूने जो, आसान नहीं हैवह जीत क्या जो खूं अगर कुर्बान नहीं हैं ‘ जब हम
तरन्नुम का बुलडोज़र…
चाकू से अक्सर हाथ कट जाता है (Chaku Se Aksar Haath Kat Jata Hai)
धन के आगे गुणों का महत्त्व नहींतकनीक के समक्ष प्रकृति गौण है चाकू से हाथ अक्सर कट जाता हैखरबूज़ चाकू
इंसानियत का बुलडोज़र…
हिन्दू (Hindu)
हिंदी भाषी हिंदी बोलते थेमुगलिया बोलते थे उर्दूसमय गुज़रा वक्त बदलाहटा संस्कृतियों से पहराहिंदी भाषी उर्दू पढ़ने लगेशब्द दोनों के
इश्क़ का बुलडोज़र…
रुख़सती (Rukhsati)
कसम है बेटी माँ के रस्ते पर ही तुमको चलना हैबीवी बन कर मर्दों से गिन गिन कर बदले लेना
तरन्नुम का बुलडोज़र…
विकास (Vikaas)
रोज़गार छीन लो व्यापार छीनोमंहगाई से कुचलो टैक्स से मारोआम जन को उसमें दफना दोजब सड़ जाए उसे गरीब बताओगरीबी
तरन्नुम का बुलडोज़र…
शुक्रिया (Shukriya)
खिलाकर मीठे आममौसम बना दियाज्येष्ठ मास की गर्मी मेंमज़ा दिला दियानज़रों से सीधादिल में बिठा लियाआदमी था में आमतुमने ख़ास
दर्शन का बुलडोज़र…
नियति (Niyati)
पुत्र पिता का राजा बेटा बड़ा होकर राज करेपिता पुत्र का शक्तिमान जो मिटा दे सब खतरे जीवन की सच्चाई




















