एक पिता की अभिलाषा (Ek Pita Ki Abhilaashaa)
इतनी प्रतिभा न दो प्रभु स्टार मिलेनियम बन जाऊंबेटा रह जाये अभिषेक मैं अमिताभ बच्चन हो जाऊंसुन लो अरज मेरी […]
इतनी प्रतिभा न दो प्रभु स्टार मिलेनियम बन जाऊंबेटा रह जाये अभिषेक मैं अमिताभ बच्चन हो जाऊंसुन लो अरज मेरी […]
Fly away Fly away Fly awayFly away Fly away Fly away Let’s begin a game of loveLet’s play a game
वो घर जो छोड़ दिया उसपे अब इख्तियार नहींमगर कहें किस तरह तुमसे हमें प्यार नहींवो घर जो छोड़ दिया
ऊंची छत पर शान से गर्दन अकड़ा कर घूमने वाले पंखेबांस की सीढ़ी पर चढ़ मैं तेरे सामने हूँ बता
पापा ने थी ज़िद पकड़ी जायेंगे वो अस्पतालजाकर पूछेंगे खुद बीमार पोते का हाल चाल बेटा बोला पापा मैं भी
दावा वो करते हैं कि सब समझते हैंपापा अब तक मुझको बच्चा समझते हैंमेरी सलाह अनुभव की ठोकर पर रखते
चोट लगी ऊँगली दिखाता था मुझकोबातें सब दिल की बताता था मुझकोज़ख्म ज़िन्दगी के अब छुपाने लगा हैबेटा अब दूर
ज़िन्दगी वैसे हर कदम सिखाती हैयाद स्कूल की अब भी लुभाती हैबचपन के दिन मोड़ ले आती हैयाद स्कूल की
पैंट पहना तो आंसू भर आयेमुद्दतें हो गयीं है ठुकराएजिया न लगे क्या करें हायलॉकडाउन से हम उकताए निक्कर टी-
बदलाव बस एक जुआ हैअनिश्चितता का अँधा कुआँ है नए को पकड़ो पुराना छूटेपुराना पकड़ो नया जा फिसले नए में
मैं तो मासूम थी, नामालूम थी,बेचारी, भूखी—मैं एक माँ थी। छल-कपट से मैं थी अनजान,बड़े पेट की भूख से परेशान।झूठे
तुम एक सुबह छोड़ गयी मैंने सहा कुछ न कहावो कहते हैं घर अब पुराना हुआ छोड़ दोक्या कहती हो
पानी पानी कैसा पानी खारा पानी मीठा पानीगहरा पानी उथला पानी ठहरा पानी बहता पानी सावन के महीने मैं कैसे
घर बैठुंगा कल से शायर हो जाऊँगायारो मैं कल से रिटायर हो जाऊंगा ऑफिस ने रुतबा आत्मसम्मान दियारूपया प्रतिष्ठा और
रुख-ए-हवाओं की कहाँ परवाह किया करते हैंबाज़ परिंदे हौसलों से उड़ान लिया करते हैं नेकी बदी के फलसफे पर वक़्त
जग से तुमने ही मिलवायाकौन है क्या सब मुझे बतायापरमेश्वर का रूप तुझे माँदेख समझ में आया मेरी यह सामर्थ्य
कहाँ गए वो दिन जब यार फ़ोन लगाते थेवीकेंड पर साथ चाय का निमंत्रण दे जाते थे प्लानिंग में ही
ईंट गारे पत्थरों से तो मकां बना करते है, घर नहीं खिलता बचपन, जवानी की महकऔर छाँव बुढ़ापे की अगर
सदक़े ऐ अनजानी रूह इंसां को डरा दियामंगल विजयी को तूने घर में पनाह दिया भागा फिरता था मतवाला अनजाने
सुख के दिनों में जो दर्पण दिखाएरखे ज़मीन पर वह दिल की आवाज़ हैदुःख के समय में जो उम्मीद जगायेटूटने