दाना-ऐ-मूंगफली (Dana-e-Moongfali)
अमीर से अमीर आदमीबदमाश या शरीफ आदमीव्यापारी या सेठ आदमीइंजीनियर मज़दूर आदमी सूटबूट अपटूडेट आदमीधोती कुरता वाला आदमीगाड़ी बंगले वाला […]
अमीर से अमीर आदमीबदमाश या शरीफ आदमीव्यापारी या सेठ आदमीइंजीनियर मज़दूर आदमी सूटबूट अपटूडेट आदमीधोती कुरता वाला आदमीगाड़ी बंगले वाला […]
काया से कमज़ोर आंखों से कम ही देख पाती थीजां में आती थी जान जब अम्मा सामने आती थीकिताबें की
कवि की कविता और कल्पनादोनों कवि की प्रेयसी हैंजैसे कवि मासूम हैसखियाँ भी उसके जैसी हैंकल्पना कवि की आँखें मूंद
याद नहीं जाती दिल से बचपन के नादान दिनों कीखुले आंगन में सो जाते हम हरे नीम के नीचे ही
सावन का महीना फुहारें पड़तीं हलके हलकेहम गुज़रें जब गली से मिलते दीवाने लड़केहम गुज़रें जब गली से मिलते दीवाने
लिखने का मन नहीं थामायूस कलम ने अर्ज़ कियाइससे पहले कि शाम ढलेतू बोतल को लगा ले गलेकिसी की याद
चलो दोनों बहस करते हैंआओ हम बहस करते हैंतीसरे को पकड़ते हैंऔर थोड़ा झगड़ते है दो बातें तुम कहनादो बातें
मामुली सी एक थी बातचली फिर खतम हो गईबातों में से निकली बातबात फिर शुरू हो गईबातें हुईं जब बढ़ी
उम्मीद से ज़िंदा सब हम हैंउम्मीद पे दुनिया कायम हैउम्मीद से थी माताजी जबजग में प्रगटे हम तुम हैं उम्मीद
इंसां जिसने ने सब हज़म कर लियाजिसकी भुख का कहर खत्म नहीं होताकहता है कुत्ते को घी हजम नहीं होता
WHENproblems bloomed like thornsand every hope was torn WHENthe system turned curseand destiny reversed WHENno shoulder stood nearand dreams drowned
मिलते हो जब तुम मुस्कुरा देते होराम कसम मेरा दिन बना देते होअपने ज़ज़्बात मैं जो कहना चाहुं तुमसेसुनते तो
स्टेशन के बाहर एक बच्चा रो रहा थारेल से बीच सफर में उतर जो गया था रो रहा था वो
बहोत दिना है गए सखा के धाम सुदामा सोच रह्यो मिलौ ऐसो सत्कार कि सुध घर की मैं बिसराय गयो
कोटा में साजन का घरसाजन के घर की छत परबैठी मैं मुंडेर परसोच रही थी बादल काला सर परकुछ बूंदें
चल भग जा रे कुत्ते अब ये देस हुआ बेगानालौट जहाँ से आया तेरा यहाँ नहीं ठिकाना हर कुत्ते का
शहर में जाना मानो जी का जंजाल जी जी जी जीशहर में रहना है मुहाल बस मज़बूरी है जी जी
शर्मा जी पार्क में जावें नित जावें हैं दोड़ लगाएंअच्छा खावें बढ़िया पहने सेहत पे यों ध्यान लगाएं एक दिनअनहोनी