Doggy Duet Song
आ चल भूरी पूंछ हिला लें मुझ पर चर्बी चढ़ गयी हैआंटी चैरिटी में दूध पिलाकर मूड रोमांटिक कर गयी […]
आ चल भूरी पूंछ हिला लें मुझ पर चर्बी चढ़ गयी हैआंटी चैरिटी में दूध पिलाकर मूड रोमांटिक कर गयी […]
वक़्त के आगे कायनात भी मजबूर हो जाती हैइंसान चाहता नहीं मगर अनहोनी हो जाती हैदिल के रिश्तों के बीच
सखी री मोहे बॉस बहुरि सतावैनिस दिन जतन करूँ मुआ किन्तु झांसे में नहीं आवैसखी री मोहे बॉस बहुरि सतावै
आइना हर रोज़ कुछ ज़्यादा डराता जाता हैचेहरे पे चिंता की लकीरें गहराता जाता है।उम्रदराज़ शरीर कुछ और मुरझा जाता
चार बातें सूना दींएक गोलगप्पे के लिएबेआबरू होकर तेरेठेले से हम तो चले फ्री का गोलगप्पाइतना ही तो माँगा थाआलू
गली में भूरी डॉगी ने छः प्यारे प्यारे पपीज़ दिएमासूम थे भूरे से बड़े सुंदर सुन्दर क्यूट से पपीज़ प्यारे
एक अदद सरफिरी बेगम जैसे मौसम रंग बदल रहा हैकभी तपा देता गर्मी से कभी कम्बल कम पड़ रहा है
जो कभी न ख़त्म हो मैं हूँ वो मस्ती का खजानारहता हूँ चिल हरदम चीअरफुल जाने ये ज़मानाआये सामने कोई
तुझसे बढ़कर मेरा कोई महबूब नहींतेरे बिना ऐ मेरे ख़ुदा मेरा वजूद नहींतेरे ही हाथों में क़ाबिज़ मेरी लगाम हैतेरे
तुझमें में खुदा हैमुझ में खुदा हैतेरे खुदा से जोमेरा दिल लगा हैतेरे खुदा कोजो मैंने अपना बनाया हैदुनिया ने
मेरी राह में जिस जिसने कांटे बिछाए थेवो पलकों से चुन चुनकर सब हटाए हैंऊपरवाले का करम है मुझे क्या
एक पुरानी तस्वीर में जकड़े तुम और हमधुंधली सी यादों में सिमटे हैं धुंधले से हमजब बंधन में बंधे थे
श्याम और बनवारी दो बूढ़े दोस्त हैंवे घूमने के तो शौक़ीन हैं मगरज़यादा मंहगी यात्रा के लिएउनके पास पैसे नहीं
आशिक में आवारा हूँ गोया मैंने माना किब्यूटीफुल है तू छुने की बड़ी तमन्ना थीचांटा जड़ दिया मेरे गाल पर
अच्छी खासी गोभी थी मैंरूप से कितनी गोरी थी मैंघर लाये जैसे दुल्हन थी मैंपता नहीं था दुश्मन थी मैं
तेल न शैम्पू न चाहिए कंघीमुझे भाये है मेरी खोपड़ी गंजीबाल गए जब से गायब है मंदीमुझे भाये मेरी खोपड़ी
भैया खाने के शौक़ीन हुआ करते थेबॉडी का खूब ध्यान रखा करते थेलम्बे लम्बे बाल हृष्ट पुष्ट तन बदनमछलियों को
लंगड़े घोड़े ने भगते घोड़े से कहा अबे कहाँ भगे जा रिया होभगते घोड़े ने लंगड़े घोड़े से कहा सब
जो बात अधूरी थी छोड़ीवो बात हमें बतला जाओ सुनते सुनते मैं कह भी गयाकहते कहते तुम सुन न सकेदिल
मुफ्त का भोजन बंट रहा थाबांटता हाथ गर्व कर रहा थाजो दानी का दाहिना हाथ थाएक गर्दन अकड़ी खड़ी थीसामर्थ्य